एशियन गेम्स 2026: अभय सिंह, वीर चोटरानी और तन्वी खन्ना स्क्वैश के 'राउंड ऑफ 16' में
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय स्क्वैश खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स 2026 में दमदार आगाज़ किया। नागोया में 23 सितंबर 2026 को खेले गए शुरुआती मुकाबलों में अभय सिंह, वीर चोटरानी और तन्वी खन्ना ने अपने-अपने प्रतिद्वंद्वियों को सीधे गेम में हराकर 'राउंड ऑफ 16' में प्रवेश किया। तीनों खिलाड़ियों की यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एकल स्पर्धा के विजेता 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करेंगे, जहाँ स्क्वैश पहली बार ओलंपिक में शामिल होने जा रहा है।
अभय सिंह का बेदाग प्रदर्शन
टूर्नामेंट के दूसरे सीड खिलाड़ी अभय सिंह का प्रदर्शन तीनों में सबसे प्रभावशाली रहा। उन्होंने थाईलैंड के अरकाराडेट अरकाराहिरुन्या को 11-1, 11-2, 11-2 से रौंदा और पूरे मैच में केवल तीन प्वाइंट गंवाए। तीन गेम, तीन जीत और महज तीन अंक की हानि — यह आंकड़ा खुद ब खुद अभय की वर्चस्वपूर्ण उपस्थिति बयान करता है।
चोटरानी और खन्ना ने भी बनाई अपनी जगह
वीर चोटरानी को 'राउंड ऑफ 32' में श्रीलंका के शामिल वकील के खिलाफ शुरुआती गेम में कड़ी टक्कर मिली, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने संयम बनाए रखा और 11-8, 11-3, 11-3 से जीत दर्ज करते हुए बिना कोई गेम गंवाए अगले दौर में जगह पक्की की।
विमेंस सिंगल्स में तन्वी खन्ना ने साउथ कोरिया की दामी किम को 11-5, 11-7, 11-5 से हराकर भारतीय अभियान को और मज़बूती दी। खन्ना का संयमित लेकिन प्रभावी खेल इस युवा खिलाड़ी की परिपक्वता को दर्शाता है।
अनाहत सिंह पर रहेंगी सबकी निगाहें
तीनों खिलाड़ियों की जीत के बाद अब सभी की निगाहें भारत की शीर्ष महिला खिलाड़ी अनाहत सिंह पर टिकी हैं, जिनका अभियान गुरुवार से शुरू होगा। विश्व रैंकिंग में 17वें स्थान पर काबिज़ अनाहत अपने पहले मैच में सिंगापुर की औ योंग वाई लिन का सामना करेंगी। गौरतलब है कि अनाहत भारत में स्क्वैश की सबसे चर्चित युवा प्रतिभाओं में से एक हैं और उनसे मेडल की उम्मीदें सबसे अधिक हैं।
ओलंपिक क्वालीफिकेशन का ऐतिहासिक दाँव
आइची-नागोया गेम्स में एकल स्पर्धाओं का महत्व असाधारण है — यहाँ पुरुष और महिला एकल के चैंपियन सीधे 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट पाएंगे। यह ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि स्क्वैश ओलंपिक में पहली बार खेला जाएगा, और भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह उस सपने को साकार करने का सबसे बड़ा अवसर है। नागोया में भारतीय स्क्वैश दल की यह शुरुआत उम्मीदों को और प्रबल बनाती है, और आने वाले दौर और भी रोमांचक होने वाले हैं।