भाजपा विधायक अतुल भातखलकर ने SIR प्रक्रिया का बचाव किया, राज ठाकरे के मार्च को बताया 'नौटंकी'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक अतुल भातखलकर ने 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का जोरदार बचाव किया। पश्चिम बंगाल में करीब 90 लाख मतदाताओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की कार्रवाई पर पूर्व न्यायाधीश जस्टिस नरीमन द्वारा उठाए गए सवालों के संदर्भ में भातखलकर ने कहा कि SIR कोई नई व्यवस्था नहीं, बल्कि कानून-सम्मत और संवैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त प्रक्रिया है। उन्होंने इसके साथ ही विपक्ष से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
SIR प्रक्रिया पर भातखलकर का पक्ष
भाजपा विधायक ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया हर 10-15 वर्ष में नियमित रूप से होती है और सर्वोच्च न्यायालय ने इसे पहले भी मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल बनाया जा रहा है जैसे यह पहली बार हो रहा हो, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। भातखलकर ने यह भी याद दिलाया कि केरल में चुनाव के बाद कांग्रेस नेताओं ने स्वयं SIR की प्रशंसा की थी, लेकिन बिहार के मामले में वे चुप रहे — यह दोहरा रवैया उजागर करता है कि विरोध राजनीति-प्रेरित है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है और SIR उसके कार्य का अभिन्न हिस्सा है।
जस्टिस नरीमन की आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया
पूर्व न्यायाधीश जस्टिस नरीमन द्वारा SIR पर उठाए गए सवालों को भातखलकर ने 'आपत्तिजनक' करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश भी इस तरह के बयान देते हैं, तो यह संस्थागत विश्वसनीयता के लिए उचित नहीं है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग का कार्य योग्य मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखना है और SIR इसी उद्देश्य की पूर्ति करती है।
राज ठाकरे के 'गर्जना मार्च' पर हमला
चुनाव आयोग के विरुद्ध महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के 'गर्जना मार्च' को भातखलकर ने 'नौटंकी' और 'रुदाली मोर्चा' बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने महाविकास अघाड़ी को नकार दिया है, इसीलिए विपक्ष चुनाव और चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है। भातखलकर ने कहा कि जब जीत होती है तो EVM और चुनाव आयोग को 'सही' बताया जाता है — जैसे तमिलनाडु में विजय की जीत के बाद हुआ — और जब हार होती है तो उन पर उँगली उठाई जाती है।
कैप्टन स्मित मच्छार और विपक्ष की चुप्पी
भाजपा विधायक ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को लेकर विपक्षी नेताओं के रुख पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अरविंद केजरीवाल और अखिलेश यादव ने कैप्टन की सराहना करने में इतना समय क्यों लगाया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अभी भी इस विषय पर सार्वजनिक रूप से मौन हैं। भातखलकर का दावा है कि राहुल गांधी अल्पसंख्यक मतों की राजनीति को ध्यान में रखकर कैप्टन की प्रशंसा करने से बच रहे हैं — हालाँकि यह उनका अपना आरोप है, जिसे राहुल गांधी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मणिशंकर अय्यर के बयान पर निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के हालिया भारत-पाकिस्तान संबंधी बयान पर भातखलकर ने कहा कि अय्यर बार-बार भारत-विरोधी और पाकिस्तान-समर्थक बयान देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अय्यर के पुराने कथित बयानों का उल्लेख किया — जिनमें पाकिस्तान में जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने संबंधी टिप्पणी और 2013 के कांग्रेस अधिवेशन में मोदी पर कथित बयान शामिल हैं। हालाँकि, भातखलकर ने यह भी कहा कि अय्यर जैसे व्यक्ति के बयानों पर अधिक समय खर्च करना उचित नहीं है।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद ऐसे समय में उभरा है जब SIR प्रक्रिया को लेकर राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छिड़ी हुई है और विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राज्य विधानसभाओं में भी गूँजने की संभावना है।