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SIR विवाद: CJI से मिलने की कोशिश पर NDA का पलटवार, 'न्यायपालिका पर दबाव डालना बचकानापन'

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SIR विवाद: CJI से मिलने की कोशिश पर NDA का पलटवार, 'न्यायपालिका पर दबाव डालना बचकानापन'

सारांश

SIR विवाद पर CJI से मिलने की इंडिया गठबंधन की कोशिश NDA के तीखे जवाब का सामना कर रही है। BJP के संजय सरावगी ने इसे 'बचकानापन' कहा, JDU के राजीव रंजन ने इसे 78 वर्षों में अभूतपूर्व बताया — और CJI ने खुद याचिका दायर करने का निर्देश देकर मामला अदालत पर छोड़ दिया।

मुख्य बातें

CJI सूर्यकांत ने इंडिया गठबंधन के नेताओं का मिलने का अनुरोध अस्वीकार कर SIR मुद्दे पर याचिका दायर करने का निर्देश दिया।
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव डालने की 'बचकानी कोशिश' बताया।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित तौर पर पत्थरबाजी और आकाशवाणी भवन पर हमले का आरोप।
JDU नेता राजीव रंजन ने कहा कि 78 वर्षों की आजादी में पहली बार विपक्ष ने CJI से मिलने की कोशिश की — जो संवैधानिक परंपरा के विरुद्ध है।
SIR की प्रक्रिया में 120-150 दिन और 35 लाख से अधिक सरकारी व राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल होते हैं।

पटना, 12 अक्टूबर 2026 — विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद के बीच इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना से मुलाकात का समय माँगने और उनके इनकार के बाद NDA नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। नेताओं ने इसे न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव बनाने का अपरिपक्व प्रयास करार दिया और राहुल गांधी से अराजकता फैलाने की कोशिशों से बाज आने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने SIR प्रक्रिया के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर CJI सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई थी। हालाँकि, CJI ने उनका अनुरोध अस्वीकार करते हुए याचिका दायर करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर दिल्ली पुलिस के सुरक्षा अधिकारियों पर पत्थर फेंके जाने की भी बात सामने आई, जिसने विवाद को और गहरा कर दिया।

गौरतलब है कि SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कथित तौर पर 120 से 150 दिन लगते हैं और इसमें 35 लाख से अधिक सरकारी व राजनीतिक दल के कर्मी शामिल होते हैं। विपक्ष इस पर मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहा है।

NDA नेताओं की प्रतिक्रिया

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'यह न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव डालने की बचकानी कोशिश है। पुलिस पर पत्थर फेंकने वाली अनियंत्रित भीड़ और राहुल गांधी का ज्ञापन सौंपने के लिए मुख्य न्यायाधीश के दरवाजे तक जाना अस्वीकार्य है। देश का सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक रैलियों का मंच नहीं है।'

सरावगी ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा, 'अगर आपमें हिम्मत है, तो कानूनी याचिका दायर करें। इसे सड़कों पर राजनीतिक तमाशा न बनाएं। मुख्य न्यायाधीश पहले ही कह चुके हैं कि मामले की सुनवाई अदालत में हो सकती है।' उन्होंने जंतर-मंतर को बिना अनुमति के घेरने, बैरिकेड्स तोड़ने और आकाशवाणी भवन पर कथित तौर पर पत्थर फेंकने को किसी भी स्थिति में अस्वीकार्य बताया।

भाजपा नेता गुरु प्रकाश ने SIR की संवैधानिकता पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा, 'मूल मुद्दा यह है कि जहाँ भी चुनाव हो रहे हैं — चाहे ईवीएम हो या बैलेट पेपर — कांग्रेस हार रही है।' उन्होंने असम के सिलचर, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की हार का उल्लेख किया।

जदयू का तीखा तंज

जनता दल (यूनाइटेड) — JDU नेता राजीव रंजन ने कहा कि भारत की आजादी के 78 वर्षों में पहली बार ऐसा हो रहा है जब विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय माँग रहे हैं। उन्होंने कहा, 'परंपराओं में आप राष्ट्रपति के पास जाकर अपनी बातें कहते हैं, लेकिन न्यायपालिका के मामलों में सीधे समय माँगना और अपना पक्ष रखना — ऐसा कभी नहीं हुआ।'

यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संवैधानिक मर्यादाओं और विधायिका-न्यायपालिका संबंधों पर एक व्यापक बहस को उजागर करता है। आलोचकों का कहना है कि न्यायपालिका तक सीधे राजनीतिक पहुँच की कोशिश एक खतरनाक नज़ीर बन सकती है।

CJP का जिक्र और व्यापक संदर्भ

सरावगी ने सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम लेते हुए कहा कि संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर उनका कथित तौर पर नई तारीख माँगने और शांति का दावा करते हुए हंगामा करना भी आपत्तिजनक था।

गुरु प्रकाश ने युवाओं की परिभाषा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि असली युवा वह है जो एशियन गेम्स में जापान जाकर देश के लिए 100 से अधिक पदक जीतता है, जो स्टार्टअप खड़ा करता है और जो चंद्रमा के दक्षिणी गोलार्ध तक भारत को पहुँचाता है — न कि सड़कों पर अराजकता फैलाने वाला।

आगे क्या होगा

CJI के निर्देश के बाद अब इंडिया गठबंधन के पास विकल्प है कि वह SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विधिवत याचिका दायर करे। जानकारों के मुताबिक यह मामला चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़े व्यापक सवाल उठाता है। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर संसदीय और कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इसके पीछे एक वैध संवैधानिक तर्क है। असली सवाल यह है कि SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर विपक्ष की चिंताएँ — चाहे जितनी वैध हों — सड़क प्रदर्शन से नहीं, बल्कि अदालत में ही साबित हो सकती हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस मामले में 'विपक्ष बनाम सरकार' की परंपरागत फ्रेमिंग से आगे जाकर यह नहीं पूछ रही कि क्या इंडिया गठबंधन की कानूनी रणनीति और जनांदोलन के बीच समन्वय की कमी ही उसकी असली कमजोरी है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR विवाद क्या है और इसे लेकर विपक्ष क्यों आंदोलित है?
SIR यानी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' मतदाता सूची की समीक्षा की एक प्रक्रिया है, जिसमें कथित तौर पर 120 से 150 दिन और 35 लाख से अधिक कार्यकर्ता शामिल होते हैं। इंडिया गठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और यह मतदाता सूची की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
CJI ने इंडिया गठबंधन नेताओं से मिलने से क्यों इनकार किया?
CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन नेताओं का मिलने का अनुरोध अस्वीकार करते हुए उन्हें विधिवत याचिका दायर करने का निर्देश दिया। यह संवैधानिक परंपरा के अनुरूप है कि न्यायपालिका से जुड़े मुद्दे अदालती प्रक्रिया के माध्यम से ही उठाए जाएँ।
BJP ने इस पूरे घटनाक्रम पर क्या कहा?
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव डालने की 'बचकानी कोशिश' बताया। उन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन में कथित पत्थरबाजी और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च को अस्वीकार्य करार दिया, और कहा कि देश का सर्वोच्च न्यायालय राजनीतिक रैलियों का मंच नहीं है।
JDU नेता ने इसे ऐतिहासिक रूप से क्यों असाधारण बताया?
JDU नेता राजीव रंजन के अनुसार भारत की 78 वर्षों की आजादी में पहली बार ऐसा हुआ कि विपक्ष के नेताओं ने CJI से सीधे मिलने का समय माँगा। उन्होंने कहा कि संवैधानिक परंपरा में ऐसे मुद्दों पर राष्ट्रपति के पास जाया जाता है, न कि न्यायपालिका के पास।
अब इंडिया गठबंधन के पास SIR पर क्या विकल्प बचे हैं?
CJI के स्पष्ट निर्देश के बाद इंडिया गठबंधन को सुप्रीम कोर्ट में विधिवत याचिका दायर करनी होगी। कांग्रेस के वकील पहले भी विभिन्न मुद्दों पर याचिकाएँ दायर करते रहे हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालती रास्ता ही इस विवाद का स्थायी और संवैधानिक समाधान है।
राष्ट्र प्रेस
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