राहुल गांधी पर BJP का हमला: SIR विवाद में न्यायपालिका व चुनाव आयोग को कमज़ोर करने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने 13 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। BJP सांसद जगदंबिका पाल, तेलंगाना BJP अध्यक्ष रामचंद्र राव और बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सर्वोच्च न्यायालय और न्यायपालिका को राजनीतिक विवाद में घसीट रहे हैं। BJP नेताओं का यह हमला इंडी गठबंधन के उस मार्च के बाद आया है जिसमें विपक्षी नेता SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचे थे।
रामचंद्र राव के गंभीर आरोप
तेलंगाना BJP अध्यक्ष रामचंद्र राव ने कहा, 'राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका को राजनीतिक विवाद में घसीट रहे हैं। वह विपक्ष के नेता हैं और एक संवैधानिक पद पर हैं — उन्हें यह समझना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही SIR पर स्थिति स्पष्ट कर चुका है और भारत के चुनाव आयोग को कई दिशा-निर्देश दिए हैं, जिनका पालन किया जा रहा है।' राव ने यह भी कहा कि 'फॉर्म 6' में बदलाव और नई व्यवस्थाएँ बिहार SIR के बाद ही लागू की गई थीं, और यह काम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था।
राव ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च को 'न्यायपालिका और कानूनी पेशे का अपमान' बताते हुए कहा, 'अगर उन्हें कोई समस्या है, तो वकील उनकी ओर से याचिका दायर कर सकते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करना, जैसे कि वह राजनीतिक विवाद सुलझाने की जगह हो, बेतुका है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पवित्रता और न्यायिक स्वतंत्रता बनाए रखी जानी चाहिए।
जगदंबिका पाल की प्रतिक्रिया
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने इंडी गठबंधन के नेताओं द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के अधिकार को स्वीकार करते हुए भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। लेकिन क्या आजादी के बाद से देश में विपक्ष का कोई ऐसा नेता रहा है जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी की हो कि वह न्यायपालिका के खिलाफ मार्च करेगा?' पाल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को 'न संविधान की जानकारी है, न संसदीय परंपराओं की और न ही न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता की।'
बिहार BJP का तीखा प्रहार
बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मार्च को 'सर्वोच्च न्यायालय पर राजनीतिक दबाव बनाने की शर्मनाक कोशिश' करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने साफ कह दिया था कि अदालत में लंबित मामलों में राजनीतिक ज्ञापन स्वीकार नहीं किए जा सकते। सरावगी ने अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव के साथ इस मार्च में भाग लेने को 'हताशे का प्रदर्शन' बताया।
मार्च के दौरान एक पत्रकार को धक्का देने के आरोपों पर सरावगी ने कहा कि राहुल गांधी ने 'एक महिला पुलिस अधिकारी को गलत तरीके से छुआ' और 'अपनी कोहनी से किसी को मारा' — यह व्यवहार 'अस्वीकार्य' है। गौरतलब है कि इन आरोपों का कांग्रेस की ओर से कोई तत्काल खंडन उपलब्ध नहीं है।
SIR विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया — जो मतदाता सूची को अद्यतन करने की संवैधानिक प्रक्रिया है — विपक्ष के निशाने पर रही है। इंडी गठबंधन का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं और कुछ समुदायों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। BJP का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही इस विषय पर दिशा-निर्देश जारी कर चुका है और चुनाव आयोग उनका पालन कर रहा है। यह विवाद न्यायपालिका, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच संबंधों की एक बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।
आगे की राजनीतिक स्थिति
BJP और कांग्रेस के बीच SIR को लेकर यह टकराव आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और तीखा होने की संभावना है। विपक्ष का सर्वोच्च न्यायालय में दायर मामला अभी लंबित बताया जा रहा है, और न्यायालय की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।