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थरूर का BJP पर पलटवार: 'आपातकाल हटाने के लिए RSS-वामपंथी भी एकजुट हुए थे'

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थरूर का BJP पर पलटवार: 'आपातकाल हटाने के लिए RSS-वामपंथी भी एकजुट हुए थे'

सारांश

BJP के 'सत्ता परिवर्तन' के आरोप पर थरूर ने इतिहास से जवाब दिया — 1977 में RSS, जनसंघ और वामपंथी सब मिलकर इंदिरा को हराने के लिए एकजुट हुए थे। अगर वह विपक्षी एकता जायज़ थी, तो आज की एकता पर सवाल क्यों? SIR अनियमितताओं पर जवाबदेही को उन्होंने असली मुद्दा बताया।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 23 अक्टूबर 2026 को NDTV वर्ल्ड समिट में BJP के 'सत्ता परिवर्तन' के आरोपों को खारिज किया।
थरूर ने 1977 के आपातकाल-विरोधी गठबंधन का उदाहरण दिया जिसमें RSS, BJP, समाजवादी और वामपंथी सब एकजुट हुए थे।
थरूर ने SIR प्रक्रिया में 'गंभीर अनियमितताओं' का हवाला दिया और चुनाव आयोग से जवाबदेही की माँग की।
फ्रांस जैसी हिंसा को थरूर ने सिरे से नकारा; कांग्रेस के 'शांतिपूर्ण और अनुशासित विरोध' के सिद्धांत को दोहराया।
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की बांग्लादेश जेन-जी आंदोलन की तारीफ पर थरूर ने इसे विपक्षी एकता का हिस्सा बताया।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस दावे को सिरे से खारिज किया कि SIR (मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन) विरोधी प्रदर्शनों के पीछे 'सत्ता परिवर्तन' का असली एजेंडा है। NDTV वर्ल्ड समिट में एक संवाद सत्र के दौरान थरूर ने 1977 के आपातकाल-विरोधी गठबंधन का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्ष की एकता ऐतिहासिक रूप से लोकतंत्र की रक्षा का माध्यम रही है, सत्ता हथियाने की साजिश नहीं।

थरूर ने क्या कहा

थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी ही भाषा में जवाब देते हुए कहा: 'मोदी आपातकाल और उसके खात्मे की बात करते रहते हैं। यह खात्मा कैसे हुआ? विपक्ष के ज़रिए — जिसमें RSS और BJP समाजवादियों और वामपंथियों के साथ एकजुट हो गए थे। वे सभी आपातकाल घोषित करने वाली सरकार को हराने के लिए एकसाथ खड़े हुए थे। यह मात्र पचास वर्ष पहले का भारतीय राजनीतिक इतिहास है।'

थरूर का संकेत स्पष्ट था — वह इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार को 1977 में एकजुट जनता पार्टी द्वारा मिली चुनावी शिकस्त की याद दिला रहे थे। उनके अनुसार, उस ऐतिहासिक विपक्षी एकता को भी 'सत्ता परिवर्तन की साजिश' नहीं कहा गया था।

हिंसक प्रदर्शनों को नकारा

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में फ्रांस जैसी हिंसक स्थिति की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा: 'हमारे संविधान और कानूनों में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक भारतीय नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है; हिंसा नहीं।'

थरूर ने जोड़ा: 'फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, उसे भारत की राजनीति में कोई भी बर्दाश्त नहीं करेगा — मैं भी नहीं, और मुझे नहीं लगता कि मेरी पार्टी किसी भी तरह से हिंसा का स्वागत करेगी।'

SIR और चुनाव आयोग पर सवाल

थरूर ने SIR प्रक्रिया में 'गंभीर अनियमितताओं' का हवाला देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इन अनियमितताओं के लिए जवाबदेह होने को तैयार हों, तो 'व्यवस्था फिर से साफ हो सकती है।' उन्होंने कहा: 'चुनावी नियमों को बहाल किया जाएगा; किसी भी भारतीय नागरिक को अपना वोट डालने के संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।'

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी कहा था कि यह आंदोलन 'सत्ता परिवर्तन की लड़ाई' में बदल गया है। BJP इसी बयान को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।

विपक्षी एकता पर रुख

केरल में माकपा (CPI-M) और कांग्रेस के बीच प्रतिद्वंद्विता का सवाल उठने पर थरूर ने AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनका आंदोलन में योगदान सराहनीय है। थरूर ने कहा: 'नेहा बोरा ने विरोध में ऊर्जा, रंग और जोश भर दिया है। यह कांग्रेस के एक उदारवादी पार्टी होने और स्वीकार्यता के बारे में है — यही विपक्षी एकता है।'

यह ऐसे समय में आया है जब INDIA गठबंधन के घटक दल SIR मुद्दे पर एकजुट दिखने की कोशिश में हैं, जबकि राज्यों में उनकी प्रतिद्वंद्विता बनी हुई है। थरूर का यह बयान संकेत देता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसदीय रास्ते से आगे ले जाने की योजना बना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह चतुराई से BJP की अपनी विरासत को उसके खिलाफ इस्तेमाल करता है: 1977 का जनता पार्टी प्रयोग RSS और वामपंथियों का साझा मंच था। असली सवाल SIR पर चुनाव आयोग की जवाबदेही का है, जिस पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर भटक जाती है। थरूर शायद सबसे articulate विपक्षी आवाज़ हैं इस मुद्दे पर, लेकिन उनकी पार्टी के पास अभी तक SIR अनियमितताओं का कोई ठोस साक्ष्य-आधारित श्वेतपत्र नहीं है — जो उनकी बयानबाज़ी को मज़बूत बनाने के लिए ज़रूरी है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशि थरूर ने BJP के 'सत्ता परिवर्तन' के आरोप पर क्या कहा?
थरूर ने NDTV वर्ल्ड समिट में कहा कि विपक्षी एकता लोकतांत्रिक परंपरा है, साजिश नहीं। उन्होंने 1977 का उदाहरण दिया जब RSS, जनसंघ और वामपंथी सब मिलकर इंदिरा गांधी सरकार को हराने के लिए एकजुट हुए थे।
SIR विरोध क्या है और इसका विवाद क्यों है?
SIR यानी मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन एक चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं जिससे मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। BJP इस विरोध को 'सत्ता परिवर्तन की साजिश' बता रही है।
थरूर ने फ्रांस की हिंसा को भारत से जोड़ने के तर्क पर क्या कहा?
थरूर ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान शांतिपूर्ण विरोध को मौलिक अधिकार मानता है, हिंसा को नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी रूप में हिंसक प्रदर्शन का समर्थन नहीं करती।
AISA की नेहा बोरा का इस विवाद से क्या संबंध है?
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के जेन-जी आंदोलन को भारतीय युवाओं के लिए 'प्रेरणा' बताया था। थरूर ने उनकी SIR-विरोधी प्रदर्शनों में भागीदारी को विपक्षी एकता का हिस्सा बताते हुए सराहा।
क्या चुनाव आयोग ने SIR अनियमितताओं पर कोई जवाब दिया है?
स्रोत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। थरूर ने माँग की है कि सरकार और चुनाव आयोग जवाबदेही के लिए तैयार हों तभी 'व्यवस्था साफ हो सकती है।'
राष्ट्र प्रेस
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