17 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

चिदंबरम का बचाव: 'सरकार बदलना' लोकतंत्र में सामान्य, विपक्ष का असली काम

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
चिदंबरम का बचाव: 'सरकार बदलना' लोकतंत्र में सामान्य, विपक्ष का असली काम

सारांश

'रिजीम चेंज' शब्द पर छिड़ी जंग में चिदंबरम ने BJP के गुस्से को 'दिखावटी' बताया और विपक्ष के इस अधिकार का बचाव किया। निर्वाचन आयोग पर जारी प्रदर्शनों के बीच यह बहस अब शब्दों से आगे बढ़कर लोकतंत्र की परिभाषा की लड़ाई बन गई है।

मुख्य बातें

चिदंबरम ने 17 अक्टूबर को एक्स पर कहा कि लोकतंत्र में 'रिजीम चेंज' सामान्य है।
विपक्षी नेता और प्रदर्शनकारी ECI व मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं।
BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने 'रिजीम चेंज' को हिंसक संघर्ष और विदेशी साज़िश से जोड़ा।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन को नागरिकों का 'लोकतांत्रिक अधिकार' बताया; AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की बांग्लादेश मूवमेंट वाली टिप्पणी पर BJP ने आपत्ति जताई।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने दो-टूक कहा कि कांग्रेस 'इस शासन को बदलेगी।'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने शनिवार, 17 अक्टूबर को 'सरकार बदलना' (रिजीम चेंज) शब्द के इस्तेमाल का पुरज़ोर बचाव किया और इसे लोकतंत्र की एक 'सामान्य' प्रक्रिया करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'चुनावों के ज़रिए सरकार को हटाना' विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है। यह बयान उस वक्त आया जब नई दिल्ली में 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच 'रिजीम चेंज' शब्द राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया था।

चिदंबरम ने एक्स पर क्या कहा

पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'भाजपा 'रिजीम चेंज' शब्द के इस्तेमाल पर दिखावटी गुस्से से क्यों भड़क रही है? लोकतंत्र में 'रिजीम चेंज' नॉर्मल है।' उन्होंने आगे कहा, 'विपक्ष का काम सरकार का विरोध करना, उसे बेनकाब करना और उसे हटाना है — यानी राजनीति में विरोध, संसद में बेनकाब और चुनावों के ज़रिए हटाना।'

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े कांग्रेसी नेता ने 'रिजीम चेंज' की शब्दावली का प्रयोग किया हो, लेकिन इस बार यह बयान एक सक्रिय सड़क-आंदोलन के बीच आया, जिसने इसे राजनीतिक रूप से और अधिक विवादास्पद बना दिया।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

दिल्ली में जारी प्रदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह आंदोलन अब 'सरकार बदलने की लड़ाई' में तब्दील हो गया है और इसे नागरिकों का 'लोकतांत्रिक अधिकार' बताया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के 'जेन जी मूवमेंट' की तारीफ करते हुए दावा किया कि यह भारत के युवाओं के लिए 'प्रेरणा' का स्रोत है। इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी आपत्ति जताई।

भाजपा की प्रतिक्रिया

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कहा था, 'कांग्रेस, इंडी गठबंधन और घटते जनसमर्थन का सामना कर रही वामपंथी पार्टियों को राजनीतिक सफलता की बहुत कम उम्मीद नज़र आ रही है। नतीजतन, 'रिजीम चेंज' जैसे शब्द — जिनका अर्थ हिंसक संघर्ष, साज़िश, या विदेशी शक्तियों की मदद से सरकारें गिराना है — भारतीय राजनीति में तेज़ी से उभर रहे हैं।'

BJP ने इन बयानों को यह साबित करने के लिए उद्धृत किया कि प्रदर्शन की घोषित माँगों से परे एक बड़ी राजनीतिक मंशा है और आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था को 'अस्थिर' करने की बड़ी कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने कहा कि सत्ताधारी BJP सत्ता खोने के डर से 'शासन बदलने' की माँग को 'देश-विरोधी और अराजक' रंग दे रही है। उन्होंने दो-टूक कहा, 'कांग्रेस इस शासन को बदलने के लिए गंभीर है और इसे बदला जाएगा।'

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल ECI और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए हैं।

आगे क्या होगा

'रिजीम चेंज' बनाम 'सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया' की यह शब्दार्थ लड़ाई संसदीय बहस और आगामी चुनावी रणनीति दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। विपक्ष की एकजुटता और निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर उठते सवाल आने वाले हफ्तों में और गहराने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष की रणनीतिक दिशा की लड़ाई है — और BJP ने इस शब्द को सुरक्षा-राष्ट्रवाद के फ्रेम में इस तरह फँसाया है कि विपक्ष की हर बात अब 'देशद्रोही षड्यंत्र' के रंग में रँगी जा सके। चिदंबरम का जवाब संवैधानिक रूप से सही है — चुनावी सत्ता-परिवर्तन लोकतंत्र की बुनियाद है — लेकिन AISA की बांग्लादेश वाली टिप्पणी ने BJP को वह क्लिप थमा दी जिसकी उसे तलाश थी। असली मुद्दा — निर्वाचन आयोग की साख और मतदाता सूची की पारदर्शिता — इस शब्दार्थ युद्ध में दब रहा है, और यही दोनों पक्षों को सूट करता है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी. चिदंबरम ने 'सरकार बदलना' को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने 17 अक्टूबर को एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र में 'रिजीम चेंज' पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार का विरोध करना, उसे बेनकाब करना और चुनावों के ज़रिए उसे हटाना है।
दिल्ली में निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किस बात को लेकर है?
विपक्षी नेता और छात्र कार्यकर्ता ECI और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने इस आंदोलन को नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया है।
BJP ने 'रिजीम चेंज' शब्द पर क्यों आपत्ति जताई?
BJP प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 'रिजीम चेंज' जैसे शब्द हिंसक संघर्ष, साज़िश या विदेशी शक्तियों की मदद से सरकारें गिराने से जुड़े हैं। पार्टी का आरोप है कि इस प्रदर्शन के पीछे भारत की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की बड़ी मंशा है।
AISA की नेहा बोरा की टिप्पणी विवादास्पद क्यों बनी?
AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के 'जेन जी मूवमेंट' की तारीफ करते हुए कहा कि यह भारत के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। BJP ने इस टिप्पणी को विदेशी आंदोलनों की नकल के प्रयास से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने कहा कि BJP सत्ता खोने के डर से 'शासन बदलने' की माँग को 'देश-विरोधी और अराजक' बता रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस शासन को बदलने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 13 घंटे पहले
  3. 20 घंटे पहले
  4. 21 घंटे पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले