जेएनयू विवादित नारों पर साजिद रशीदी की माँग: 'देशविरोधी गतिविधियों पर हो कड़ी कार्रवाई'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 25 अक्टूबर 2026 को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में हाल ही में लगाए गए कथित विवादित नारों की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा कि ऐसी देशविरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकारी एजेंसियों को तत्काल और प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
जेएनयू पर रशीदी के तीखे बयान
रशीदी ने कहा कि जेएनयू हमेशा से विवादों में घिरा रहा है। उनके अनुसार, 'जेएनयू से निकले लोग खुद को नास्तिक या धर्म को न मानने वाला मानते हैं। जो व्यक्ति धार्मिक नहीं होता, वह किसी के प्रति वफादार नहीं होता। उनका जीवन किसी जानवर से बेहतर नहीं है। वे माँ को माँ, बहन को बहन या पत्नी को पत्नी के रूप में सम्मान नहीं देते।' उन्होंने इसे वामपंथी विचारधारा से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे लोग चाहे अमेरिका में हों या भारत में, उनकी सोच देश में अफरातफरी और गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा करने की है।
नेहा बोरा और अभिजीत दिपके पर माँग
मौलाना ने विशेष रूप से ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और अभिजीत दिपके का नाम लेते हुए कहा कि इन्हें पकड़कर कड़ी पूछताछ की जाए। उनका आरोप था कि इन लोगों के आईएसआई या सीआईए से संबंध मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि नेहा बोरा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया, फिर भी वह खुलेआम घूम रही हैं — यह स्थिति सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाती है। यह उल्लेखनीय है कि ये आरोप रशीदी के व्यक्तिगत बयान हैं; इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन के हवाले से दावा
रशीदी ने अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन के एक कथित बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि कुछ लोग पूरी दुनिया को तोड़ने के लिए फंडिंग करते हैं और वही लोग सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) प्रमुख को भी फंड करते हैं। उन्होंने नेहा बोरा के कथित बयान का संदर्भ देते हुए कहा कि बांग्लादेश में हुए प्रदर्शन — जिसमें हिंदुओं पर हमले और मंदिर तोड़े गए — को 'प्रेरणा स्रोत' बताने वाले लोगों को भारत में रहने का अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि ये दावे कथित तौर पर किए गए हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि अपेक्षित है।
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान और कश्मीर से जुड़े नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के विवादित बयान पर रशीदी ने कहा, 'मैं स्पष्ट रूप से कहता हूँ कि फारूक अब्दुल्ला का यह बयान देशद्रोह की श्रेणी में आता है।' उन्होंने पहलगाम और पुलवामा हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने जिहाद के नाम पर हमेशा भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दिया है। रशीदी ने कहा कि लोकसभा-राज्यसभा सदस्य और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके अब्दुल्ला का पाकिस्तान के प्रति हमदर्दी रखना देशद्रोह है।
आगे क्या
रशीदी के इस बयान के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन सकता है। जेएनयू परिसर में नारेबाजी की घटना और उससे जुड़े विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएँ अभी भी जारी हैं। सरकारी एजेंसियाँ और संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।