SIR विवाद: CJI से मिलने की कोशिश पर NDA का पलटवार, 'न्यायपालिका पर दबाव डालना बचकानापन'
सारांश
मुख्य बातें
पटना, 12 अक्टूबर 2026 — विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद के बीच इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना से मुलाकात का समय माँगने और उनके इनकार के बाद NDA नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। नेताओं ने इसे न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव बनाने का अपरिपक्व प्रयास करार दिया और राहुल गांधी से अराजकता फैलाने की कोशिशों से बाज आने की माँग की।
मुख्य घटनाक्रम
राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने SIR प्रक्रिया के विरोध में सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर CJI सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई थी। हालाँकि, CJI ने उनका अनुरोध अस्वीकार करते हुए याचिका दायर करने का निर्देश दिया। इसी क्रम में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर दिल्ली पुलिस के सुरक्षा अधिकारियों पर पत्थर फेंके जाने की भी बात सामने आई, जिसने विवाद को और गहरा कर दिया।
गौरतलब है कि SIR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कथित तौर पर 120 से 150 दिन लगते हैं और इसमें 35 लाख से अधिक सरकारी व राजनीतिक दल के कर्मी शामिल होते हैं। विपक्ष इस पर मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहा है।
NDA नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'यह न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव डालने की बचकानी कोशिश है। पुलिस पर पत्थर फेंकने वाली अनियंत्रित भीड़ और राहुल गांधी का ज्ञापन सौंपने के लिए मुख्य न्यायाधीश के दरवाजे तक जाना अस्वीकार्य है। देश का सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक रैलियों का मंच नहीं है।'
सरावगी ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा, 'अगर आपमें हिम्मत है, तो कानूनी याचिका दायर करें। इसे सड़कों पर राजनीतिक तमाशा न बनाएं। मुख्य न्यायाधीश पहले ही कह चुके हैं कि मामले की सुनवाई अदालत में हो सकती है।' उन्होंने जंतर-मंतर को बिना अनुमति के घेरने, बैरिकेड्स तोड़ने और आकाशवाणी भवन पर कथित तौर पर पत्थर फेंकने को किसी भी स्थिति में अस्वीकार्य बताया।
भाजपा नेता गुरु प्रकाश ने SIR की संवैधानिकता पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस विषय पर पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा, 'मूल मुद्दा यह है कि जहाँ भी चुनाव हो रहे हैं — चाहे ईवीएम हो या बैलेट पेपर — कांग्रेस हार रही है।' उन्होंने असम के सिलचर, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की हार का उल्लेख किया।
जदयू का तीखा तंज
जनता दल (यूनाइटेड) — JDU नेता राजीव रंजन ने कहा कि भारत की आजादी के 78 वर्षों में पहली बार ऐसा हो रहा है जब विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय माँग रहे हैं। उन्होंने कहा, 'परंपराओं में आप राष्ट्रपति के पास जाकर अपनी बातें कहते हैं, लेकिन न्यायपालिका के मामलों में सीधे समय माँगना और अपना पक्ष रखना — ऐसा कभी नहीं हुआ।'
यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संवैधानिक मर्यादाओं और विधायिका-न्यायपालिका संबंधों पर एक व्यापक बहस को उजागर करता है। आलोचकों का कहना है कि न्यायपालिका तक सीधे राजनीतिक पहुँच की कोशिश एक खतरनाक नज़ीर बन सकती है।
CJP का जिक्र और व्यापक संदर्भ
सरावगी ने सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम लेते हुए कहा कि संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पर उनका कथित तौर पर नई तारीख माँगने और शांति का दावा करते हुए हंगामा करना भी आपत्तिजनक था।
गुरु प्रकाश ने युवाओं की परिभाषा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि असली युवा वह है जो एशियन गेम्स में जापान जाकर देश के लिए 100 से अधिक पदक जीतता है, जो स्टार्टअप खड़ा करता है और जो चंद्रमा के दक्षिणी गोलार्ध तक भारत को पहुँचाता है — न कि सड़कों पर अराजकता फैलाने वाला।
आगे क्या होगा
CJI के निर्देश के बाद अब इंडिया गठबंधन के पास विकल्प है कि वह SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विधिवत याचिका दायर करे। जानकारों के मुताबिक यह मामला चुनाव आयोग की स्वायत्तता और मतदाता सूची की पारदर्शिता से जुड़े व्यापक सवाल उठाता है। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर संसदीय और कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है।