10 अक्टूबर 2026
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सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर बिहार के नेताओं का पलटवार, BJP बोली- 'अराजकता फैलाने की साज़िश'

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सीजेपी विरोध प्रदर्शन पर बिहार के नेताओं का पलटवार, BJP बोली- 'अराजकता फैलाने की साज़िश'

सारांश

दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर बिहार के BJP और JDU नेताओं ने तीखा पलटवार किया। नेताओं ने इसे 'अराजकता फैलाने की साज़िश' बताया, जबकि सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी और ट्रेन-मेट्रो बंदी ने विवाद को और गरमा दिया।

मुख्य बातें

बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने सीजेपी के दिल्ली प्रदर्शन को चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।
BJP सांसद राजीव प्रताप रूडी ने दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को उचित ठहराया और बिहार में आगजनी की पुरानी घटनाओं का हवाला दिया।
मंत्री राम कृपाल यादव ने आरोप लगाया कि कुछ पार्टियाँ पर्दे में रहकर प्रदर्शनकारियों को फंडिंग कर रही हैं।
मंत्री मिथलेश तिवारी ने ट्रेन रद्द और मेट्रो बंदी को 'आंतरिक सुरक्षा' की आवश्यकता बताया और यात्रियों से क्षमा माँगी।
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शन प्रबंधन पर टिप्पणी की कि 'मक्खियाँ मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करते।' JDU नेता श्याम रजक ने प्रदर्शन से कांग्रेस की दूरी को पार्टी का आंतरिक मामला बताया।

बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने एकस्वर में इस प्रदर्शन को देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश करार दिया। नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों की परोक्ष मदद से यह आंदोलन चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

BJP की प्रतिक्रिया: चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश

बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'कांग्रेस और विपक्षी पार्टियां इस आंदोलन के ज़रिए चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही हैं। देश यह सब देख रहा है।' उन्होंने कहा कि शुरुआत में छात्रों को लगा कि यह संगठन उनके हितों से जुड़े मुद्दे उठा रहा है, लेकिन अब इनके असली इरादे सामने आ गए हैं। सरावगी ने यह भी कहा कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है।

सांसद रूडी और मंत्री यादव का रुख

BJP सांसद राजीव प्रताप रूडी ने दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था को उचित ठहराते हुए कहा, 'बिहार में भी आगजनी की घटनाएँ हम देख चुके हैं। यदि कोई विधि-व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करे, तो सरकार का दायित्व है कि वह व्यवस्था बनाए रखे।' बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग और पार्टियों के एजेंट पर्दे में रहकर अराजकता फैलाने के लिए इस आंदोलन को तरजीह दे रहे हैं और संभवतः फंडिंग भी कर रहे हैं।

ट्रेन रद्द और मेट्रो बंद पर विवाद

दिल्ली में प्रदर्शन के मद्देनज़र ट्रेनें रद्द और मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने पर मंत्री मिथलेश तिवारी ने कहा कि सरकार अलर्ट मोड में है और देश के बच्चों को किसी अनहोनी से बचाना उसकी ज़िम्मेदारी है। यात्रियों की असुविधा पर उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा, 'जब देश पर आंतरिक सुरक्षा की समस्या आती है, तो जनता सरकार के साथ खड़ी होती है।' गौरतलब है कि दिल्ली में इस प्रदर्शन को देखते हुए कई मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे और कई ट्रेन सेवाएँ प्रभावित हुई थीं।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और सरकार का जवाब

सर्वोच्च न्यायालय ने इस विरोध प्रदर्शन के प्रबंधन पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'मक्खियाँ मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करते।' तिवारी ने न्यायालय की इस टिप्पणी पर कहा कि मुख्य न्यायाधीश का हर शब्द सरकार के लिए महत्वपूर्ण है और सरकार बड़ी संवेदनशीलता के साथ हर परिस्थिति को संभाल रही है।

जदयू की प्रतिक्रिया और गठबंधन की एकजुटता

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता श्याम रजक ने सीजेपी के प्रदर्शन से कांग्रेस की दूरी पर कहा कि हर पार्टी अपने आंतरिक निर्णय खुद लेती है और यह जरूरी नहीं कि एक संगठन के आंदोलन में दूसरे संगठन अनिवार्यतः शामिल हों। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। इस प्रकरण से यह स्पष्ट है कि दिल्ली में प्रदर्शन का राजनीतिक असर आने वाले दिनों में भी महसूस किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि सहज आक्रोश। सीजेपी जैसे नागरिक संगठनों के प्रदर्शन को 'अराजकता' और 'विदेशी फंडिंग' से जोड़ना एक परिचित राजनीतिक शब्दावली है, जो असुविधाजनक जन-आंदोलनों को अवैध ठहराने के लिए इस्तेमाल होती है। सर्वोच्च न्यायालय की 'हथौड़े से मक्खी मारने' वाली टिप्पणी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसे सरकार की 'संवेदनशीलता' के दावे से ढकने की कोशिश की जा रही है। असली सवाल यह है कि लोकतांत्रिक प्रदर्शन के लिए ट्रेनें रद्द करना और मेट्रो बंद करना अनुपातिक प्रतिक्रिया है या नहीं — यह बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होगी।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में सीजेपी का विरोध प्रदर्शन किस बारे में था?
सिटीज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया, जिसके मद्देनज़र कई मेट्रो स्टेशन बंद और ट्रेन सेवाएँ रद्द की गईं। प्रदर्शन में वामपंथी दलों की भागीदारी रही, जबकि कांग्रेस ने दूरी बनाए रखी।
बिहार BJP ने सीजेपी प्रदर्शन पर क्या कहा?
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश बताया। मंत्री राम कृपाल यादव ने आरोप लगाया कि कुछ पार्टियाँ पर्दे में रहकर इस आंदोलन को फंडिंग कर रही हैं और देश में अस्थिरता पैदा करना चाहती हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने सीजेपी प्रदर्शन पर क्या टिप्पणी की?
सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा प्रबंधन पर कहा कि 'मक्खियाँ मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करते।' मंत्री मिथलेश तिवारी ने इस पर कहा कि मुख्य न्यायाधीश का हर शब्द सरकार के लिए महत्वपूर्ण है और सरकार बड़ी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है।
दिल्ली में ट्रेनें रद्द और मेट्रो स्टेशन बंद क्यों किए गए?
सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के मद्देनज़र दिल्ली में कई ट्रेन सेवाएँ रद्द और मेट्रो स्टेशन बंद किए गए। मंत्री मिथलेश तिवारी ने इसे 'आंतरिक सुरक्षा की समस्या' बताते हुए प्रभावित यात्रियों से खेद व्यक्त किया।
सीजेपी प्रदर्शन से कांग्रेस ने दूरी क्यों बनाई?
JDU नेता श्याम रजक ने कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक निर्णय है और यह जरूरी नहीं कि एक संगठन के आंदोलन में दूसरे संगठन शामिल हों। विपक्षी एकता में दरार को लेकर यह सवाल राष्ट्रीय स्तर पर पहले से उठ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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