योगी सरकार ने आजीविका मिशन का दायरा किया आठ गुना बढ़ा, महिलाओं को मिला नया मौका
सारांश
Key Takeaways
- आजीविका मिशन का दायरा आठ गुना बढ़ा है।
- एक करोड़ छह लाख महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।
- महिलाएं अब रोजगार सृजन की प्रतिनिधि बन चुकी हैं।
- ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री हो रही है।
- योगी सरकार की पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।
लखनऊ, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। पहले, स्वयं सहायता समूहों की योजनाएं कुछ विकास खंडों तक सीमित थीं, लेकिन अब यह मिशन राज्य के हर क्षेत्र में फैल चुका है। वर्ष 2013–14 से 2016–17 तक यह योजना केवल 104 विकास खंडों में ही सक्रिय थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में इसे प्रदेश के 75 जिलों के 826 विकास खंडों तक विस्तारित किया गया है। इसका अर्थ है कि इसका दायरा अब आठ गुना बढ़ चुका है।
योगी सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अभियान चलाकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ रही है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अब तक एक करोड़ छह लाख से अधिक महिलाएं इस मिशन से जुड़कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन चुकी हैं। कपड़ा, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, सौंदर्य उत्पाद और ऑर्गेनिक खेती जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों का प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया चेहरा बन रही हैं।
प्रदेश की महिलाएं अब केवल रोजगार की आकांक्षी नहीं, बल्कि रोजगार सृजन की प्रतीक बन चुकी हैं। योगी सरकार का लक्ष्य हर ग्राम पंचायत में ऐसी महिलाओं का उद्यमी नेटवर्क विकसित करना है, जो न केवल खुद कमाए, बल्कि अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण दे। महिला स्वयं सहायता समूहों को बैंकिंग सहायता, विपणन समर्थन और प्रशिक्षण सुविधाएं देने से ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
विभिन्न जिलों से जुड़े महिला समूह अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा रहे हैं। यूपी में महिला उद्यमिता का यह विस्तार सरकार की 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।