केंद्र ने सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण संयंत्रों के लिए बोलियां आमंत्रित कीं
सारांश
Key Takeaways
- सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के मैन्युफैक्चरिंग के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं।
- इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष क्षमता वाले संयंत्र स्थापित होंगे।
- बोली-पूर्व सम्मेलन 7 अप्रैल, 2026 को आयोजित किया जाएगा।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारी उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एकीकृत सिंटर्ड एनडीएफईबी रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) के मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाले प्लांट्स की स्थापना हेतु बोलियां आमंत्रित की हैं। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन करने के लिए प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किया गया है।
मंत्रालय ने जानकारी दी कि इच्छुक आवेदक देश में एकीकृत सिंटर्ड एनडीएफईबी आरईपीएम विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए अपनी बोलियां प्रस्तुत कर सकते हैं और इस योजना के तहत पूंजी सब्सिडी एवं बिक्री-संबंधी प्रोत्साहनों का लाभ उठा सकते हैं। निविदा प्रक्रिया केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (सीपीपी) पोर्टल पर दो चरणों में (तकनीकी बोली और वित्तीय बोली) पारदर्शी न्यूनतम लागत प्रणाली (एलसीएस) के तहत ऑनलाइन आयोजित की जाएगी।
निविदा दस्तावेज 20 मार्च, 2026 से उपलब्ध होंगे। बोली-पूर्व सम्मेलन 7 अप्रैल, 2026 को आयोजित किया जाएगा। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई, 2026 है और तकनीकी बोलियां 29 मई, 2026 को खोली जाएंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर 2025 को 7,280 करोड़ रुपए के वित्तीय परिव्यय के साथ सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईएम) के निर्माण को प्रोत्साहित करने की योजना को मंजूरी दी थी। इस पहल का उद्देश्य भारत में प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन (एमटीपीए) की एकीकृत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना करना है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भारत वैश्विक आरईएम बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अपनी पहचान बनाएगा।
इस योजना के तहत 750 करोड़ रुपए की पूंजीगत सब्सिडी और 6,450 करोड़ रुपए का बिक्री-संबंधी प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, तीन सबसे कम बोली लगाने वालों को आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड से एनडीपीआर ऑक्साइड की सीमित आपूर्ति भी दी जाएगी।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विश्व के सबसे प्रभावशाली मैग्नेट्स में से एक हैं और इनका उपयोग विद्युत वाहनों, पवन टर्बाइनों, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारत में एनडीपीआर ऑक्साइड से लेकर तैयार चुंबकों तक की पूरी मूल्य श्रृंखला का निर्माण करने की योजना से इस क्षेत्र में आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होने की संभावना है।