चिदंबरम का बचाव: 'सरकार बदलना' लोकतंत्र में सामान्य, विपक्ष का असली काम
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने शनिवार, 17 अक्टूबर को 'सरकार बदलना' (रिजीम चेंज) शब्द के इस्तेमाल का पुरज़ोर बचाव किया और इसे लोकतंत्र की एक 'सामान्य' प्रक्रिया करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'चुनावों के ज़रिए सरकार को हटाना' विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है। यह बयान उस वक्त आया जब नई दिल्ली में 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच 'रिजीम चेंज' शब्द राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया था।
चिदंबरम ने एक्स पर क्या कहा
पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'भाजपा 'रिजीम चेंज' शब्द के इस्तेमाल पर दिखावटी गुस्से से क्यों भड़क रही है? लोकतंत्र में 'रिजीम चेंज' नॉर्मल है।' उन्होंने आगे कहा, 'विपक्ष का काम सरकार का विरोध करना, उसे बेनकाब करना और उसे हटाना है — यानी राजनीति में विरोध, संसद में बेनकाब और चुनावों के ज़रिए हटाना।'
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े कांग्रेसी नेता ने 'रिजीम चेंज' की शब्दावली का प्रयोग किया हो, लेकिन इस बार यह बयान एक सक्रिय सड़क-आंदोलन के बीच आया, जिसने इसे राजनीतिक रूप से और अधिक विवादास्पद बना दिया।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
दिल्ली में जारी प्रदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह आंदोलन अब 'सरकार बदलने की लड़ाई' में तब्दील हो गया है और इसे नागरिकों का 'लोकतांत्रिक अधिकार' बताया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बांग्लादेश के 'जेन जी मूवमेंट' की तारीफ करते हुए दावा किया कि यह भारत के युवाओं के लिए 'प्रेरणा' का स्रोत है। इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखी आपत्ति जताई।
भाजपा की प्रतिक्रिया
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को कहा था, 'कांग्रेस, इंडी गठबंधन और घटते जनसमर्थन का सामना कर रही वामपंथी पार्टियों को राजनीतिक सफलता की बहुत कम उम्मीद नज़र आ रही है। नतीजतन, 'रिजीम चेंज' जैसे शब्द — जिनका अर्थ हिंसक संघर्ष, साज़िश, या विदेशी शक्तियों की मदद से सरकारें गिराना है — भारतीय राजनीति में तेज़ी से उभर रहे हैं।'
BJP ने इन बयानों को यह साबित करने के लिए उद्धृत किया कि प्रदर्शन की घोषित माँगों से परे एक बड़ी राजनीतिक मंशा है और आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था को 'अस्थिर' करने की बड़ी कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने कहा कि सत्ताधारी BJP सत्ता खोने के डर से 'शासन बदलने' की माँग को 'देश-विरोधी और अराजक' रंग दे रही है। उन्होंने दो-टूक कहा, 'कांग्रेस इस शासन को बदलने के लिए गंभीर है और इसे बदला जाएगा।'
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल ECI और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए हैं।
आगे क्या होगा
'रिजीम चेंज' बनाम 'सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया' की यह शब्दार्थ लड़ाई संसदीय बहस और आगामी चुनावी रणनीति दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। विपक्ष की एकजुटता और निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर उठते सवाल आने वाले हफ्तों में और गहराने की संभावना है।