थरूर का BJP पर पलटवार: 'आपातकाल हटाने के लिए RSS-वामपंथी भी एकजुट हुए थे'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस दावे को सिरे से खारिज किया कि SIR (मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन) विरोधी प्रदर्शनों के पीछे 'सत्ता परिवर्तन' का असली एजेंडा है। NDTV वर्ल्ड समिट में एक संवाद सत्र के दौरान थरूर ने 1977 के आपातकाल-विरोधी गठबंधन का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्ष की एकता ऐतिहासिक रूप से लोकतंत्र की रक्षा का माध्यम रही है, सत्ता हथियाने की साजिश नहीं।
थरूर ने क्या कहा
थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी ही भाषा में जवाब देते हुए कहा: 'मोदी आपातकाल और उसके खात्मे की बात करते रहते हैं। यह खात्मा कैसे हुआ? विपक्ष के ज़रिए — जिसमें RSS और BJP समाजवादियों और वामपंथियों के साथ एकजुट हो गए थे। वे सभी आपातकाल घोषित करने वाली सरकार को हराने के लिए एकसाथ खड़े हुए थे। यह मात्र पचास वर्ष पहले का भारतीय राजनीतिक इतिहास है।'
थरूर का संकेत स्पष्ट था — वह इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार को 1977 में एकजुट जनता पार्टी द्वारा मिली चुनावी शिकस्त की याद दिला रहे थे। उनके अनुसार, उस ऐतिहासिक विपक्षी एकता को भी 'सत्ता परिवर्तन की साजिश' नहीं कहा गया था।
हिंसक प्रदर्शनों को नकारा
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में फ्रांस जैसी हिंसक स्थिति की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा: 'हमारे संविधान और कानूनों में यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक भारतीय नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है; हिंसा नहीं।'
थरूर ने जोड़ा: 'फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, उसे भारत की राजनीति में कोई भी बर्दाश्त नहीं करेगा — मैं भी नहीं, और मुझे नहीं लगता कि मेरी पार्टी किसी भी तरह से हिंसा का स्वागत करेगी।'
SIR और चुनाव आयोग पर सवाल
थरूर ने SIR प्रक्रिया में 'गंभीर अनियमितताओं' का हवाला देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इन अनियमितताओं के लिए जवाबदेह होने को तैयार हों, तो 'व्यवस्था फिर से साफ हो सकती है।' उन्होंने कहा: 'चुनावी नियमों को बहाल किया जाएगा; किसी भी भारतीय नागरिक को अपना वोट डालने के संवैधानिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा।'
गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी कहा था कि यह आंदोलन 'सत्ता परिवर्तन की लड़ाई' में बदल गया है। BJP इसी बयान को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
विपक्षी एकता पर रुख
केरल में माकपा (CPI-M) और कांग्रेस के बीच प्रतिद्वंद्विता का सवाल उठने पर थरूर ने AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनका आंदोलन में योगदान सराहनीय है। थरूर ने कहा: 'नेहा बोरा ने विरोध में ऊर्जा, रंग और जोश भर दिया है। यह कांग्रेस के एक उदारवादी पार्टी होने और स्वीकार्यता के बारे में है — यही विपक्षी एकता है।'
यह ऐसे समय में आया है जब INDIA गठबंधन के घटक दल SIR मुद्दे पर एकजुट दिखने की कोशिश में हैं, जबकि राज्यों में उनकी प्रतिद्वंद्विता बनी हुई है। थरूर का यह बयान संकेत देता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसदीय रास्ते से आगे ले जाने की योजना बना रही है।