जगदंबिका पाल का आरोप: राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जगदंबिका पाल ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन के सांसदों पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर देश में अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। पाल के अनुसार, दो दिनों से चल रहा यह विरोध प्रदर्शन न केवल बेबुनियाद है, बल्कि संवैधानिक प्रक्रियाओं को बाधित करने का प्रयास भी है।
आकाशवाणी प्रवेश पर सवाल
पाल ने कहा कि विपक्षी सांसद आकाशवाणी के परिसर में घुस गए, जो एक प्रतिबंधित क्षेत्र है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, 'यह विरोध प्रदर्शन करने की जगह नहीं है।' उनके अनुसार, इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है और इसे किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
SIR पर BJP का पक्ष
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर पाल ने कहा कि यह प्रक्रिया नई नहीं है — कांग्रेस के शासनकाल में भी 12 बार SIR आयोजित किए गए थे। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं, जो एक नियमित लोकतांत्रिक अभ्यास है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर हंगामा करना राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
विपक्ष पर 'अराजकता' का आरोप
पाल ने कहा कि विपक्ष के पास जनता से जुड़ा कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसीलिए वे 'हिंसा और अराजकता फैलाने के लिए जमीन पर उतर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष BJP से नहीं, बल्कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' से मुकाबला कर रहा है — यह एक तीखी टिप्पणी थी जो विपक्षी गठबंधन की आंतरिक कलह की ओर इशारा करती है।
PM मोदी के 25 वर्ष: 'स्वर्णिम काल'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पाल ने कहा कि आने वाली पीढ़ियाँ इस कालखंड को स्वर्णिम काल के रूप में याद करेंगी। BJP नेता संजय उपाध्याय ने भी मोदी को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से लेकर पिछले 13 वर्षों तक प्रधानमंत्री के पद पर गरीबों और देशवासियों की सेवा की है। उपाध्याय ने 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प का भी उल्लेख किया।
आगे क्या
इंडिया गठबंधन का विरोध प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है, जबकि BJP की प्रतिक्रिया भी तेज़ होती दिख रही है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद का शीतकालीन सत्र नज़दीक है और SIR को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त पद और चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर बहस पहले से ही राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है।