13 अगस्त 2026
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रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना को मिलीं 20 बोलियाँ, ₹7,280 करोड़ की स्कीम से आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

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रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना को मिलीं 20 बोलियाँ, ₹7,280 करोड़ की स्कीम से आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

सारांश

केंद्र की ₹7,280 करोड़ की REPM विनिर्माण योजना को 20 बोलियाँ मिलना उद्योग जगत के भरोसे का बड़ा संकेत है। EV, विंड एनर्जी और रक्षा क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले इन मैग्नेट के घरेलू उत्पादन से भारत की आयात निर्भरता घटेगी और वैश्विक रेयर अर्थ बाज़ार में देश की स्थिति मज़बूत होगी।

मुख्य बातें

भारी उद्योग मंत्रालय को सिन्टर्ड REPM विनिर्माण योजना के तहत 13 अगस्त 2026 को 20 तकनीकी बोलियाँ प्राप्त हुईं।
योजना को 25 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹7,280 करोड़ के वित्तीय प्रावधान के साथ मंजूरी दी थी।
लक्ष्य: देश में 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता स्थापित करना।
अधिकतम 5 लाभार्थियों को प्रत्येक 1,200 MT/वर्ष क्षमता आवंटित होगी।
योजना की कुल अवधि 7 वर्ष — 2 वर्ष संयंत्र स्थापना, 5 वर्ष बिक्री प्रोत्साहन।
REPM का उपयोग EV, विंड टर्बाइन, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में होता है; योजना से आयात निर्भरता घटने की उम्मीद।

भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) की सिन्टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) विनिर्माण प्रोत्साहन योजना को उद्योग जगत से जोरदार प्रतिक्रिया मिली है — 13 अगस्त 2026 को तकनीकी बोलियाँ खोले जाने पर कुल 20 बोलियाँ प्राप्त हुईं। ₹7,280 करोड़ के वित्तीय प्रावधान वाली यह योजना भारत में एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता खड़ी करने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में अब तक का सबसे ठोस सरकारी कदम है।

योजना की पृष्ठभूमि और मंजूरी

25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को स्वीकृति दी थी। मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की और 20 मार्च 2026 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (CPP) पोर्टल पर प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) प्रकाशित किया। 7 अप्रैल 2026 को बोली-पूर्व सम्मेलन आयोजित हुआ और 12 अगस्त 2026 बोलियाँ जमा करने की अंतिम तिथि रही।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और प्रमुख देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

योजना की मुख्य संरचना

अपनी तरह की इस पहली योजना का लक्ष्य देश में एकीकृत REPM विनिर्माण संयंत्रों की कुल 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता स्थापित करना है। वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के ज़रिये यह क्षमता अधिकतम 5 लाभार्थियों में आवंटित की जाएगी, जिनमें से प्रत्येक को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता मिलेगी।

योजना की कुल अवधि सात वर्ष है — पहले दो वर्ष संयंत्र स्थापना के लिए और अगले पाँच वर्ष REPM की बिक्री पर प्रोत्साहन (incentive) देने के लिए।

REPM का महत्व और वैश्विक संदर्भ

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट दुनिया के सर्वाधिक शक्तिशाली चुंबकों में गिने जाते हैं। इनका व्यापक उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), विंड टर्बाइनों, उच्च-तकनीकी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में होता है। गौरतलब है कि भारत अभी तक NDPR ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी मूल्य श्रृंखला के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के सफल क्रियान्वयन से NDPR ऑक्साइड से तैयार मैग्नेट तक की पूरी घरेलू मूल्य श्रृंखला विकसित होगी, जिससे आयात निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

आगे की राह

13 अगस्त 2026 को बोलीदाताओं की मौजूदगी में भारी उद्योग मंत्रालय में खोली गई तकनीकी बोलियों की अब विस्तृत समीक्षा होगी। इसके बाद वित्तीय बोलियाँ खोली जाएँगी और अंततः लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि 20 बोलियों की संख्या उद्योग जगत के उच्च विश्वास का संकेत है, हालाँकि असली परीक्षा तब होगी जब संयंत्र स्थापना की समयसीमा का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। रेयर अर्थ क्षेत्र में चीन की वैश्विक पकड़ — जो कच्चे माल से लेकर प्रसंस्करण तक फैली है — को देखते हुए भारतीय संयंत्रों को NDPR ऑक्साइड की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी। योजना की संरचना में उत्पादन मील के पत्थरों से जुड़े प्रोत्साहन का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि आपूर्ति श्रृंखला की ऊपरी कड़ियों — खनन और पृथक्करण — को घरेलू स्तर पर कैसे विकसित किया जाएगा। बिना इस ऊर्ध्व एकीकरण के, भारत असेंबली-स्तर पर आत्मनिर्भर तो बन सकता है, पर रणनीतिक निर्भरता बनी रहेगी।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिन्टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना क्या है?
यह भारी उद्योग मंत्रालय की ₹7,280 करोड़ की केंद्रीय योजना है, जिसे 25 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य भारत में एकीकृत REPM विनिर्माण संयंत्रों की 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता स्थापित करना और आयात निर्भरता घटाना है।
इस योजना के तहत 20 बोलियाँ कब और कैसे मिलीं?
CPP पोर्टल पर 20 मार्च 2026 को RFP जारी हुआ और 12 अगस्त 2026 बोलियाँ जमा करने की अंतिम तिथि थी। 13 अगस्त 2026 को बोलीदाताओं की उपस्थिति में भारी उद्योग मंत्रालय में तकनीकी बोलियाँ खोली गईं, जिनकी संख्या 20 रही।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का उपयोग किन क्षेत्रों में होता है?
REPM दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में से हैं। इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), विंड टर्बाइनों, उच्च-तकनीकी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में होता है।
योजना से कितने लाभार्थियों को और कितनी क्षमता मिलेगी?
वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के ज़रिये अधिकतम 5 लाभार्थियों का चयन होगा। प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता आवंटित की जाएगी।
इस योजना की समयसीमा क्या है और इसका क्या असर होगा?
योजना की कुल अवधि 7 वर्ष है — पहले 2 वर्ष संयंत्र स्थापना के लिए और अगले 5 वर्ष बिक्री प्रोत्साहन के लिए। सफल क्रियान्वयन से NDPR ऑक्साइड से तैयार मैग्नेट तक की पूरी घरेलू मूल्य श्रृंखला विकसित होगी और आयात निर्भरता घटेगी।
राष्ट्र प्रेस
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