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क्या जेएनयू में इस तरह की नारेबाजी उचित है?: प्रियंका चतुर्वेदी

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क्या जेएनयू में इस तरह की नारेबाजी उचित है?: प्रियंका चतुर्वेदी

सारांश

प्रियंका चतुर्वेदी ने जेएनयू में उठाए गए विवादास्पद नारों की निंदा की है। उनका कहना है कि ऐसे नारों का उपयोग कहीं भी नहीं होना चाहिए। जानें उन्होंने क्या कहा और इस विषय पर उनका दृष्टिकोण क्या है।

मुख्य बातें

प्रियंका चतुर्वेदी ने विवादास्पद नारों की निंदा की।
ऐसे नारों की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
संयम के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
एसआईआर चुनाव आयोग का आवश्यक उपकरण है।
महिलाओं की चुनावी भागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने जेएनयू में पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ उठाए गए विवादास्पद नारों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नारे किसी भी विश्वविद्यालय में नहीं लगने चाहिए।

राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जेएनयू में छात्रों द्वारा लगाए गए नारों की मैं निंदा करती हूं। ऐसे नारों को कहीं भी नहीं होना चाहिए, चाहे वह जेएनयू के अंदर हो या बाहर, या देश के किसी अन्य हिस्से में। इस प्रकार के नारों की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि नरेंद्र मोदी देश के चुने हुए प्रधानमंत्री हैं। वे चुनावों के माध्यम से आए हैं। आप अपनी असहमति व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन विवादास्पद टिप्पणियां या नारों का उपयोग करना उचित नहीं है। इससे आपके मुद्दे कमजोर होते हैं। हमें विपक्ष में रहते हुए भी अपनी आवाज़ को प्रभावशाली ढंग से उठाना चाहिए। संयम दिखाना जरूरी है।

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एसआईआर के बारे में कहा कि यह चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण उपकरण है और वोटर्स को इसमें सहयोग देना चाहिए। लेकिन, इसके माध्यम से चुनाव आयोग ने इसे एक राजनीतिक एजेंडे में बदल दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि विपक्ष को वोट देने वालों के नाम कैसे हटाए जाएं।

उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का उल्लेख करते हुए कहा कि जब चुनाव सुधार की बात हुई थी, तब उन्होंने कहा था कि घुसपैठिए यह तय करते हैं कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। इससे यह संदेश दिया जा रहा था कि विपक्ष को वोट देने वाले सभी घुसपैठिए हैं। इसी कारण चुनाव आयोग काम कर रहा है और विपक्ष को वोट देने वालों के नाम काटने का प्रयास कर रहा है। चुनाव आयोग देश की जिम्मेदारी के अनुसार नहीं, बल्कि भाजपा की जिम्मेदारी के अनुसार कार्य कर रहा है।

एक किताब के विमोचन के दौरान, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जिस तरह से उन्होंने यह किताब लिखी है, खासकर महिला वोटरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, वह बहुत प्रभावशाली है। हम सभी जानते हैं कि महिलाएं बड़ी संख्या में वोट करती हैं, लेकिन हमें समझना चाहिए कि उन्हें क्या प्रेरित करता है। महिलाओं को भी चुनावों में भाग लेने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हम अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए उचित तरीके अपनाएं। जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में इस प्रकार की नारेबाजी न केवल संस्थान की गरिमा को प्रभावित करती है, बल्कि हमारे लोकतंत्र की बुनियादी बातों को भी चुनौती देती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका चतुर्वेदी ने जेएनयू में क्या कहा?
उन्होंने जेएनयू में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ लगाए गए नारों की कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसे नारों की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
क्या नारेबाजी लोकतंत्र के लिए सही है?
प्रियंका चतुर्वेदी के अनुसार, इस प्रकार की नारेबाजी लोकतंत्र को कमजोर करती है और हमें संयम का परिचय देना चाहिए।
एसआईआर का क्या महत्व है?
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग का एक महत्वपूर्ण टूल है, लेकिन इसे राजनीतिक एजेंडे में बदल दिया गया है।
महिलाओं की राजनीति में भागीदारी के बारे में क्या कहा गया?
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिलाओं को चुनावों में अधिक से अधिक भागीदारी करने का अवसर मिलना चाहिए।
क्या चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया गया?
उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह भाजपा के एजेंडे के अनुरूप कार्य कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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