बिनेश कोडियेरी की सीपीआई(एम) में वापसी: तीन साल बाद सदस्यता बहाल, पिनाराई का सीधा हस्तक्षेप चर्चा में
सारांश
मुख्य बातें
केरल की राजनीति में एक बड़े उलटफेर के तहत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] ने बिनेश कोडियेरी की पार्टी सदस्यता बहाल कर दी है — यह कदम तब उठाया गया है जब पार्टी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की बढ़ती जाँच के बीच आंतरिक एकजुटता की तलाश में है। बिनेश, पूर्व सीपीआई(एम) राज्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन के पुत्र हैं, जो तीन वर्षों के राजनीतिक निर्वासन के बाद पार्टी की मुख्यधारा में लौटे हैं।
वापसी की पृष्ठभूमि
बिनेश कोडियेरी को 2023 में बेंगलुरु ड्रग मामले में बरी कर दिया गया था। इसके बावजूद, खबरों के अनुसार, पार्टी सचिव एमवी गोविंदन ने उनकी सदस्यता बहाली के प्रयासों को बार-बार खारिज किया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि निर्णायक मोड़ तिरुवनंतपुरम में ईडी की छापेमारी और उसके बाद हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद आया।
जब केंद्रीय एजेंसियों ने पिनाराई विजयन के आवास पर छापा मारा और उनकी बेटी वीना विजयन से जुड़े कथित मासिक भुगतान विवाद की जाँच तेज की, तो सीपीआई(एम)-डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर आक्रामक प्रदर्शन किए। ईडी के वाहनों पर हमले के मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे, उनमें कई बिनेश कोडियेरी के करीबी सहयोगी और समर्थक बताए जाते हैं।
पिनाराई का हस्तक्षेप और भावनात्मक बदलाव
व्यापक चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने स्वयं बिनेश की वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया और राज्य नेतृत्व के भीतर मौजूद विरोध को दरकिनार कर दिया। कुछ वर्ष पूर्व जब ईडी ने बिनेश को गिरफ्तार किया था, तब कोडियेरी बालकृष्णन को पार्टी और सरकार की रक्षा के लिए सार्वजनिक रूप से अपने बेटे से दूरी बनानी पड़ी थी और पार्टी सचिव पद से अस्थायी रूप से हटना भी पड़ा था।
अब, जब केंद्रीय एजेंसियाँ पिनाराई के अपने परिवार पर सवाल उठा रही हैं, तो कई लोग मानते हैं कि उन्हें कोडियेरी परिवार की भावनात्मक स्थिति का एहसास हो गया है। कोडियेरी बालकृष्णन की मृत्यु के बाद उनके परिवार को अनुचित रूप से किनारे कर दिए जाने की शिकायत पार्टी के एक वर्ग में लंबे समय से रही है।
राजनीतिक समीकरण और गुटबाजी
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने इस फैसले को राजनीतिक न्याय का दुर्लभ क्षण बताया है। इस कदम से कन्नूर और तिरुवनंतपुरम में कोडियेरी समर्थकों का एक मजबूत गुट पिनाराई विजयन के पीछे एकजुट होने के लिए तैयार हो गया है। वर्तमान संकट के समय यह राजनीतिक एकता पिनाराई के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
कई राजनीतिक विश्लेषक इसे सीपीआई(एम) के भीतर सत्ता समीकरणों में हो रहे बदलाव का संकेत भी मान रहे हैं। बिनेश की सदस्यता बहाली न केवल व्यक्तिगत स्तर पर न्याय की बहाली है, बल्कि पार्टी के अंदर गुटबाजी को कम करने और आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए उठाया गया एक रणनीतिक कदम भी है।
आगे क्या
यह घटनाक्रम केरल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है, खासकर तब जब केंद्रीय एजेंसियाँ राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर दबाव बढ़ा रही हैं। सीपीआई(एम) के लिए असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह आंतरिक एकजुटता बाहरी दबाव झेलने में कारगर साबित होती है।