कन्नूर की सीपीआई(एम) समर्थित 'हलाल फायिदा' सोसाइटी के जमाकर्ता परेशान, केरल CM ने जांच का दिया आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
कन्नूर में सीपीआई(एम) नेताओं की पहल पर स्थापित शरिया-अनुकूल सहकारी वित्तीय संस्था 'हलाल फायिदा कोऑपरेटिव सोसाइटी' के जमाकर्ता इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट में हैं। 13 अगस्त 2026 को सामने आई शिकायतों के अनुसार, कई जमाकर्ता अपनी जमा राशि वापस नहीं निकाल पा रहे हैं। इन शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मामले की जांच कराने का वादा किया है।
मुख्य घटनाक्रम
थालिपरम्बा के विधायक टीके गोविंदन ने मय्यिल इलाके के जमाकर्ताओं की शिकायतें मुख्यमंत्री सतीशन को सौंपीं। गोविंदन ने बताया कि अनेक पीड़ितों ने उनसे संपर्क कर अपनी जमा राशि वापस पाने में आ रही मुश्किलों की जानकारी दी थी। गोविंदन के अनुसार, "मेरे द्वारा सौंपी गई शिकायतों को देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले की जांच शुरू की जाएगी।"
इस बीच एक उल्लेखनीय घटनाक्रम में, जमाकर्ता नसार — जिन्होंने यह मुद्दा सबसे पहले खुलकर उठाया था — ने बताया कि उनकी ₹1 लाख की जमा राशि उन्हें वापस कर दी गई है। इससे पहले नसार ने कहा था कि संस्था के मुख्य प्रमोटर एम. शजार से बार-बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला और उनके पास कानूनी रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
संस्था की पृष्ठभूमि
'हलाल फायिदा कोऑपरेटिव सोसाइटी' का उद्घाटन 24 दिसंबर 2017 को कन्नूर में तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने जिले के वरिष्ठ सीपीआई(एम) नेताओं की उपस्थिति में किया था। पार्टी की युवा शाखा से उभरे वरिष्ठ सीपीआई(एम) नेता एम. शजार इसके मुख्य प्रमोटर रहे हैं।
यह संस्था केरल में इस्लामिक बैंकिंग को बढ़ावा देने की सीपीआई(एम) की व्यापक कोशिशों का हिस्सा थी। गौरतलब है कि 2006-11 के दौरान वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के इस्लामिक बैंक स्थापित करने के पहले प्रयास पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि यह प्रस्ताव मौजूदा बैंकिंग कानूनों के अनुरूप नहीं है। इसके बाद इस पहल को सीधे नियामक ढाँचे से बाहर, एक सहकारी समिति के रूप में आगे बढ़ाया गया।
राजनीतिक पहलू
यह विवाद राजनीतिक दृष्टि से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायतें सौंपने वाले विधायक टीके गोविंदन स्वयं हाल के विधानसभा चुनाव तक कन्नूर में सीपीआई(एम) के एक प्रमुख नेता थे। पार्टी द्वारा राज्य सीपीआई(एम) सचिव एम.वी. गोविंदन की पत्नी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने थालिपरम्बा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के समर्थन से जीत हासिल की।
गोविंदन ने यह भी स्वीकार किया कि इस संस्था को लेकर चिंताएँ सबसे पहले मय्यिल सीपीआई(एम) यूनिट में उठी थीं और बाद में कन्नूर जिला सीपीआई(एम) समिति के सामने इन पर चर्चा हुई थी।
आम जनता पर असर
प्राइमरी कोऑपरेटिव सोसाइटियाँ राज्य की सहकारी व्यवस्था के तहत संचालित होती हैं और कई सोसाइटियाँ आम नागरिकों से जमा राशि स्वीकार करने के साथ ऋण भी देती हैं। 'हलाल फायिदा' को शरिया-अनुकूल वित्तीय व्यवस्था चाहने वाले लोगों को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ने के एक माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया था। अब जमाकर्ताओं की परेशानियाँ इस मॉडल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
क्या होगा आगे
हालाँकि नसार की ₹1 लाख की राशि वापस की जा चुकी है, लेकिन अन्य जमाकर्ताओं की शिकायतें अभी भी बनी हुई हैं। प्रस्तावित जांच से यह स्पष्ट करना होगा कि ये मामले व्यक्तिगत हैं अथवा किसी बड़ी वित्तीय अनियमितता की ओर संकेत करते हैं। सीपीआई(एम) और विशेष रूप से उसके कन्नूर संगठन के लिए यह विवाद उस पहल की असहज याद दिलाता है जिसे कभी व्यापक राजनीतिक समर्थन के साथ आगे बढ़ाया गया था।