आयुर्वेद के अनुसार दालों के स्वास्थ्य लाभ: मूंग, मसूर, उड़द, अरहर, चना, राजमा और सूखी मटर के फायदे और सावधानियां
सारांश
Key Takeaways
- दालें पौष्टिकता का बेहतरीन स्रोत हैं।
- आयुर्वेद में दालों को औषधि माना गया है।
- हर दाल के फायदे और परहेज होते हैं।
- मूंग दाल पाचन के लिए सर्वोत्तम है।
- दालों का सेवन स्वास्थ्य में सुधार लाता है।
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार लेना अत्यंत महत्वपूर्ण है। दालें इनमें से एक हैं, जिनका सेवन सेहत के लिए बेहद लाभदायक होता है।
आयुर्वेद में दालों को केवल खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि औषधि के रूप में भी देखा गया है, जिससे स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं। भारत में विभिन्न प्रकार की दालों की खेती की जाती है, जैसे कि मूंग, मसूर, उड़द, अरहर, चना, राजमा, सफेद चना (काबुली), काला चना और सूखी मटर।
आयुर्वेद ने इन दालों के फायदे और परहेज के बारे में भी जानकारी दी है।
मूंग दाल: यह हल्की और आसानी से पचने वाली दाल है, जिसकी तासीर ठंडी होती है। इसे कमजोर पाचन, एसिडिटी, डायबिटीज, पीसीओएस और थायरॉइड के रोगियों के लिए सहायक माना गया है। हालांकि, अत्यधिक कफ, सर्दी-जुखाम और ठंड के मौसम में इसे रात में खाने से बचना चाहिए।
मसूर दाल: इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे मुख्य रूप से शरीर को गर्म रखने, वजन घटाने और फैटी लिवर की समस्या को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है। जो लोग जोड़ों के दर्द, बवासीर, पाचन या किडनी से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें मसूर दाल का सेवन सीमित करना चाहिए।
अरहर दाल: इस दाल को खाना लोगों को बहुत पसंद होता है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है, जो शरीर की सामान्य कमजोरी को दूर करने में सहायक है। एसिडिटी की समस्या वाले लोगों को इसे रात में तेज मसालों के साथ खाने से बचना चाहिए।
चना दाल: चना दाल में भूख नियंत्रित करने के गुण होते हैं। इसलिए जिन लोगों को बहुत भूख लगती है, उन्हें इसे अपने भोजन में शामिल करना चाहिए। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। लेकिन, कमजोर पाचन वाले लोगों को इसे रात में खाने से बचना चाहिए।
उड़द दाल: इसे खाने से जोड़ों की ताकत बढ़ती है। यह कमजोरी को दूर करने में मददगार होती है, लेकिन मोटापे, उच्च कफ, बलगम, बुखार और एसिडिटी से जूझ रहे लोगों को इसे खाने से परहेज करना चाहिए।
राजमा: प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होने के कारण राजमा सेहत के लिए लाभदायक होता है, लेकिन गैस, आईबीएस, थायरॉइड और वजन घटाने की समस्या से जूझ रहे लोगों को इसे खाने से बचना चाहिए।
सफेद चना: सफेद चना या काबुली चना मसल बिल्डिंग के लिए बहुत फायदेमंद होती है। लेकिन कब्ज, एसिडिटी और पीसीओएस की समस्या से पीड़ित महिलाओं को इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए।
काला चना: काले चने में स्टैमिना और आयरन की भरपूर मात्रा होती है। इसलिए इसका सेवन सेहत के लिए लाभकारी है। लेकिन गैस, पेट फूलने और जोड़ो में दर्द जैसी समस्याओं से जूझने वाले लोगों को इसे सीमित मात्रा में खाना चाहिए।
सूखी मटर: प्रोटीन और ऊर्जा से भरपूर सूखी मटर की दाल का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन सर्दी, बलगम, गैस और कमजोर पाचन वाले लोगों को इसे कम या न के बराबर खाना चाहिए।