क्या एसआईआर का विरोध करने वालों को जनता सबक सिखाएगी?

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क्या एसआईआर का विरोध करने वालों को जनता सबक सिखाएगी?

सारांश

नई दिल्ली में एसआईआर के मुद्दे पर भाजपा नेताओं का कड़ा रुख। क्या विपक्षी दल अपनी हार का सामना कर पाएंगे? जानें कि कैसे भाजपा के नेता जनता की भूमिका पर जोर दे रहे हैं।

मुख्य बातें

मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।
भाजपा का स्पष्ट संदेश है कि विरोध सफल नहीं होगा।
विपक्ष को अपनी हार का सामना करना होगा।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीति का दौर जारी है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में एसआईआर का विरोध हो रहा है। इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने शनिवार को स्पष्ट जवाब दिया और कहा कि जो इसका विरोध करेंगे, उन्हें जनता सबक सिखाएगी

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में कहा, "एसआईआर निश्चित रूप से होगा। यह चुनाव आयोग की प्रक्रिया है। यदि कोई वोट अवैध पाया जाता है, तो उसे रद्द कर दिया जाएगा और यदि कोई वैध वोट गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसे पुनः जोड़ा जाएगा।"

मनोज तिवारी ने आगे कहा कि जो लोग इसके खिलाफ हैं, उन्हें जनता से सबक मिलेगा।

बिहार में हार के बाद कांग्रेस की समीक्षा बैठक पर मनोज तिवारी ने कहा, "उन्हें अपनी हार का मूल्यांकन करने दें। हम अगले पांच वर्षों में बिहार को समृद्ध बनाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।"

वहीं, टीएमसी पर निशाना साधते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा, "टीएमसी चुनाव आयोग का मजाक उड़ाना चाहती है। ये लोग चुनाव आयोग में जाकर सिर्फ बयानों का दौर कर रहे हैं। एसआईआर बिहार में पूरी तरह से सही रहा, लेकिन जब बंगाल में ऐसा हुआ, तो उन्हें डर है कि उनके वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। वे सिर्फ अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।"

बिहार में भाजपा की सहयोगी जदयू के नेताओं ने भी एसआईआर मुद्दे पर विपक्ष को जवाब दिया है। जदयू विधायक नागेंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि वोटर लिस्ट में समय-समय पर बदलाव होना चाहिए और यह पहले भी होता रहा है।

बिहार में हुए एसआईआर के बारे में बताते हुए नागेंद्र चंद्रवंशी ने कहा, "बिहार में कोई समस्या नहीं हुई। मृतक और जो लोग अब यहां नहीं रहते, उनके नाम हटाने का काम हुआ। यदि कोई यहां का निवासी है, तो उसे रेजिडेंस सर्टिफिकेट या दूसरा वैध दस्तावेज जमा करना चाहिए। वोटर लिस्ट में बदलाव नियमित होता रहा है और जो लोग हंगामा कर रहे हैं, वे بے वजह ऐसा कर रहे हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि एसआईआर की प्रक्रिया लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। विपक्ष की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा जनता का होता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा का इस मुद्दे पर क्या कहना है?
भाजपा नेता स्पष्ट करते हैं कि जो लोग एसआईआर का विरोध करेंगे, उन्हें जनता का सामना करना पड़ेगा।
टीएमसी का क्या कहना है?
टीएमसी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर उनके वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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