9 अक्टूबर 2026
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बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामला: सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को

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बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामला: सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को

सारांश

बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में सेशन कोर्ट की सुनवाई 9 अक्टूबर से टलकर 28 अक्टूबर पर आई। चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त के बरी होने के फैसले को चुनौती दी है। यह मामला भारतीय खेल जगत की जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव बना हुआ है।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू सेशन कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 की सुनवाई स्थगित कर अगली तारीख 28 अक्टूबर 2026 तय की।
चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त को बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने के खिलाफ सेशन कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की है।
अपील में सह-आरोपी विनोद तोमर के बरी होने के आदेश को भी चुनौती दी गई है।
याचिका में आरोप है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सबूतों का गलत और चुनिंदा मूल्यांकन किया और पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया।
मूल आरोप 2016 से 2022 के बीच की घटनाओं से संबंधित हैं; मामला 2023 में सार्वजनिक हुआ था।

दिल्ली की राउज एवेन्यू सेशन कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ महिला पहलवानों की आपराधिक अपील पर 9 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

मुख्य घटनाक्रम

कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को चार महिला पहलवानों की उस याचिका पर जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, जिसमें निचली अदालत के बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है। गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह शुक्रवार की सुनवाई के लिए स्वयं कोर्ट में उपस्थित हुए थे। इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर दोनों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा था।

बरी होने के खिलाफ अपील

राउज एवेन्यू कोर्ट के मजिस्ट्रेट ने 3 अगस्त को बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए चार महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की है। अपील में सह-आरोपी विनोद तोमर के बरी होने के आदेश को भी चुनौती दी गई है।

पहलवानों के आरोप और याचिका के तर्क

महिला पहलवानों की याचिका में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश कानून की कसौटी पर टिकाऊ नहीं है और सबूतों का गलत एवं चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया। अपील में यह भी आरोप लगाया गया कि फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है तथा स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही रूप से लागू नहीं किया गया।

पहलवानों का कहना है कि आदेश में पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया गया है — जो यौन अपराध मामलों में अदालती दृष्टिकोण से जुड़ी एक संवेदनशील चिंता है। बृजभूषण शरण सिंह ने हमेशा अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद 2023 में तब सुर्खियों में आया जब देश की कई नामी महिला पहलवानों ने आरोप लगाया कि बृजभूषण शरण सिंह ने 2016 से 2022 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप, WFI कार्यालय और अन्य स्थानों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया। यह मामला भारत के खेल जगत और न्यायिक इतिहास के सबसे चर्चित विवादों में से एक बन चुका है।

आगे क्या होगा

28 अक्टूबर 2026 को सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को महिला पहलवानों की अपील पर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इस मामले की सुनवाई का परिणाम न केवल संबंधित पक्षों बल्कि भारत में खेल प्रशासन और न्यायिक जवाबदेही की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यौन अपराध मामलों में अदालती दृष्टिकोण पर एक व्यापक बहस को जन्म देता है। गौरतलब है कि इन पहलवानों ने 2023 में सड़कों पर उतरकर जो लड़ाई शुरू की थी, वह अब कानूनी लड़ाई के एक निर्णायक चरण में है — और 28 अक्टूबर की सुनवाई यह तय करेगी कि न्यायिक प्रक्रिया उनके तर्कों को कितना वज़न देती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामले में अगली सुनवाई कब है?
दिल्ली की राउज एवेन्यू सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी। 9 अक्टूबर को निर्धारित सुनवाई स्थगित कर दी गई थी।
महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में अपील क्यों दायर की?
चार महिला पहलवानों ने 3 अगस्त को राउज एवेन्यू मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। उनकी याचिका में कहा गया है कि सबूतों का गलत आकलन हुआ और फैसला रूढ़िवादी सोच पर आधारित था।
बृजभूषण शरण सिंह पर क्या आरोप हैं?
कई महिला पहलवानों ने आरोप लगाया है कि बृजभूषण शरण सिंह ने 2016 से 2022 के बीच राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप और WFI कार्यालय में उनके साथ यौन उत्पीड़न किया। बृजभूषण शरण सिंह ने हमेशा इन आरोपों को गलत बताया है।
इस मामले की शुरुआत कब हुई थी?
यह मामला 2023 में तब सुर्खियों में आया जब देश की नामी महिला पहलवानों ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए और विरोध प्रदर्शन किया। यह भारत के खेल जगत के सबसे चर्चित कानूनी विवादों में से एक बन चुका है।
सेशन कोर्ट में अपील का क्या महत्व है?
सेशन कोर्ट में आपराधिक अपील निचली अदालत के फैसले की कानूनी समीक्षा का अवसर देती है। यदि सेशन कोर्ट अपील स्वीकार करती है, तो बरी किए जाने का फैसला पलट सकता है या मामले की पुनः सुनवाई का आदेश दिया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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