31 जुलाई 2026
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केरल हाई कोर्ट का पय्यन्नूर विधायक कुन्हीकृष्णन को नोटिस, सीपीआई-एम की मुश्किलें बढ़ीं

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केरल हाई कोर्ट का पय्यन्नूर विधायक कुन्हीकृष्णन को नोटिस, सीपीआई-एम की मुश्किलें बढ़ीं

सारांश

केरल हाई कोर्ट का पय्यन्नूर विधायक कुन्हीकृष्णन को नोटिस सीपीआई-एम के लिए दोहरी मार है — चुनावी हार के बाद अब न्यायिक मोर्चा भी खुल गया है। पार्टी ने खुद उम्मीदवार चयन में खामी मानी थी, और अब वही बागी विधायक अदालत में घिरे हैं।

मुख्य बातें

केरल हाई कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को पय्यन्नूर विधायक वी.
कुन्हीकृष्णन को चुनावी याचिका पर नोटिस जारी किया।
याचिका पूर्व विधायक टी.आई.
मधुसूदनन ने दायर की है; आरोप है कि प्रचार में बिना सबूत के उन्हें 'शहीद फंड चोर' बताया गया।
हाई कोर्ट पहले यह जाँचेगा कि याचिका प्रक्रियागत रूप से स्वीकार्य है या नहीं।
2026 के चुनाव में कुन्हीकृष्णन और थलीपरम्बु के टी.के.
गोविंदन — दोनों सीपीआई-एम बागी — ने यूडीएफ समर्थन से आधिकारिक पार्टी उम्मीदवारों को हराया था।
यह नोटिस उस समय आया है जब सीपीआई-एम ने आंतरिक समीक्षा में उम्मीदवार चयन में खामियाँ स्वीकार की थीं।

केरल हाई कोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को पय्यन्नूर के विधायक वी. कुन्हीकृष्णन को एक चुनावी याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका पूर्व विधायक टी.आई. मधुसूदनन ने दायर की है, जिसमें उन्होंने कन्नूर के इस राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र में कुन्हीकृष्णन की जीत को रद्द करने की माँग की है। यह मामला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई-एम — के लिए पहले से चल रहे आंतरिक संकट को और गहरा करता है।

याचिका में क्या आरोप हैं

मधुसूदनन, जो पिछली विधानसभा में पय्यन्नूर से विधायक रहे थे, ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि कुन्हीकृष्णन के चुनाव प्रचार ने उन्हें कथित तौर पर 'शहीद फंड चोर' के रूप में प्रस्तुत किया — यह आरोप कि उन्होंने शहीदों के परिजनों के लिए आवंटित धनराशि का दुरुपयोग किया। याचिका के अनुसार, इस दावे को पुष्ट करने के लिए कोई दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस प्रचार अभियान ने जानबूझकर मधुसूदनन की छवि को एक दागी सार्वजनिक व्यक्तित्व के रूप में पेश किया, जिससे मतदाता गुमराह हुए और चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। इसी आधार पर उन्होंने कुन्हीकृष्णन का निर्वाचन रद्द करने की माँग की है।

हाई कोर्ट का रुख

नोटिस जारी करते हुए केरल हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पहले यह परखेगा कि चुनावी याचिका विधिसम्मत रूप से स्वीकार्य है या नहीं, क्योंकि याचिका में कथित तौर पर कुछ प्रक्रियागत कमियाँ पाई गई हैं। यह प्रारंभिक जाँच तय करेगी कि मामला आगे सुनवाई योग्य है या नहीं।

नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक कुन्हीकृष्णन ने कहा, "किसी को भी अपनी शिकायत लेकर न्यायपालिका के पास जाने का अधिकार है। हम भी उसी के अनुसार इससे निपटेंगे।" उन्होंने इस कानूनी चुनौती को असामान्य नहीं बताया।

सीपीआई-एम के लिए राजनीतिक संदर्भ

पय्यन्नूर को कन्नूर में सीपीआई-एम के सबसे मज़बूत वैचारिक और संगठनात्मक गढ़ों में से एक माना जाता है। कन्नूर जिला पार्टी का सबसे बड़ा कैडर आधार वाला जिला है।

2026 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई-एम को कन्नूर में एक अभूतपूर्व झटका लगा — पार्टी के दो प्रमुख बागी नेताओं, पय्यन्नूर में कुन्हीकृष्णन और थलीपरम्बु में टी.के. गोविंदन, ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के समर्थन से चुनाव लड़ा और आधिकारिक सीपीआई-एम उम्मीदवारों को पराजित किया। ये दोनों सीटें लंबे समय से पार्टी के भावनात्मक और राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण गढ़ रही हैं।

पार्टी की आत्म-समीक्षा और नई उलझन

गौरतलब है कि यह नोटिस उन दिनों के कुछ ही बाद आया है जब सीपीआई-एम ने अपनी हार के कारणों पर आंतरिक मूल्यांकन में स्वीकार किया था कि उम्मीदवार चयन में खामियाँ रहीं। ऐसे में न्यायिक जाँच का यह नया मोर्चा पार्टी की मुश्किलों को और बढ़ा देता है।

अब जब पय्यन्नूर का चुनाव न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ चुका है, तो यह मामला मतगणना के बाद भी राजनीतिक सुर्खियों में बना रहेगा — और सीपीआई-एम के लिए आने वाले महीनों में संगठनात्मक पुनर्निर्माण की राह और कठिन हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके अपने कैडर ने विपक्ष के साथ मिलकर उसे उसी के गढ़ में हराया। पार्टी ने उम्मीदवार चयन में गलती तो मानी, लेकिन अनुशासनात्मक कार्रवाई की बजाय अब न्यायालय में उसी बागी का बचाव करना होगा — यह विडंबना गहरी है। असली सवाल यह है कि क्या सीपीआई-एम इस न्यायिक और संगठनात्मक दोहरे संकट से उबरते हुए 2031 से पहले कन्नूर में अपनी साख बहाल कर पाएगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई कोर्ट ने पय्यन्नूर विधायक को नोटिस क्यों जारी किया?
पूर्व विधायक टी.आई. मधुसूदनन की चुनावी याचिका पर केरल हाई कोर्ट ने विधायक वी. कुन्हीकृष्णन को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप है कि कुन्हीकृष्णन के प्रचार अभियान ने बिना दस्तावेज़ी सबूत के मधुसूदनन को 'शहीद फंड चोर' बताकर मतदाताओं को गुमराह किया।
टी.आई. मधुसूदनन की याचिका में क्या माँग है?
मधुसूदनन ने माँग की है कि पय्यन्नूर से वी. कुन्हीकृष्णन का निर्वाचन रद्द किया जाए। उनका तर्क है कि झूठे प्रचार अभियान ने उनकी छवि को नुकसान पहुँचाया और चुनाव परिणाम को प्रभावित किया।
2026 के केरल चुनाव में सीपीआई-एम को कन्नूर में क्या झटका लगा?
2026 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई-एम के दो बागी नेताओं — पय्यन्नूर में कुन्हीकृष्णन और थलीपरम्बु में टी.के. गोविंदन — ने यूडीएफ के समर्थन से चुनाव लड़ा और आधिकारिक पार्टी उम्मीदवारों को हराया। ये दोनों सीटें सीपीआई-एम के परंपरागत गढ़ रही हैं।
क्या हाई कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई करेगा?
अभी हाई कोर्ट पहले यह परखेगा कि याचिका प्रक्रियागत रूप से स्वीकार्य है या नहीं, क्योंकि इसमें कुछ प्रक्रियागत कमियाँ बताई गई हैं। इस प्रारंभिक जाँच के बाद ही तय होगा कि मामला आगे सुनवाई के योग्य है या नहीं।
सीपीआई-एम ने अपनी हार के बारे में क्या कहा था?
सीपीआई-एम ने अपनी आंतरिक समीक्षा में माना था कि उम्मीदवार चयन में खामियाँ रहीं। यह नोटिस उस स्वीकारोक्ति के कुछ ही दिनों बाद आया है, जिससे पार्टी की राजनीतिक और संगठनात्मक मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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