मौलाना साजिद रशीदी का बड़ा बयान: विदेशी फंडिंग से देश तोड़ने वालों को मानता हूं आतंकवादी
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 20 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि जो लोग विदेशी फंडिंग लेकर देश में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं, वे उनकी नज़र में आतंकवादी हैं। उन्होंने सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े अभिजीत दिपके और नेहा बोरा पर आरोप लगाया कि उनकी गतिविधियाँ देशहित में नहीं हैं।
मुख्य बयान और आरोप
मौलाना रशीदी ने कहा, 'मैं तो उन लोगों को आतंकवादी मानता हूं, जो दूसरी जगह से फंडिंग लेकर देश को तोड़ना चाहते हैं और मुल्क के अंदर अफरातफरी जैसा माहौल पैदा करना चाहते हैं।' उन्होंने अभिजीत दिपके और नेहा बोरा का नाम लेकर आरोप लगाया कि उनके कार्य देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न करने की दिशा में हैं। नेहा बोरा के एक बयान का उल्लेख करते हुए रशीदी ने माँग की कि इस मामले में सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।
सत्ता परिवर्तन और विदेशी हस्तक्षेप पर टिप्पणी
मौलाना ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का संदर्भ देते हुए कहा कि केवल सत्ता परिवर्तन से परिस्थितियाँ नहीं बदलतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ देश अन्य देशों में अपने अनुकूल सरकारें स्थापित करने के लिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश करते हैं। ईरान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश के उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि इन देशों में हुए सत्ता परिवर्तन से आम जनता को वास्तव में कितना लाभ मिला।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की विदेशी फंडिंग को लेकर बहस तेज़ है।
संविधान और न्यायपालिका पर रुख
पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के शरजील इमाम को लेकर एक्स पर की गई पोस्ट का संदर्भ देते हुए मौलाना रशीदी ने कहा कि मुसलमानों से जुड़े कुछ मुद्दे ज़रूर हैं, लेकिन संविधान और संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह की टिप्पणियाँ उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों के लिए समान है और न्यायपालिका इसी आधार पर न्याय देती है। रशीदी ने तर्क दिया कि यदि न्यायपालिका को ही भ्रष्ट या फासीवादी कहा जाएगा, तो लंबे समय से जेल में बंद लोगों को न्याय कैसे मिलेगा।
संजय राउत और एजेंसियों के दुरुपयोग पर प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत की एक्स पोस्ट के सवाल पर रशीदी ने कहा कि जाँच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपना इतिहास याद करना चाहिए। उन्होंने 'पिंजरे का तोता' वाले पुराने विवाद का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में भी एजेंसियों का उपयोग होता था। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि एजेंसियाँ किसकी मानती हैं, बल्कि यह है कि नेताओं का देश के प्रति रुझान क्या है।
आगे क्या होगा
मौलाना रशीदी के इन बयानों के बाद CJP की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या संबंधित पक्ष इन आरोपों का जवाब देते हैं और क्या इस मामले में कोई कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई होती है।