कन्नूर में बागी विधायक के समर्थक के झींगा फार्म में आगजनी, दूसरे हमले से सीपीआई(एम) की अंदरूनी कलह उजागर
सारांश
मुख्य बातें
केरल के कन्नूर में 23 जुलाई को बागी विधायक वी. कुंजीकृष्णन के प्रमुख समर्थक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के पूर्व सदस्य टी. पुरुषोत्तमन के झींगा फार्म में आधी रात के बाद आगजनी की घटना सामने आई, जिसने पार्टी की आंतरिक दरारों को एक बार फिर उजागर कर दिया। यह उन पर दूसरा हमला है — पहला हमला विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुआ था।
घटनाक्रम: क्या हुआ पय्यन्नूर में
यह घटना पय्यन्नूर के कंदनकली इलाके में हुई, जहाँ आधी रात के कुछ देर बाद झींगा पालन के उपकरण रखने वाले एक शेड में आग लगा दी गई। गुरुवार सुबह जब पुरुषोत्तमन अपने फार्म पर झींगों को चारा देने पहुँचे, तब उन्हें इस घटना की जानकारी हुई। शेड में रखा झींगा चारा, जाल, परिवहन के बक्से, पाइप और ट्रे पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए।
पुरुषोत्तमन ने आरोप लगाया कि झींगों के बच्चों को मारने की नीयत से तालाब में किसी अज्ञात तरल पदार्थ को मिलाया गया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि हमले में किसी विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल किया गया — हालाँकि पुलिस जाँच अभी जारी है।
दूसरा हमला, पहला मामला भी अनसुलझा नहीं
यह पुरुषोत्तमन पर दूसरा हमला है। इससे पहले विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उनके घर पर हमला किया गया था और उनकी कार में आग लगाई गई थी। उस मामले में सीपीआई(एम) के पाँच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। ताज़ा घटना के बाद पुरुषोत्तमन ने कहा कि वे पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएँगे।
राजनीतिक आरोप: पूर्व विधायक पर निशाना
पुरुषोत्तमन ने इस हमले के लिए पूर्व विधायक टी.आई. मधुसूदनन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया, 'पिछले कुछ दिनों से सीपीआई(एम) कार्यकर्ता उन लोगों पर हमला करने की योजना बना रहे थे, जिन्होंने वी. कुंजीकृष्णन का समर्थन किया था। पूर्व विधायक के मेरे खिलाफ बोलने के बाद सोशल मीडिया पर भी लगातार अभियान चलाया गया। यह हमला उसी के बाद हुआ।' सीपीआई(एम) की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सीपीआई(एम) के लिए व्यापक संकट
यह घटना ऐसे समय हुई है जब सीपीआई(एम) का राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व हालिया विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे की करारी हार की समीक्षा में जुटा है। 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में पार्टी की सीटें 99 से घटकर मात्र 35 रह गईं — जो दशकों की सबसे बड़ी चुनावी पराजय है।
गौरतलब है कि कन्नूर को लंबे समय से सीपीआई(एम) का सबसे मजबूत संगठनात्मक जिला माना जाता रहा है। लेकिन पार्टी के दो पारंपरिक गढ़ — पय्यन्नूर और तालिपरंबा — में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ-समर्थित बागी उम्मीदवारों की जीत ने पार्टी के भीतर गहरी फूट को उजागर कर दिया है।
आगे क्या होगा
पुलिस जाँच के नतीजे और पुरुषोत्तमन की आधिकारिक शिकायत यह तय करेगी कि इस मामले में आरोप कहाँ तक जाते हैं। यह घटना सीपीआई(एम) नेतृत्व पर दबाव और बढ़ाएगी, जो पहले से ही चुनावी हार के बाद कन्नूर में अपने संगठनात्मक आधार को बचाने की कोशिश कर रहा है। यदि जाँच में राजनीतिक संलिप्तता साबित होती है, तो यह पार्टी के भीतर अनुशासन और आंतरिक लोकतंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करेगी।