29 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल: आईयूएमएल ने सीपीआई का समर्थन किया, पिनाराई विजयन पर 'मालिकाना रवैये' का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल: आईयूएमएल ने सीपीआई का समर्थन किया, पिनाराई विजयन पर 'मालिकाना रवैये' का आरोप

सारांश

केरल में वाम गठबंधन की अंदरूनी दरार और गहरी हो गई है — अब आईयूएमएल भी मैदान में उतर आई है। के.पी.ए. मजीद ने पिनाराई विजयन पर 'मालिकाना रवैये' का आरोप लगाते हुए सीपीआई का खुला समर्थन किया, जो 25 साल पुरानी घुटन की कहानी को सार्वजनिक बहस में ले आया है।

मुख्य बातें

आईयूएमएल नेता के.पी.ए.
मजीद ने 29 अगस्त को 'चंद्रिका' में लेख लिखकर विपक्ष उप-नेता पद विवाद में सीपीआई का समर्थन किया।
केरल विधानसभा में सीपीआई(एम) के 26 और सीपीआई के 8 विधायक हैं; सीपीआई ने उप-नेता पद माँगा, पिनाराई विजयन ने इनकार किया।
मजीद ने आरोप लगाया कि एलडीएफ के चेयरमैन और कन्वीनर पद हमेशा सीपीआई(एम) के पास रहे, सीपीआई 25 वर्षों से हाशिये पर है।
पीएम श्री विवाद का हवाला देते हुए कहा कि सीपीआई की आपत्तियाँ बार-बार नजरअंदाज की गईं।
मजीद ने यूडीएफ को वामपंथी विकल्प बताया; वी.डी.
सतीशन के 100 दिनों को उदाहरण के रूप में पेश किया।

केरल की राजनीति में नया मोड़ आया है जब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक के.पी.ए. मजीद ने विपक्ष के उप-नेता पद को लेकर छिड़े सीपीआई बनाम सीपीआई(एम) विवाद में खुलकर सीपीआई का पक्ष लिया है। 29 अगस्त को आईयूएमएल के मुखपत्र 'चंद्रिका' में प्रकाशित एक लेख में मजीद ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर आरोप लगाया कि वे वामपंथी जनतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) के छोटे सहयोगी दलों के साथ किसी अधीनस्थ की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

विवाद की जड़: उप-नेता पद का टकराव

140 सदस्यीय केरल विधानसभा में सीपीआई(एम) के 26 विधायकों के मुकाबले सीपीआई के 8 विधायक हैं। विपक्षी खेमे में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सीपीआई ने विपक्ष के उप-नेता का पद माँगा है। हालाँकि, पिनाराई विजयन ने इस माँग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पद सीपीआई(एम) के किसी नेता को ही मिलेगा।

मजीद ने इस रुख की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सीपीआई को बस झुककर सीपीआई(एम) के आदेश मानने चाहिए — यह सोच केरल की राजनीति की बुनियादी समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति स्वीकार नहीं करेगा।

सीपीआई के ऐतिहासिक योगदान का संदर्भ

मजीद ने मौजूदा विवाद से आगे बढ़कर केरल में सीपीआई की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने सी. अच्युत मेनन सरकार (1970–77) के कार्यकाल का विशेष जिक्र किया, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि सुधार के क्षेत्र में केरल की बुनियाद रखी गई। उनके अनुसार, सीपीआई(एम) ने जानबूझकर अच्युत मेनन के योगदान को नजरअंदाज किया और भूमि सुधार का श्रेय मुख्यतः ईएमएस नंबूदरीपाद और केआर गौरी अम्मा को दे दिया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एलडीएफ के चेयरमैन और कन्वीनर जैसे प्रमुख संगठनात्मक पद हमेशा सीपीआई(एम) के पास ही रहे हैं, जो गठबंधन के भीतर असमान शक्ति-संतुलन को दर्शाता है।

पीएम श्री विवाद और पुरानी शिकायतें

मजीद ने पिछली एलडीएफ सरकार के दौरान हुए पीएम श्री विवाद का भी हवाला दिया, जब सीपीआई ने पिनाराई विजयन और वी. सिवनकुट्टी द्वारा किए गए समझौते का विरोध किया था, लेकिन सीपीआई(एम) ने उस आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया। उनके अनुसार, पिछले 25 वर्षों से एलडीएफ के भीतर सीपीआई लगातार हाशिये पर धकेली जाती रही है।

उन्होंने कहा, 'सिर्फ एलडीएफ का लेबल लगाने से कोई गठबंधन वामपंथी नहीं बन जाता।'

यूडीएफ और सीपीआई के भविष्य पर संकेत

मजीद ने यह भी स्पष्ट किया कि सीपीआई के भविष्य के राजनीतिक फैसलों से यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) को कोई खतरा नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वी.डी. सतीशन सरकार के शुरुआती 100 दिनों ने यह साबित किया है कि यूडीएफ केरल में वामपंथी विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि सीपीआई को एलडीएफ में बने रहना चाहिए या किसी अन्य विकल्प पर विचार करना चाहिए — इस प्रश्न पर चर्चा तभी होनी चाहिए जब पार्टी अपना रुख स्पष्ट करे। यह विवाद केरल के वाम राजनीतिक परिदृश्य में गहरी दरारों की ओर इशारा करता है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो एलडीएफ की 'सर्वसम्मति' की छवि को चुनौती देती हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह सीपीआई की सौदेबाजी की रणनीति है या गठबंधन पुनर्गठन की वास्तविक शुरुआत — और इसका जवाब केरल की अगली चुनावी बिसात तय करेगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में सीपीआई और सीपीआई(एम) के बीच विवाद किस बात पर है?
विवाद केरल विधानसभा में विपक्ष के उप-नेता पद को लेकर है। सीपीआई ने यह पद माँगा है क्योंकि वह विपक्षी खेमे में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन पिनाराई विजयन ने यह पद सीपीआई(एम) के नेता के लिए आरक्षित रखने की बात कही है।
आईयूएमएल इस विवाद में क्यों शामिल हुई?
आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता के.पी.ए. मजीद ने 'चंद्रिका' में लेख लिखकर सीपीआई का समर्थन किया। उनका कहना है कि पिनाराई विजयन का रवैया एलडीएफ के छोटे सहयोगियों के साथ 'मालिकाना' जैसा है, जो लोकतांत्रिक गठबंधन की भावना के विरुद्ध है।
केरल विधानसभा में सीपीआई और सीपीआई(एम) की ताकत कितनी है?
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में सीपीआई(एम) के 26 विधायक हैं जबकि सीपीआई के 8 विधायक हैं। संख्याबल में बड़े अंतर के बावजूद सीपीआई गठबंधन में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।
मजीद ने सीपीआई के ऐतिहासिक योगदान के बारे में क्या कहा?
मजीद ने सी. अच्युत मेनन सरकार (1970–77) का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि सुधार में केरल की नींव सीपीआई के नेतृत्व में रखी गई थी। उनके अनुसार, सीपीआई(एम) ने अच्युत मेनन के योगदान को जानबूझकर नजरअंदाज किया।
क्या इस विवाद से केरल के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं?
मजीद ने संकेत दिया कि सीपीआई के भविष्य के राजनीतिक विकल्पों पर चर्चा तभी होनी चाहिए जब पार्टी अपना रुख स्पष्ट करे। उन्होंने यूडीएफ को वामपंथी विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया, जो एलडीएफ के पुनर्गठन की संभावना की ओर इशारा करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 18 घंटे पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले