कांग्रेस 'फूट डालो राज करो' की नीति पर चलती है: शहजाद पूनावाला का शशि थरूर विवाद पर बड़ा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने 21 जून 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह पार्टी अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति की वास्तविक उत्तराधिकारी है। उनका यह बयान कांग्रेस सांसद शशि थरूर के उस हालिया वक्तव्य के संदर्भ में आया, जिसमें थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जी-7 शिखर सम्मेलन में किए गए प्रयासों की सराहना की थी।
पूनावाला का कांग्रेस पर आरोप
पूनावाला ने दावा किया कि कांग्रेस का गठन ब्रिटिश शासनकाल में हुआ था और इसके शुरुआती नेतृत्व में ब्रिटिश प्रशासन से जुड़े लोग शामिल थे, इसलिए यह पार्टी ब्रिटिश विचारधारा को आगे बढ़ाती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में जो नेता सच बोलता है, उसे निशाना बनाया जाता है — और शशि थरूर इसी का ताज़ा उदाहरण हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के भीतर ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर थरूर के स्वतंत्र रुख को लेकर पार्टी में असहजता देखी जा रही है।
थरूर के बयान का संदर्भ
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाया। थरूर ने प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता, दूरदर्शी सोच और प्रभावशाली वक्तृत्व कला की भी सराहना की।
पूनावाला ने कहा कि थरूर के इस बयान ने कांग्रेस के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें आरोप लगाया जा रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश यात्रा के दौरान भारतीय नाविकों का मुद्दा नहीं उठाया।
थरूर को पार्टी में दरकिनार करने का आरोप
पूनावाला ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी जब थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी राय रखी थी, तब कांग्रेस के कुछ नेताओं और राहुल गांधी के समर्थकों ने उन्हें निशाना बनाया था। उन्होंने यह भी कहा कि थरूर को केरल की राजनीति में भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और उनके खिलाफ लगातार बयानबाजी होती रही है।
गौरतलब है कि थरूर कांग्रेस के वरिष्ठ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले नेताओं में से एक हैं, फिर भी पार्टी के भीतर उनकी स्थिति विवादास्पद रही है।
पूनावाला की अपील और आगे की राह
पूनावाला ने उम्मीद जताई कि कांग्रेस नेतृत्व थरूर के खिलाफ किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करेगा और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तथ्य बोलने की कीमत किसी नेता को नहीं चुकानी चाहिए।
आलोचकों का कहना है कि यह विवाद कांग्रेस के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और असहमति की गुंजाइश को लेकर पुराने सवालों को फिर से सामने लाता है।