भारत के पास 8.5 मिलियन टन दुर्लभ खनिज भंडार, फिर भी आयात पर निर्भरता: डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत के पास 8.5 मिलियन टन दुर्लभ खनिज भंडार, फिर भी आयात पर निर्भरता: डॉ. जितेंद्र सिंह

सारांश

भारत में 8.52 मिलियन टन दुर्लभ खनिज ऑक्साइड का विशाल भंडार है, लेकिन गुणवत्ता और प्रोसेसिंग की कमी के कारण देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। केंद्रीय मंत्री डॉ. राजेंद्र सिंह ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

Key Takeaways

  • भारत के पास 8.52 मिलियन टन दुर्लभ खनिज भंडार है।
  • कम गुणवत्ता वाले अयस्क और प्रोसेसिंग उद्योग की कमी आयात पर निर्भरता का कारण हैं।
  • सरकार ने 2025 में योजनाएँ शुरू की हैं।
  • हर साल 6,000 मीट्रिक टन मैग्नेट बनाने का लक्ष्य है।
  • रेयर अर्थ मैग्नेट का उपयोग अनेक तकनीकी क्षेत्रों में होता है।

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के पास लगभग 8.52 मिलियन टन दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ) ऑक्साइड का भंडार है, फिर भी देश को रेयर अर्थ मैग्नेट और संबंधित उत्पादों के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। इसका मुख्य कारण कम गुणवत्ता वाले भंडार, कठोर नियम, और सीमित प्रोसेसिंग इंडस्ट्री है। यह जानकारी गुरुवार को संसद में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. राजेंद्र सिंह ने दी।

राज्यसभा में लिखित उत्तर में केंद्रीय राज्य मंत्री सिंह ने बताया कि परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडीईआर) ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में फैले मोनाजाइट भंडारों में लगभग 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड के बराबर संसाधन की पहचान की है।

इसके अलावा, गुजरात और राजस्थान के हार्ड रॉक क्षेत्रों में करीब 1.29 मिलियन टन अतिरिक्त दुर्लभ खनिज संसाधन भी मिले हैं।

इतने बड़े भंडार के बावजूद, भारत की आयात पर निर्भरता बनी हुई है। इसके पीछे तीन प्रमुख कारण बताये गए हैं। पहला, घरेलू अयस्क की गुणवत्ता बहुत कम है (लगभग 0.056-0.058 प्रतिशत) और इसमें रेडियोएक्टिविटी भी होती है, जिससे इसे निकालना महंगा और कठिन हो जाता है; दूसरा, तटीय विनियमन क्षेत्र के नियम, जंगल और मैंग्रोव से जुड़े नियमों के कारण खनन योग्य भंडार सीमित हैं; और तीसरा, देश में रेयर अर्थ को प्रोसेस करने की पर्याप्त इंडस्ट्री का अभाव है।

इस कमी को दूर करने के लिए, केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में एक योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देना है। इस योजना के लिए कुल 7,280 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है।

इस योजना के तहत भारत में हर वर्ष 6,000 मीट्रिक टन रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पांच वर्षों में 6,450 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि और 730 करोड़ रुपए की पूंजी सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश में एक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट संयंत्र स्थापित किया गया है, जहां हर वर्ष 3 टन समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट का उत्पादन किया जाएगा, जो रक्षा और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उपयोगी होगा।

उन्होंने आगे बताया कि इन प्रयासों को और मजबूती प्रदान करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विशेष रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, उच्च तकनीकी इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस उपकरणों और रक्षा प्रणालियों में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Point of View

लेकिन गुणवत्ता और प्रोसेसिंग उद्योग की कमी हमें आयात पर निर्भर बनाती है। यह स्थिति देश की आत्मनिर्भरता के लिए चिंता का विषय है। सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
04/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत में दुर्लभ खनिजों का भंडार कितना है?
भारत में लगभग 8.52 मिलियन टन दुर्लभ खनिज ऑक्साइड का भंडार है।
भारत को दुर्लभ खनिजों के लिए क्यों आयात करना पड़ता है?
भारत को आयात करना पड़ता है क्योंकि घरेलू अयस्क की गुणवत्ता कम है और प्रोसेसिंग उद्योग की कमी है।
सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने नवंबर 2025 में एक योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के निर्माण को बढ़ावा देना है।
भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन कब शुरू होगा?
भारत में हर वर्ष 6,000 मीट्रिक टन रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
रेयर अर्थ मैग्नेट के उपयोग क्या हैं?
रेयर अर्थ मैग्नेट का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, और रक्षा प्रणालियों में होता है।
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