सीजेआई सूर्यकांत BJP सदस्य की तरह न करें व्यवहार: कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने 12 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्य की तरह आचरण नहीं करना चाहिए, बल्कि उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वे देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय दिलाएँ। हरिप्रसाद एक विरोध मार्च के सिलसिले में दिल्ली पहुँचे थे, जिसमें कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने की योजना बनाई है।
हरिप्रसाद के आरोप और माँग
हरिप्रसाद ने कहा, 'CJI को BJP के सदस्य की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। वे सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं — उन्हें सभी को न्याय देना चाहिए।' कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख ने यह भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक निष्पक्ष चुनाव आयुक्त होना चाहिए था, लेकिन उनके अनुसार वे लंबे समय से BJP के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं। इसी कारण विपक्ष उनके इस्तीफे की माँग कर रहा है।
विपक्ष की मुख्य माँग यह है कि मतदाता सूची की 'विशेष गहन समीक्षा' (SIR) प्रक्रिया को रद्द किया जाए और ज्ञानेश कुमार पद छोड़ें। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के जरिये नए मतदाताओं, विशेषकर युवा पहली बार वोटरों, के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
राहुल गांधी का नेतृत्व
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मार्च को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित बताने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित मार्च 'किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं, बल्कि सभी भारतीयों का है।' गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार SIR प्रक्रिया से सीधा लाभ उठा रही है।
कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती ने कहा, 'जो कोई भी संवैधानिक भारत में विश्वास रखता है, उसका इस आंदोलन में शामिल होने के लिए स्वागत है। हम राहुल गांधी के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करेंगे।'
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद गड्डम वामसी कृष्णा ने BJP पर 'Gen Z' यानी युवा पहली बार मतदाताओं के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'वे पहली बार वोट देने वालों के मत नहीं जीत पा रहे। इसीलिए उन्होंने 'फॉर्म 6' पेश किया है और SIR लाई गई है।' महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने घोषणा की कि यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक ज्ञानेश कुमार पद नहीं छोड़ देते।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह टकराव ऐसे समय में आया है जब ECI द्वारा शुरू की गई SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। गौरतलब है कि SIR के तहत मतदाता सूची की गहन जाँच की जाती है, जिसमें कुछ नाम हटाए भी जा सकते हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से पक्षपाती है। इंडिया ब्लॉक द्वारा न्यायपालिका और चुनाव आयोग दोनों को एक साथ निशाने पर लेना इस आंदोलन को नया आयाम देता है।
आगे क्या होगा
विपक्षी गठबंधन का दबाव अब सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे तक पहुँच चुका है। नागरिक समाज संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने भी इसी मुद्दे पर ECI के विरुद्ध प्रदर्शन किया है। यदि इंडिया ब्लॉक सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करता है, तो SIR प्रक्रिया की कानूनी वैधता पर न्यायिक समीक्षा की संभावना बन सकती है।