28 अक्टूबर 2026
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बृजभूषण शरण सिंह को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जवाब देने का आखिरी मौका दिया, यौन उत्पीड़न अपील पर फैसला करीब

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बृजभूषण शरण सिंह को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जवाब देने का आखिरी मौका दिया, यौन उत्पीड़न अपील पर फैसला करीब

सारांश

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने को चुनौती देने वाली अपील पर एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया है — यह संकेत है कि अब इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई निर्णायक मोड़ पर आ गई है।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को बृजभूषण शरण सिंह को अपील पर जवाब देने के लिए एक सप्ताह की अंतिम मोहलत दी।
चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त 2026 के ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को चुनौती दी है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सिंह और विनोद तोमर को बरी किया था, यह कहते हुए कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा।
अपीलकर्ताओं का तर्क है कि साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ और फैसला कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
यह मामला जनवरी 2023 में जंतर-मंतर के उस ऐतिहासिक धरने से उपजा था, जिसमें विनेश फोगट , साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया शामिल थे।

राउज एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे चार महिला पहलवानों द्वारा दायर अपील — जो उनके बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देती है — पर एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब दाखिल करें। कोर्ट ने साफ कहा कि यह आखिरी अवसर है और आगे कोई और मोहलत नहीं दी जाएगी।

मामले का पृष्ठभूमि

यह विवाद जनवरी 2023 में उस समय सुर्खियों में आया जब ओलंपियन विनेश फोगट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया सहित कई पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया। प्रदर्शनकारी पहलवानों ने सिंह पर कथित यौन उत्पीड़न और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए तथा उनके WFI अध्यक्ष पद से तत्काल इस्तीफे की माँग की। इस दबाव के बाद केंद्रीय खेल मंत्रालय ने WFI के कामकाज को निलंबित कर दिया और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा के निर्देश पर एक जाँच समिति भी बनाई गई।

ट्रायल कोर्ट का फैसला और उस पर अपील

3 अगस्त 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर — जिन पर आपराधिक धमकी का आरोप था — दोनों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका।

इस फैसले के बाद चारों महिला पहलवानों ने राउज एवेन्यू कोर्ट में अपील दायर की। अपीलकर्ताओं ने दलील दी है कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया।

अब तक की सुनवाई का क्रम

28 सितंबर 2026 को अदालत ने सिंह और तोमर को नोटिस जारी कर अपील पर जवाब माँगा था। 9 अक्टूबर की सुनवाई में प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया और अगली तारीख 28 अक्टूबर तय की गई। अब बुधवार को अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है।

आरोप और मई 2024 के आरोप-निर्धारण का संदर्भ

गौरतलब है कि मई 2024 में राउज एवेन्यू कोर्ट ने ही सिंह के विरुद्ध कथित यौन उत्पीड़न और पाँच महिला पहलवानों की गरिमा को ठेस पहुँचाने से संबंधित आरोप तय किए थे। सिंह ने लगातार खुद को निर्दोष बताया और ट्रायल का सामना करने का विकल्प चुना।

आगे क्या होगा

यदि सिंह तय समय-सीमा के भीतर जवाब दाखिल नहीं करते, तो अदालत एकपक्षीय सुनवाई का विकल्प अपना सकती है। अपील की अगली सुनवाई जवाब प्राप्त होने के बाद निर्धारित होगी। यह मामला भारतीय कुश्ती और खेल प्रशासन में जवाबदेही की बहस के केंद्र में बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय खेल प्रशासन में जवाबदेही की उस बड़ी परीक्षा का हिस्सा है जो जनवरी 2023 के जंतर-मंतर धरने के बाद से लंबित है। ट्रायल कोर्ट का बरी करने का फैसला जहाँ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, वहीं अपील की सुनवाई यह तय करेगी कि साक्ष्यों के मूल्यांकन में कोई चूक हुई या नहीं। चिंताजनक यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में समय की लंबाई और बार-बार की मोहलतें पहलवानों के लिए न्याय को और दूर करती दिखती हैं। खेल प्रशासन सुधार और एथलीट संरक्षण की नीति की दृष्टि से यह मामला एक महत्वपूर्ण नज़ीर बनने की क्षमता रखता है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजभूषण शरण सिंह को कोर्ट ने आखिरी मौका क्यों दिया?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 28 अक्टूबर 2026 को बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों की अपील पर एक सप्ताह में लिखित जवाब दाखिल करने की अंतिम समय-सीमा दी, क्योंकि 28 सितंबर और 9 अक्टूबर को नोटिस जारी होने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आगे कोई और अवसर नहीं दिया जाएगा।
बृजभूषण शरण सिंह को ट्रायल कोर्ट ने किस आधार पर बरी किया था?
3 अगस्त 2026 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सिंह और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को यह कहते हुए बरी किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। तोमर पर आपराधिक धमकी का आरोप था।
महिला पहलवानों की अपील में क्या दलीलें दी गई हैं?
चारों अपीलकर्ता महिला पहलवानों ने तर्क दिया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों का उचित और सम्यक मूल्यांकन नहीं किया गया। उनकी माँग है कि बरी करने के फैसले को पलटा जाए।
यह मामला कब और कैसे शुरू हुआ था?
यह मामला जनवरी 2023 में शुरू हुआ, जब विनेश फोगट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया सहित कई पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण शरण सिंह पर कथित यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोप लगाए। इसके बाद खेल मंत्रालय ने WFI का कामकाज निलंबित कर दिया और IOA अध्यक्ष पीटी उषा के निर्देश पर जाँच समिति बनाई गई।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
यदि बृजभूषण शरण सिंह एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करते हैं, तो अदालत अगली सुनवाई की तारीख तय करेगी। जवाब न देने पर कोर्ट एकपक्षीय सुनवाई का विकल्प अपना सकती है। यह अपील अंततः तय करेगी कि ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा जाए या उसकी नए सिरे से समीक्षा हो।
राष्ट्र प्रेस
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