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एसआईआर पर कांग्रेस का दोहरा रवैया बेनकाब: भाजपा नेता रोहन गुप्ता का शशि थरूर के बयान पर पलटवार

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एसआईआर पर कांग्रेस का दोहरा रवैया बेनकाब: भाजपा नेता रोहन गुप्ता का शशि थरूर के बयान पर पलटवार

सारांश

शशि थरूर ने माना कि एसआईआर से फायदा हुआ — और भाजपा ने इसे कांग्रेस की अपनी ही नीति के खिलाफ हथियार बना लिया। बिहार में हार पर एसआईआर को दोष, केरल में जीत की उम्मीद पर चुप्पी — रोहन गुप्ता ने इसे 'चुनावी सुविधावाद' करार दिया।

मुख्य बातें

भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने 19 मई 2026 को अहमदाबाद में शशि थरूर के एसआईआर बयान पर कांग्रेस के दोहरे रवैये की आलोचना की।
गुप्ता के अनुसार, बिहार में हार पर एसआईआर को दोष देना और केरल में अभियान न चलाना कांग्रेस का विरोधाभासी रुख दर्शाता है।
भाजपा नेता ने कांग्रेस को 'वामपंथी एजेंडे' से चलने वाली पार्टी बताया और महात्मा गांधी के कथित विचार का हवाला दिया।
पश्चिम बंगाल में पुजारियों-मौलवियों का वेतन रोके जाने को सुवेंदु अधिकारी की सरकार का 'विशेषाधिकार विरोधी मिशन' बताया।
सड़क पर नमाज़ विवाद को धार्मिक नहीं, अनुशासन का मामला बताया; UAE , सऊदी अरब , ईरान का उदाहरण दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता रोहन गुप्ता ने 19 मई 2026 को अहमदाबाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें थरूर ने स्वीकार किया था कि उन्हें विशेष पहचान रजिस्टर (एसआईआर) से फायदा हुआ। गुप्ता ने कहा कि इस स्वीकारोक्ति से कांग्रेस का दोहरा मापदंड सार्वजनिक हो गया है।

एसआईआर पर कांग्रेस की विरोधाभासी राजनीति

रोहन गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का एसआईआर-विरोध या 'वोट चोरी' का राष्ट्रीय अभियान पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि बिहार में चुनाव हारने के बाद पार्टी ने एसआईआर पर दोष मढ़ा, जबकि केरल में जीत की उम्मीद होने पर वहाँ कोई अभियान नहीं चलाया गया। उनके शब्दों में, 'केरल का एसआईआर अच्छा है, बिहार का खराब है — यह दोहरा मापदंड नहीं चल सकता।'

गुप्ता ने कहा कि एसआईआर एक चुनावी प्रक्रिया है जिसके ज़रिए मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का विरोध करके दूसरों पर दोष मढ़ने का प्रयास किया जा रहा है, जो जनता के सामने स्पष्ट है।

कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर सवाल

भाजपा नेता ने कहा कि जो पार्टी आज भी स्वतंत्रता संग्राम के नाम पर वोट माँगती है, वह अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है। उन्होंने महात्मा गांधी के उस कथित विचार का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि आज़ादी के बाद कांग्रेस को भंग कर देना चाहिए। गुप्ता के अनुसार, 'यह अब वैसी कांग्रेस नहीं रही — यह एक वामपंथी एजेंडे से चलने वाली पार्टी है, जहाँ राष्ट्रवाद की कोई जगह नहीं और केवल तुष्टीकरण की राजनीति चलती है।'

पश्चिम बंगाल में पुजारी-मौलवी वेतन विवाद

पश्चिम बंगाल में पुजारियों और मौलवियों का वेतन रोके जाने के मामले पर गुप्ता ने कहा कि नई सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है। उन्होंने कहा, 'जनता ने इतना बड़ा जनादेश दिया है, और सरकार 24×7 मोड में काम कर रही है। सुवेंदु अधिकारी और सभी मंत्री एक्शन मोड में हैं।' उनके अनुसार, वादे समय पर पूरे करना सरकार का मिशन है और विशेषाधिकार को रोकना उसी मिशन का हिस्सा है।

सड़क पर नमाज़ विवाद: अनुशासन का मसला, धर्म का नहीं

सड़क पर नमाज़ पढ़ने के विवाद पर गुप्ता ने कहा कि यह किसी धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि तुष्टीकरण के विरुद्ध लड़ाई है। उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ईरान जैसे इस्लामिक देशों में भी सड़कों पर नमाज़ पर रोक है, इसलिए इसे धार्मिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अरशद मदनी जैसे नेताओं पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया और कहा कि मुस्लिम समुदाय भी इस राजनीति को समझता है।

आगे की राजनीतिक दिशा

गुप्ता के बयान ऐसे समय में आए हैं जब एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच तनाव बढ़ रहा है। गौरतलब है कि कांग्रेस के भीतर से ही थरूर जैसे नेताओं के बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग संकेत दे रहे हैं, जो आने वाले चुनावी मौसम में पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनका खंडन महज़ 'दोहरे मापदंड' के तर्क से नहीं होता। बंगाल में पुजारी-मौलवी वेतन विवाद को 'विशेषाधिकार बनाम अधिकार' के रूप में परिभाषित करना नई सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है, लेकिन धार्मिक समानता की कसौटी पर इसकी परीक्षा अभी बाकी है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशि थरूर ने एसआईआर पर क्या बयान दिया था?
शशि थरूर ने कहा था कि उन्हें एसआईआर (विशेष पहचान रजिस्टर) प्रक्रिया से फायदा हुआ। यह बयान कांग्रेस की आधिकारिक एसआईआर-विरोधी लाइन से अलग माना जा रहा है, जिसे भाजपा ने पार्टी के भीतर के विरोधाभास के रूप में उठाया।
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप क्यों लगाया?
रोहन गुप्ता के अनुसार, कांग्रेस ने बिहार में चुनाव हारने के बाद एसआईआर को दोषी ठहराया, जबकि केरल में जीत की उम्मीद होने पर वहाँ एसआईआर-विरोधी अभियान नहीं चलाया। उनका तर्क है कि जहाँ कांग्रेस जीतती है वहाँ का एसआईआर 'ठीक' और जहाँ हारती है वहाँ का 'खराब' — यह राजनीतिक सुविधावाद है।
पश्चिम बंगाल में पुजारियों और मौलवियों का वेतन रोके जाने पर भाजपा का क्या रुख है?
भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने इसे 'विशेषाधिकार रोकने के मिशन' का हिस्सा बताया। उनके अनुसार सरकार सभी को अधिकार देगी, लेकिन किसी को विशेषाधिकार नहीं — यही नई सरकार की प्राथमिकता है।
सड़क पर नमाज़ के विवाद पर भाजपा का क्या कहना है?
रोहन गुप्ता ने कहा कि यह धर्म के विरुद्ध नहीं, बल्कि अनुशासन और व्यवस्था का मामला है। उन्होंने तर्क दिया कि UAE, सऊदी अरब और ईरान जैसे इस्लामिक देशों में भी सड़क पर नमाज़ पर रोक है, इसलिए इसे सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं।
एसआईआर क्या है और इसका चुनावों से क्या संबंध है?
एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) एक चुनावी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को अद्यतन किया जाता है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएँ होती हैं, जबकि भाजपा इसे पारदर्शी और आवश्यक प्रक्रिया बताती है।
राष्ट्र प्रेस
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