२३ विपक्षी दलों ने CJI को पत्र लिखकर चुनावी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने 3 जुलाई 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक महत्वपूर्ण पत्र सार्वजनिक किया, जो 28 जून 2026 को 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय सांसद ने मिलकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखा था। इस पत्र में देश की चुनावी प्रक्रिया, चुनाव आयोग की भूमिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर गंभीर चिंताएँ उठाई गई हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि पारदर्शिता के हित में इस पत्र को अब जनता के सामने रखा जा रहा है।
पत्र में क्या उठाए गए मुद्दे
पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी प्रमुख हैं। पत्र में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति दर्ज की गई है। आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया के कारण बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिसमें गरीब, दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और प्रवासी मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुए।
इसके अलावा, दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती और अधिकारियों के तबादलों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
विपक्ष की प्रमुख माँगें
संयुक्त पत्र में विपक्षी दलों ने सर्वोच्च न्यायालय से कई ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इनमें शामिल हैं: आगामी राज्यों में SIR प्रक्रिया को तत्काल स्थगित करना; इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा आयोजित करना; और आवश्यकता पड़ने पर बैलेट पेपर प्रणाली पर पुनर्विचार करना। साथ ही, केंद्रीय जाँच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को रोकने की भी अपील की गई है।
वेणुगोपाल का तर्क
वेणुगोपाल ने अपनी पोस्ट में कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में देश की चुनावी लोकतांत्रिक व्यवस्था अब तक के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। उनके अनुसार, लोकतंत्र को कार्यपालिका की ज्यादतियों से बचाना न्यायपालिका की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चुनाव केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए, बल्कि जनता को भी ऐसा महसूस होना चाहिए — और यदि ऐसा नहीं होता, तो करोड़ों मतदाताओं के साथ अन्याय जारी रहेगा।
आम जनता और लोकतंत्र पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। गौरतलब है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर विपक्ष पहले भी सवाल उठाता रहा है, लेकिन इस बार 23 दलों का एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप माँगना इस विवाद को नई तीव्रता देता है। यदि सर्वोच्च न्यायालय इस पत्र पर संज्ञान लेता है, तो यह चुनावी सुधार की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।