केरल: आईयूएमएल ने सीपीआई का समर्थन किया, पिनाराई विजयन पर 'मालिकाना रवैये' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केरल की राजनीति में नया मोड़ आया है जब इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक के.पी.ए. मजीद ने विपक्ष के उप-नेता पद को लेकर छिड़े सीपीआई बनाम सीपीआई(एम) विवाद में खुलकर सीपीआई का पक्ष लिया है। 29 अगस्त को आईयूएमएल के मुखपत्र 'चंद्रिका' में प्रकाशित एक लेख में मजीद ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर आरोप लगाया कि वे वामपंथी जनतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) के छोटे सहयोगी दलों के साथ किसी अधीनस्थ की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
विवाद की जड़: उप-नेता पद का टकराव
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में सीपीआई(एम) के 26 विधायकों के मुकाबले सीपीआई के 8 विधायक हैं। विपक्षी खेमे में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सीपीआई ने विपक्ष के उप-नेता का पद माँगा है। हालाँकि, पिनाराई विजयन ने इस माँग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह पद सीपीआई(एम) के किसी नेता को ही मिलेगा।
मजीद ने इस रुख की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सीपीआई को बस झुककर सीपीआई(एम) के आदेश मानने चाहिए — यह सोच केरल की राजनीति की बुनियादी समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति स्वीकार नहीं करेगा।
सीपीआई के ऐतिहासिक योगदान का संदर्भ
मजीद ने मौजूदा विवाद से आगे बढ़कर केरल में सीपीआई की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने सी. अच्युत मेनन सरकार (1970–77) के कार्यकाल का विशेष जिक्र किया, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि सुधार के क्षेत्र में केरल की बुनियाद रखी गई। उनके अनुसार, सीपीआई(एम) ने जानबूझकर अच्युत मेनन के योगदान को नजरअंदाज किया और भूमि सुधार का श्रेय मुख्यतः ईएमएस नंबूदरीपाद और केआर गौरी अम्मा को दे दिया।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एलडीएफ के चेयरमैन और कन्वीनर जैसे प्रमुख संगठनात्मक पद हमेशा सीपीआई(एम) के पास ही रहे हैं, जो गठबंधन के भीतर असमान शक्ति-संतुलन को दर्शाता है।
पीएम श्री विवाद और पुरानी शिकायतें
मजीद ने पिछली एलडीएफ सरकार के दौरान हुए पीएम श्री विवाद का भी हवाला दिया, जब सीपीआई ने पिनाराई विजयन और वी. सिवनकुट्टी द्वारा किए गए समझौते का विरोध किया था, लेकिन सीपीआई(एम) ने उस आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया। उनके अनुसार, पिछले 25 वर्षों से एलडीएफ के भीतर सीपीआई लगातार हाशिये पर धकेली जाती रही है।
उन्होंने कहा, 'सिर्फ एलडीएफ का लेबल लगाने से कोई गठबंधन वामपंथी नहीं बन जाता।'
यूडीएफ और सीपीआई के भविष्य पर संकेत
मजीद ने यह भी स्पष्ट किया कि सीपीआई के भविष्य के राजनीतिक फैसलों से यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) को कोई खतरा नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि वी.डी. सतीशन सरकार के शुरुआती 100 दिनों ने यह साबित किया है कि यूडीएफ केरल में वामपंथी विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि सीपीआई को एलडीएफ में बने रहना चाहिए या किसी अन्य विकल्प पर विचार करना चाहिए — इस प्रश्न पर चर्चा तभी होनी चाहिए जब पार्टी अपना रुख स्पष्ट करे। यह विवाद केरल के वाम राजनीतिक परिदृश्य में गहरी दरारों की ओर इशारा करता है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है।