केरल हाई कोर्ट का पय्यन्नूर विधायक कुन्हीकृष्णन को नोटिस, सीपीआई-एम की मुश्किलें बढ़ीं
सारांश
मुख्य बातें
केरल हाई कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को पय्यन्नूर के विधायक वी. कुन्हीकृष्णन को एक चुनावी याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका पूर्व विधायक टी.आई. मधुसूदनन ने दायर की है, जिसमें उन्होंने कन्नूर के इस राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र में कुन्हीकृष्णन की जीत को रद्द करने की माँग की है। यह मामला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई-एम — के लिए पहले से चल रहे आंतरिक संकट को और गहरा करता है।
याचिका में क्या आरोप हैं
मधुसूदनन, जो पिछली विधानसभा में पय्यन्नूर से विधायक रहे थे, ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कुन्हीकृष्णन के चुनाव प्रचार ने उन्हें कथित तौर पर 'शहीद फंड चोर' के रूप में प्रस्तुत किया — यह आरोप कि उन्होंने शहीदों के परिजनों के लिए आवंटित धनराशि का दुरुपयोग किया। याचिका के अनुसार, इस दावे को पुष्ट करने के लिए कोई दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया था।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस प्रचार अभियान ने जानबूझकर मधुसूदनन की छवि को एक दागी सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में पेश किया, जिससे मतदाता गुमराह हुए और चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। इसी आधार पर उन्होंने कुन्हीकृष्णन का निर्वाचन रद्द करने की माँग की है।
हाई कोर्ट का रुख
नोटिस जारी करते हुए केरल हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पहले यह परखेगा कि चुनावी याचिका विधिसम्मत रूप से स्वीकार्य है या नहीं, क्योंकि याचिका में कथित तौर पर कुछ प्रक्रियागत कमियाँ पाई गई हैं। यह प्रारंभिक जाँच तय करेगी कि मामला आगे सुनवाई योग्य है या नहीं।
नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक कुन्हीकृष्णन ने कहा, "किसी को भी अपनी शिकायत लेकर न्यायपालिका के पास जाने का अधिकार है। हम भी उसी के अनुसार इससे निपटेंगे।" उन्होंने इस कानूनी चुनौती को असामान्य नहीं बताया।
सीपीआई-एम के लिए राजनीतिक संदर्भ
पय्यन्नूर को कन्नूर में सीपीआई-एम के सबसे मज़बूत वैचारिक और संगठनात्मक गढ़ों में से एक माना जाता है। कन्नूर जिला पार्टी का सबसे बड़ा कैडर आधार वाला जिला है।
2026 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई-एम को कन्नूर में एक अभूतपूर्व झटका लगा — पार्टी के दो प्रमुख बागी नेताओं, पय्यन्नूर में कुन्हीकृष्णन और थलीपरम्बु में टी.के. गोविंदन, ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के समर्थन से चुनाव लड़ा और आधिकारिक सीपीआई-एम उम्मीदवारों को पराजित किया। ये दोनों सीटें लंबे समय से पार्टी के भावनात्मक और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण गढ़ रही हैं।
पार्टी की आत्म-समीक्षा और नई उलझन
गौरतलब है कि यह नोटिस उन दिनों के कुछ ही बाद आया है जब सीपीआई-एम ने अपनी हार के कारणों पर आंतरिक मूल्यांकन में स्वीकार किया था कि उम्मीदवार चयन में खामियाँ रहीं। ऐसे में न्यायिक जाँच का यह नया मोर्चा पार्टी की मुश्किलों को और बढ़ा देता है।
अब जब पय्यन्नूर का चुनाव न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ चुका है, तो यह मामला मतगणना के बाद भी राजनीतिक सुर्खियों में बना रहेगा — और सीपीआई-एम के लिए आने वाले महीनों में संगठनात्मक पुनर्निर्माण की राह और कठिन हो सकती है।