बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न मामला: सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की राउज एवेन्यू सेशन कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ महिला पहलवानों की आपराधिक अपील पर 9 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को चार महिला पहलवानों की उस याचिका पर जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, जिसमें निचली अदालत के बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है। गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह शुक्रवार की सुनवाई के लिए स्वयं कोर्ट में उपस्थित हुए थे। इससे पहले की सुनवाई में अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर दोनों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा था।
बरी होने के खिलाफ अपील
राउज एवेन्यू कोर्ट के मजिस्ट्रेट ने 3 अगस्त को बृजभूषण शरण सिंह को यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए चार महिला पहलवानों ने सेशन कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की है। अपील में सह-आरोपी विनोद तोमर के बरी होने के आदेश को भी चुनौती दी गई है।
पहलवानों के आरोप और याचिका के तर्क
महिला पहलवानों की याचिका में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश कानून की कसौटी पर टिकाऊ नहीं है और सबूतों का गलत एवं चुनिंदा तरीके से आकलन किया गया। अपील में यह भी आरोप लगाया गया कि फैसला अनुमान और अटकलों पर आधारित है तथा स्थापित कानूनी सिद्धांतों को सही रूप से लागू नहीं किया गया।
पहलवानों का कहना है कि आदेश में पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया गया है — जो यौन अपराध मामलों में अदालती दृष्टिकोण से जुड़ी एक संवेदनशील चिंता है। बृजभूषण शरण सिंह ने हमेशा अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 2023 में तब सुर्खियों में आया जब देश की कई नामी महिला पहलवानों ने आरोप लगाया कि बृजभूषण शरण सिंह ने 2016 से 2022 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप, WFI कार्यालय और अन्य स्थानों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया। यह मामला भारत के खेल जगत और न्यायिक इतिहास के सबसे चर्चित विवादों में से एक बन चुका है।
आगे क्या होगा
28 अक्टूबर 2026 को सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को महिला पहलवानों की अपील पर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इस मामले की सुनवाई का परिणाम न केवल संबंधित पक्षों बल्कि भारत में खेल प्रशासन और न्यायिक जवाबदेही की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।