23 सितंबर 2026
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संजय राउत की संसद पर टिप्पणी से शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम नाराज़, कहा — 'संवैधानिक संस्थाओं की पवित्रता से न करें खिलवाड़'

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संजय राउत की संसद पर टिप्पणी से शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम नाराज़, कहा — 'संवैधानिक संस्थाओं की पवित्रता से न करें खिलवाड़'

सारांश

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने संजय राउत की संसद पर टिप्पणी की कड़ी निंदा की, मुस्लिम पर्सनल लॉ को संविधान-विरोधी बताया और चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदों पर सवाल उठाए — महाराष्ट्र की राजनीति में टकराव का नया अध्याय।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 23 सितंबर 2026 को मुंबई में संजय राउत की संसद पर टिप्पणी की कड़ी निंदा की।
निरुपम ने कहा कि राजनीति पर आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के साथ समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ के बिना वसीयत उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे के नियमों को संविधान-विरोधी बताया।
चुनाव आयोग के तीन कमिश्नरों के बीच मतभेद की कथित जाँच रिपोर्ट का हवाला दिया — पिछले महीनों में करीब 13-14 पत्र लिखे जाने का उल्लेख।
संजय राउत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 23 सितंबर 2026 को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत की संसद को लेकर की गई विवादित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। निरुपम ने स्पष्ट कहा कि राजनेताओं और राजनीति पर आलोचना स्वीकार्य है, परंतु भारत की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

राउत की टिप्पणी पर निरुपम का सख्त रुख

निरुपम ने कहा, 'संजय राउत जिस संसद के सदस्य हैं, उसी संसद पर आपत्तिजनक और घटिया टिप्पणी करना शर्मनाक है। भारत के पवित्र संविधान से बनी इस संस्था की अवमानना किसी भी लोकतांत्रिक व्यक्ति को स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने राउत से गुज़ारिश की कि वे कम से कम संसद को विवाद से बाहर रखें और संवैधानिक संस्थाओं की पवित्रता बनाए रखना सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

मुस्लिम पर्सनल लॉ और सुप्रीम कोर्ट नोटिस पर निरुपम का बयान

इसी प्रेस वार्ता में शिवसेना के प्रवक्ता निरुपम ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बिना वसीयत के उत्तराधिकार के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के नोटिस जारी करने का विषय भी उठाया। उन्होंने कहा, 'मुस्लिम पर्सनल लॉ कई मामलों में पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव करता है, जो एक सच्चाई है। भारत का संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।'

निरुपम ने विशेष रूप से दो नियमों को संविधान के विरुद्ध बताया — पहला, बिना वसीयत के उत्तराधिकार से संबंधित नियम और दूसरा, विरासत में मिली संपत्ति के बंटवारे में पुरुषों व महिलाओं के बीच असमानता। उनके अनुसार, ये दोनों प्रावधान भारत के संवैधानिक ढाँचे के अनुरूप नहीं हैं।

चुनाव आयोग के कामकाज पर उठाए सवाल

निरुपम ने चुनाव आयोग के कामकाज पर प्रकाशित एक जाँच रिपोर्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें दावा किया गया है कि तीनों इलेक्शन कमिश्नरों के बीच कुछ मामलों में मतभेद रहे, फिर भी असहमतियों के बावजूद फ़ैसले लिए गए। रिपोर्ट के अनुसार, दो इलेक्शन कमिश्नरों ने पिछले कुछ महीनों में करीब 13-14 पत्र लिखे।

इस पर निरुपम ने कहा कि चुनाव आयोग को संचालित करने वाला संस्थागत एवं कानूनी ढाँचा बिल्कुल स्पष्ट है — सभी निर्णय सर्वसम्मति से होने चाहिए और यदि सहमति न बने तो बहुमत के आधार पर फ़ैसला लिया जाना चाहिए।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों धड़ों — शिवसेना (यूबीटी) और शिवसेना (शिंदे गुट) — के बीच वैचारिक और सार्वजनिक बयानबाज़ी का टकराव लगातार तेज़ हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संवैधानिक संस्थाओं को लेकर इस तरह की सार्वजनिक बहस आगामी चुनावी माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकती है।

आगे क्या

फिलहाल संजय राउत की ओर से इस प्रतिक्रिया पर कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़ी याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय की अगली सुनवाई इस मुद्दे को और अधिक राजनीतिक महत्व दे सकती है। चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट पर भी विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आज उसी के दो प्रवक्ता संसद की गरिमा पर सार्वजनिक रूप से आमने-सामने हैं। चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदों पर निरुपम का बयान इस बहस को एक नया आयाम देता है — यह सवाल उठाता है कि लोकतंत्र की जिन संस्थाओं की रक्षा की बात हो रही है, क्या वे खुद भीतर से मज़बूत हैं।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने संजय राउत की किस टिप्पणी की निंदा की?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत द्वारा संसद को लेकर की गई विवादित टिप्पणी की निंदा की। निरुपम का कहना था कि जिस संसद के राउत स्वयं सदस्य हैं, उस पर आपत्तिजनक बयानबाज़ी करना अस्वीकार्य है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर निरुपम ने क्या कहा?
निरुपम ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के बिना वसीयत उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे के नियम भारत के संवैधानिक ढाँचे के विरुद्ध हैं क्योंकि ये पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव करते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का समर्थन किया।
चुनाव आयोग के बारे में निरुपम ने क्या खुलासा किया?
निरुपम ने एक कथित जाँच रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें दावा किया गया कि तीनों इलेक्शन कमिश्नरों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद रहे और असहमतियों के बावजूद फ़ैसले लिए गए। उनके अनुसार, दो कमिश्नरों ने पिछले कुछ महीनों में करीब 13-14 पत्र लिखे।
शिवसेना (यूबीटी) और शिवसेना के बीच यह विवाद क्यों अहम है?
यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच बढ़ते वैचारिक टकराव का प्रतीक है। संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक बयानबाज़ी आगामी चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है।
क्या संजय राउत ने निरुपम की प्रतिक्रिया पर कोई जवाब दिया?
23 सितंबर 2026 तक संजय राउत की ओर से निरुपम की निंदा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस पर राउत का बयान आना अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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