विपक्ष का प्रोटेस्ट लोकतंत्र नहीं, परिवार बचाने के लिए: शिवसेना के संजय निरुपम का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग और विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर किया जा रहा विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं के अपने परिवारों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए है। उनका यह बयान उस दिन आया जब विपक्षी सांसदों ने एक प्रोटेस्ट मार्च निकाला था, जिसे उन्होंने 'लोकतंत्र बचाने' की मुहिम बताया था।
विपक्ष पर सीधा निशाना
निरुपम ने कहा, 'मंगलवार को विपक्षी सांसदों का प्रोटेस्ट मार्च, जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि वह लोकतंत्र बचाने के लिए है, असल में उनके अपने परिवारों को बचाने के लिए था।' उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं में से कई अपनी-अपनी पार्टियों को 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों' की तरह चलाते हैं। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से इन दलों का राजनीतिक प्रभाव लगातार सिकुड़ रहा है और वे एक के बाद एक चुनाव हार रहे हैं।
निरुपम ने कहा कि पराजय के कारणों को दूर करने के बजाय विपक्ष अपनी नाकामी का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ रहा है — कभी SIR के विरुद्ध, कभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के विरुद्ध और अब मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध। उन्होंने इसे निराधार करार दिया।
चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका
शिवसेना प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य आयुक्तों की नियुक्ति संविधान के प्रावधानों के अनुसार होती है। उन्होंने कहा कि यदि हटाने की नौबत आए, तो उसके लिए भी संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं। उनके अनुसार, 'इस प्रकार की नाटकबाजी से कुछ हासिल नहीं होगा — विपक्ष को जमीन पर उतरकर बुनियादी मुद्दों पर काम करना चाहिए।'
SIR प्रक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय
निरुपम ने इस बात पर ज़ोर दिया कि SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जो संवैधानिक दायरे में और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में संचालित हो रही है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी प्रकार की प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी हुआ करती थी। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासन में चुनाव आयुक्त की नियुक्ति केवल प्रधानमंत्री के विवेक पर निर्भर थी, जबकि अब एक समिति का गठन किया गया है जिसमें विपक्ष के नेता को भी सदस्य बनाया गया है — जो पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी व्यवस्था है।
निरुपम ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पूरा मामला फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और आने वाले दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दोनों चुनाव आयुक्तों को न्यायालय के नोटिस का जवाब देना है। ऐसे में जंतर-मंतर या कहीं और प्रदर्शन करने से राजनीतिक चमक तो मिल सकती है, लेकिन आंदोलन का कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा।
विपक्ष के 'सीज़न-2' पर कटाक्ष
निरुपम ने विपक्ष पर व्यंग्य करते हुए कहा कि वे अब 'रियलिटी शो' की तरह आंदोलन चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने स्वयं घोषणा की है कि जंतर-मंतर पर 'सीजन-2' शुरू करने जा रहे हैं। यह टिप्पणी स्पष्ट तौर पर विपक्षी रणनीति को गंभीरता-रहित बताने की कोशिश थी।
मोदी के 25 वर्षों के शासन पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के तौर पर 25 वर्ष पूरे करने के अवसर पर निरुपम ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 25 सालों से लगातार सत्ता के शिखर पर बैठे हैं — लगभग 12 साल गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर और पिछले 13 सालों से देश के प्रधानमंत्री के तौर पर।' आने वाले दिनों में यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई के साथ और तेज़ होने की संभावना है।