11 अक्टूबर 2026
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सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर वीएचपी का बयान: शांतिपूर्ण प्रदर्शन जायज़, अराजकता नहीं

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सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर वीएचपी का बयान: शांतिपूर्ण प्रदर्शन जायज़, अराजकता नहीं

सारांश

सीजेपी के 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के बाद सियासत तेज़ हो गई — वीएचपी ने अराजकता को लोकतंत्र के लिए हानिकारक बताया, सदर बाज़ार व्यापारियों ने दिवाली सीजन में करोड़ों के नुकसान का दावा किया, और BJP सांसदों ने कांग्रेस पर तीखे सवाल दागे।

मुख्य बातें

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा — शांतिपूर्ण विरोध संवैधानिक है, लेकिन भूख हड़ताल के नाम पर गड़बड़ी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, बाहर से आने वाली ट्रेनें रद्द हुईं और कांग्रेस कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए।
फेडरेशन ऑफ सदर बाज़ार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने दिवाली सीजन में बाज़ार बंद होने से करोड़ों रुपये के नुकसान का दावा किया।
BJP सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस पर दो दर्जन से अधिक चुनी सरकारें गिराने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
BJP नेता माधवी लता ने कांग्रेस सांसद डॉ.
अंगोमचा बिमोल पर 11 लड़कियों के साथ अत्याचार के कथित आरोपों पर सीजेपी की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत का संविधान शांतिपूर्ण विरोध की इजाज़त देता है, लेकिन भूख हड़ताल और विरोध के नाम पर गड़बड़ी फैलाना लोकतंत्र के हित में नहीं है। यह बयान कांग्रेस जनता पार्टी (सीजेपी) के 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आया, जिसके चलते दिल्ली के सदर बाज़ार सहित कई इलाकों में व्यापक असर पड़ा।

वीएचपी का रुख

श्रीराज नायर ने कहा, 'भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हमारा संविधान लोकतांत्रिक तरीकों से शांतिपूर्ण विरोध और प्रदर्शन की इजाज़त देता है, लेकिन जिस तरह से भूख हड़ताल और विरोध के नाम पर गड़बड़ी फैलाई जा रही है, वह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। जब पार्टियाँ चुनाव जीतती हैं, तो चुनाव आयोग को निष्पक्ष माना जाता है।' यह ऐसे समय में आया है जब सीजेपी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आयोजन किया था।

सदर बाज़ार पर आर्थिक असर

फेडरेशन ऑफ सदर बाज़ार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव ने कहा कि 10 अक्टूबर को दिल्ली समेत पूरे देश में दहशत का माहौल था। उनके अनुसार, एहतियात के तौर पर केंद्र सरकार ने 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए और दिल्ली के बाहर से आने वाली ट्रेनें भी रद्द की गईं। दिवाली के त्योहारी सीजन में बाज़ार बंद रहने से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

यादव ने आम जनता पर पड़ने वाले असर पर ज़ोर देते हुए कहा, 'बिजनेस की बात मत करो, एक गरीब आदमी के किचन की बात करो। जिन्हें हॉस्पिटल में भर्ती होना है, कहीं सामान पहुँचाना है — वे कैसे मैनेज करेंगे? ऐसे माहौल से सरकार और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों पर लोगों का भरोसा कम होता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध करना मौलिक अधिकार है, लेकिन उसका तरीका इतना व्यवस्थित और लोकतांत्रिक होना चाहिए कि आम लोगों को कोई दिक्कत न हो।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने अपने कार्यकाल में दो दर्जन से अधिक चुनी हुई सरकारें गिराईं और भ्रष्टाचार व वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा दिया, वे लोकतंत्र की बात कर रहे हैं? उन्होंने इमरजेंसी और अन्य ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश जानता है कि लोकतंत्र को कुचलने में किन लोगों का हाथ रहा है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'मोगैम्बो' कहे जाने पर तरुण चुघ ने कहा कि मोदी 140 करोड़ भारतीयों के हीरो हैं और उनके नेतृत्व में भारत लगातार तरक्की कर रहा है।

BJP नेता माधवी लता ने कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल — जो मणिपुर से निर्वाचित हैं और जेएनयू, दिल्ली में प्रोफेसर भी हैं — पर लगे आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि कथित तौर पर उन पर 11 लड़कियों पर अत्याचार का आरोप है। माधवी लता ने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के खिलाफ तो निकल पड़े, लेकिन इस मामले में क्यों चुप हैं।

गौरतलब पहलू

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और विपक्षी विरोध के तरीकों को लेकर व्यापक बहस छिड़ी है। 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया था। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक तनाव और गहरा हो सकता है, विशेषकर दिवाली के बाद जब विपक्षी दल अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

भाजपा और व्यापारी संगठन सभी एक ही स्वर में बोल रहे हैं, जो बताता है कि सत्तापक्ष ने इस घटना को राजनीतिक अवसर की तरह देखा है। लेकिन 57 मेट्रो स्टेशनों का बंद होना और ट्रेनों का रद्द होना यह भी दर्शाता है कि प्रशासन ने जिस स्तर की सुरक्षा तैयारी की, वह खुद इस प्रदर्शन के बड़े पैमाने की गवाह है। आलोचकों का कहना है कि विपक्ष की आवाज़ को अराजकता करार देना और सत्तापक्ष की जवाबदेही से ध्यान हटाना एक जाना-पहचाना पैटर्न है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी का 10 अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन किस बात को लेकर था?
सीजेपी ने 10 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ दिल्ली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रशासन ने 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए और बाहर से आने वाली ट्रेनें भी रद्द की गईं।
वीएचपी ने सीजेपी के विरोध पर क्या कहा?
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने कहा कि संविधान शांतिपूर्ण विरोध की इजाज़त देता है, लेकिन भूख हड़ताल और प्रदर्शन के नाम पर गड़बड़ी फैलाना लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। उन्होंने यह भी कहा कि जब पार्टियाँ चुनाव जीतती हैं तो चुनाव आयोग को निष्पक्ष माना जाता है।
सदर बाज़ार के व्यापारियों को इस प्रदर्शन से क्या नुकसान हुआ?
फेडरेशन ऑफ सदर बाज़ार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार यादव के अनुसार, दिवाली के त्योहारी सीजन में बाज़ार बंद रहने से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ और आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
भाजपा सांसद तरुण चुघ ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
तरुण चुघ ने कांग्रेस पर अपने कार्यकाल में दो दर्जन से अधिक चुनी हुई सरकारें गिराने, भ्रष्टाचार और वंशवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने इमरजेंसी का भी उल्लेख किया और कहा कि देश जानता है कि लोकतंत्र को कुचलने में किन लोगों का हाथ रहा है।
माधवी लता ने कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल के बारे में क्या कहा?
BJP नेता माधवी लता ने कहा कि मणिपुर से कांग्रेस सांसद और जेएनयू प्रोफेसर डॉ. अंगोमचा बिमोल पर कथित तौर पर 11 लड़कियों के साथ अत्याचार का आरोप है। उन्होंने सवाल उठाया कि सीजेपी इस मामले में चुप क्यों है और चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में क्यों लगी है।
राष्ट्र प्रेस
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