29 जून 2026
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कर्नाटक SIR प्रक्रिया पर प्रियांक खड़गे की चेतावनी: 'पहले हमारे सवालों का जवाब दे चुनाव आयोग'

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कर्नाटक SIR प्रक्रिया पर प्रियांक खड़गे की चेतावनी: 'पहले हमारे सवालों का जवाब दे चुनाव आयोग'

सारांश

कर्नाटक में 29 जून से शुरू होने वाली मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया से ठीक पहले गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने चुनाव आयोग को चेतावनी दी है — पहले कांग्रेस के सवालों का जवाब दो, फिर आगे बढ़ो। AI के इस्तेमाल और 89 लाख मतदाताओं के कथित विलोपन का हवाला देते हुए यह विवाद राष्ट्रीय महत्व का बन गया है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 29 जून 2026 को माँग की कि ECI SIR प्रक्रिया शुरू करने से पहले कांग्रेस के 8 से 10 सवालों का जवाब दे।
चुनाव आयोग ने 29 जून से 29 जुलाई 2026 तक कर्नाटक में घर-घर सत्यापन अभियान की तैयारी पूरी कर ली है।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयोग — दोनों को लिखित आपत्तियाँ सौंपी हैं, अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं।
खड़गे ने AI सॉफ्टवेयर के ऑडिट और पारदर्शिता पर सवाल उठाए; अन्य राज्यों में कथित तौर पर 89 लाख मतदाताओं को हटाए जाने का हवाला दिया।
कांग्रेस मतदाता सूची पुनरीक्षण के विरोध में नहीं, लेकिन केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में कमजोर वर्गों के विलोपन के आरोपों का उल्लेख किया।
पार्टी मुद्दे के कानूनी पहलुओं की जाँच कर रही है और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय होगी।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार, 29 जून 2026 को स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग (ECI) को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले कांग्रेस द्वारा उठाए गए 8 से 10 सवालों का लिखित जवाब देना होगा। बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से चर्चा कर आगे की रणनीति तय करेगी।

SIR प्रक्रिया क्या है और कब से शुरू होगी

चुनाव आयोग ने कर्नाटक में 29 जून से 29 जुलाई 2026 तक घर-घर सत्यापन अभियान के साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबु कुमार ने इस अभ्यास के संबंध में बेंगलुरु में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। यह प्रक्रिया मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

कांग्रेस की मुख्य आपत्तियाँ

खड़गे ने बताया कि कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयोग — दोनों को लिखित रूप में अपनी चिंताएँ सौंपी हैं, परंतु अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उनके प्रमुख सवालों में शामिल हैं: चुनाव आयोग की 'तार्किक विसंगति' की परिभाषा क्या है; किस आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जा सकता है; और नाम हटाने से पहले कानूनी नोटिस क्यों नहीं दिया जाता।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि वर्तनी की मामूली गलतियों या नाम में छोटी विसंगतियों के आधार पर किसी नागरिक का मताधिकार नहीं छीना जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि कोई विवाद है तो संबंधित व्यक्ति को उचित न्यायाधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

AI के उपयोग पर पारदर्शिता की माँग

खड़गे ने मतदाता सूची संशोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'अगर AI सॉफ्टवेयर का उपयोग मतदाता सूची से नामों की पहचान करने और हटाने के लिए किया जा रहा है, तो सॉफ्टवेयर का ऑडिट किसने किया है और यह कैसे काम करता है, कोई नहीं जानता।' उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में इसी प्रक्रिया के तहत कथित तौर पर 89 लाख मतदाताओं को ट्रिब्यूनल में चुनौती देने के पर्याप्त अवसर के बिना सूची से हटाया गया। यहाँ तक कि एक सेवानिवृत्त ट्रिब्यूनल न्यायाधीश ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि ऐसे मामलों को निपटाने में चार वर्ष लगेंगे।

अन्य राज्यों के अनुभव और कांग्रेस की चिंता

खड़गे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस मतदाता सूची पुनरीक्षण के विरोध में नहीं है — बल्कि वह इसे चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी मानती है। हालाँकि, उन्होंने केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आयोजित SIR अभ्यास का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ समाज के कमजोर वर्गों को सूची से बाहर किए जाने के आरोप लगे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय स्तर पर मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने शुरू किए हैं।

आगे की कार्रवाई

कांग्रेस ने कर्नाटक में एक साथ जागरूकता अभियान भी चलाया है और अपने कार्यकर्ताओं से SIR प्रक्रिया के दौरान सतर्क रहने का आग्रह किया है। खड़गे ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे के कानूनी पहलुओं की भी जाँच कर रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श के बाद ही भविष्य की रणनीति तय होगी — जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना भी खारिज नहीं की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और कर्नाटक में यह प्रक्रिया एक सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के सामने शुरू हो रही है — जो इसे राष्ट्रीय राजनीतिक संघर्ष का नया मोर्चा बनाती है। चुनाव आयोग की चुप्पी — लिखित आपत्तियों के बावजूद कोई जवाब नहीं — संस्थागत संवाद की कमी को उजागर करती है। असली परीक्षा यह है कि क्या ECI प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन सवालों का सार्वजनिक जवाब देगा, या विवाद अदालत तक पहुँचेगा।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने के लिए चलाया जाने वाला विशेष अभियान है। कर्नाटक में यह 29 जून से 29 जुलाई 2026 तक घर-घर सत्यापन के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
प्रियांक खड़गे ने चुनाव आयोग से क्या माँगा है?
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने माँग की है कि ECI SIR प्रक्रिया शुरू करने से पहले कांग्रेस द्वारा उठाए गए 8 से 10 सवालों का लिखित जवाब दे। इनमें 'तार्किक विसंगति' की परिभाषा, नाम हटाने से पहले कानूनी नोटिस की अनिवार्यता और AI सॉफ्टवेयर के ऑडिट जैसे मुद्दे शामिल हैं।
क्या कांग्रेस मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध कर रही है?
नहीं। खड़गे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस मतदाता सूची पुनरीक्षण को चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी मानती है और उसका विरोध नहीं करती। पार्टी की आपत्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और कमजोर वर्गों के संभावित विलोपन को लेकर है।
AI सॉफ्टवेयर के उपयोग पर क्या विवाद है?
खड़गे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने में AI सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है, जिसका ऑडिट किसने किया और यह कैसे काम करता है — यह सार्वजनिक नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में कथित तौर पर 89 लाख मतदाताओं को पर्याप्त कानूनी अवसर दिए बिना सूची से हटाया गया।
इस विवाद में आगे क्या होने की संभावना है?
कांग्रेस मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय करेगी। पार्टी मुद्दे के कानूनी पहलुओं की जाँच कर रही है, जिससे न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना बनी हुई है। साथ ही कांग्रेस ने राज्यभर में जागरूकता अभियान भी शुरू किया है।
राष्ट्र प्रेस
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