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कन्नूर में सीपीआई(एम) का फंड घोटाला: कोडियेरी स्मारक के लिए जुटाए ₹1 करोड़ का हिसाब गायब

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कन्नूर में सीपीआई(एम) का फंड घोटाला: कोडियेरी स्मारक के लिए जुटाए ₹1 करोड़ का हिसाब गायब

सारांश

पार्टी के सबसे अभेद्य गढ़ से आई यह खबर सीपीआई(एम) के लिए महज़ एक स्थानीय विवाद नहीं है। कोडियेरी बालकृष्णन के नाम पर जुटाए ₹1 करोड़ का हिसाब न होना और संपत्ति का पार्टी के बजाय व्यक्तिगत नाम पर पंजीकरण — यह कन्नूर की संगठनात्मक साख पर सीधा सवाल है।

मुख्य बातें

कन्नूर में सीपीआई(एम) पर आरोप — कोडियेरी बालकृष्णन स्मारक के लिए जुटाए गए लगभग ₹1 करोड़ का कोई पारदर्शी हिसाब नहीं।
कथित तौर पर ₹70 लाख की संपत्ति पार्टी के बजाय तत्कालीन स्थानीय सचिव के नाम पर पंजीकृत की गई।
संपत्ति को गिरवी रखकर ₹30 लाख जुटाए गए; कार्यकर्ताओं और सहकारी कर्मचारियों से ₹20 लाख अतिरिक्त उधार लिए गए।
कार्यकर्ताओं के दबाव के बाद पार्टी ने स्थानीय सचिव को हटाया और आंतरिक जांच के आदेश दिए।
यह विवाद पय्यानूर में अनसुलझे फंड आरोपों के बाद सामने आया है, जो एक बार-बार उभरने वाले पैटर्न की ओर इशारा करता है।

केरल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के सबसे मज़बूत गढ़ कन्नूर से एक गंभीर वित्तीय विवाद सामने आया है। दिवंगत पूर्व राज्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन के नाम पर प्रस्तावित स्मारक भवन के लिए एकत्रित किए गए लगभग ₹1 करोड़ का कोई पारदर्शी हिसाब-किताब न होने के आरोपों ने 31 जुलाई को पार्टी के भीतर हलचल मचा दी। यह विवाद पय्यानूर में फंड संग्रह को लेकर लगे पुराने अनसुलझे आरोपों के ठीक बाद उभरा है, जो संकेत देता है कि वित्तीय अनियमितताएं कन्नूर इकाई के लिए एक बार-बार उभरने वाली समस्या बनती जा रही हैं।

घोटाले का मूल स्वरूप

ताज़ा आरोप कोडियेरी बालकृष्णन के नाम पर बनने वाले स्थानीय समिति कार्यालय के लिए ज़मीन और इमारत की खरीद से जुड़े हैं। कथित तौर पर लगभग ₹70 लाख में खरीदी गई यह संपत्ति पार्टी के नाम के बजाय तत्कालीन स्थानीय सचिव के नाम पर पंजीकृत कराई गई — जो संगठनात्मक नियमों का सीधा उल्लंघन है।

आरोपों के अनुसार, बाद में ₹30 लाख जुटाने के लिए इसी संपत्ति को गिरवी रखा गया, जबकि पार्टी कार्यकर्ताओं और सहकारी संस्थाओं के कर्मचारियों से अतिरिक्त ₹20 लाख उधार लिए गए। सार्वजनिक प्रदर्शनियों और कूपन बिक्री के माध्यम से भी फंड जुटाया गया, परंतु इस पूरी राशि का कोई विस्तृत ब्यौरा पार्टी समितियों के सामने नहीं रखा गया।

पार्टी की आंतरिक प्रतिक्रिया

जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव के बाद पार्टी ने संबंधित स्थानीय सचिव को पद से हटा दिया और आंतरिक जांच के आदेश दिए। हालांकि, पूर्व पदाधिकारी ने यह दावा किया है कि हर बड़ा निर्णय पार्टी नेतृत्व की जानकारी में लिया गया था। इस बयान ने जवाबदेही की मांग को स्थानीय स्तर से ऊपर तक पहुँचा दिया है।

कन्नूर का राजनीतिक महत्त्व

सीपीआई(एम) के लिए कन्नूर महज़ एक जिला नहीं, बल्कि पार्टी की वैचारिक और संगठनात्मक पहचान का केंद्र है। यह पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, राज्य सचिव एमवी गोविंदन, वरिष्ठ नेता पी. जयराजन, ईपी जयराजन, एमवी जयराजन और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा का गृह जिला है। ऐसे में यहाँ से वित्तीय विवादों का लगातार उभरना पार्टी नेतृत्व के लिए गहरी शर्मिंदगी का विषय बन गया है।

बार-बार उभरती अनियमितताएं

यह ऐसे समय में आया है जब पय्यानूर में फंड संग्रह को लेकर लगे आरोप अभी भी अनसुलझे हैं। आलोचकों का कहना है कि यह पैटर्न दर्शाता है कि कन्नूर में वित्तीय अनुशासन की समस्या प्रणालीगत है, न कि कोई अपवाद। गौरतलब है कि जो जिला दशकों से पार्टी के संगठनात्मक मॉडल के रूप में पेश किया जाता रहा है, वही अब पारदर्शिता और आंतरिक निगरानी के सवालों के घेरे में है।

आगे की राह

पार्टी की आंतरिक जांच के नतीजे अभी सामने आने बाकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जवाबदेही तय नहीं हुई तो यह विवाद केरल में सीपीआई(एम) की साख को और कमज़ोर कर सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब पार्टी अगले विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल सिर्फ एक सचिव पर नहीं, पूरी निगरानी संरचना पर उठता है। पूर्व पदाधिकारी का यह दावा कि 'हर फैसला नेतृत्व की जानकारी में हुआ' — अगर सच है — तो जवाबदेही की माँग स्थानीय नहीं, शीर्ष नेतृत्व तक जानी चाहिए। केरल चुनावों से पहले यह विवाद पार्टी की उस छवि को नुकसान पहुँचाता है जो वह दशकों से 'जनता की पार्टी' के रूप में बनाती आई है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कन्नूर में सीपीआई(एम) पर क्या आरोप लगे हैं?
दिवंगत पूर्व राज्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन के नाम पर प्रस्तावित स्मारक भवन के लिए जुटाए गए लगभग ₹1 करोड़ का कोई विस्तृत हिसाब पार्टी समितियों के सामने नहीं रखा गया। इसके अलावा ₹70 लाख की संपत्ति कथित तौर पर पार्टी के बजाय तत्कालीन स्थानीय सचिव के नाम पर पंजीकृत कराई गई।
सीपीआई(एम) ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव के बाद पार्टी ने संबंधित स्थानीय सचिव को पद से हटा दिया और आंतरिक जांच के आदेश दिए। हालांकि, जांच के नतीजे अभी सामने नहीं आए हैं।
इस विवाद में कितनी राशि का मामला है?
कुल मिलाकर लगभग ₹1 करोड़ की राशि का हिसाब नहीं दिया गया। इसमें ₹70 लाख की संपत्ति खरीद, उसे गिरवी रखकर जुटाए ₹30 लाख, और कार्यकर्ताओं व सहकारी कर्मचारियों से उधार लिए गए ₹20 लाख शामिल हैं।
कन्नूर सीपीआई(एम) के लिए क्यों इतना महत्त्वपूर्ण है?
कन्नूर सीपीआई(एम) का वैचारिक और संगठनात्मक केंद्र माना जाता है। यह पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, राज्य सचिव एमवी गोविंदन और कई अन्य शीर्ष नेताओं का गृह जिला है, इसलिए यहाँ से वित्तीय विवाद का उभरना पार्टी की साख के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है।
क्या कन्नूर में पहले भी ऐसे वित्तीय विवाद हुए हैं?
हाँ, यह विवाद पय्यानूर में फंड संग्रह को लेकर लगे पुराने अनसुलझे आरोपों के बाद सामने आया है। आलोचकों का कहना है कि यह पैटर्न दर्शाता है कि वित्तीय अनियमितताएं कन्नूर इकाई के लिए एक बार-बार उभरने वाली चुनौती बन गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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