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जामिया विवाद: साजिद रशीदी का दावा — 'फ्री कश्मीर' नारे छात्रों के नहीं, साजिश है

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जामिया विवाद: साजिद रशीदी का दावा — 'फ्री कश्मीर' नारे छात्रों के नहीं, साजिश है

सारांश

जामिया में छात्र प्रदर्शन के बीच AIIA अध्यक्ष साजिद रशीदी ने 'फ्री कश्मीर' नारों को छात्रों से अलग करते हुए बाहरी साजिश बताया। छात्रों की यूनियन बहाली और हॉस्टल सुविधाओं की माँगें जायज बताईं, लेकिन कहा — इन नारों के तार बांग्लादेश से प्रेरित उन तत्वों से जुड़े हैं जो भारत में सांप्रदायिक फसाद चाहते हैं।

मुख्य बातें

AIIA अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 24 अक्टूबर को जामिया विवाद पर बयान दिया।
रशीदी ने छात्रों की स्टूडेंट यूनियन बहाली और हॉस्टल सुविधाओं की माँगें जायज बताईं।
उन्होंने दावा किया कि 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' के नारे जामिया छात्रों या ओखला के मुसलमानों के नहीं हैं।
रशीदी के अनुसार, ये नारे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों से प्रेरित बाहरी तत्वों की साजिश हैं।
अभिजीत दिपके , सीजेपी नेताओं और नेहा बोरा की कड़ाई से जाँच की माँग की।
विदेशी फंडिंग के आरोप लगाए — इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 24 अक्टूबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जारी छात्र प्रदर्शन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। रशीदी ने छात्रों की स्टूडेंट यूनियन बहाली और हॉस्टल सुविधाओं से जुड़ी माँगों को जायज ठहराया, लेकिन विश्वविद्यालय की दीवारों पर लिखे 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' के नारों को बाहरी साजिश करार दिया। उनके अनुसार, ये नारे न जामिया के छात्रों के हैं और न ओखला के मुसलमानों के — बल्कि उन तत्वों के हैं जो देश में सांप्रदायिक तनाव भड़काना चाहते हैं।

छात्रों की माँगें जायज, पर नारे साजिश का हिस्सा

रशीदी ने स्पष्ट किया कि जामिया प्रशासन से छात्रों की माँगें बिल्कुल स्वाभाविक हैं। उन्होंने कहा, 'जामिया के जो बड़े अधिकारी हैं, उन सब तक ये लोग अपनी बात पहुँचाना चाहते हैं। उनकी आवाज़ बहुत सरल है। वे कहते हैं कि स्टूडेंट्स यूनियन को बहाल करो और जो बच्चों पर कार्रवाई हुई है, उसे खत्म करो। हमारे हॉस्टलों में बिजली, पानी और खेल की सुविधाएँ पूरी करो।' उन्होंने कहा कि इस तरह की माँगें हर शिक्षण संस्थान में उठती हैं और ये जायज हैं।

हालाँकि, रशीदी ने 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' के नारों से पूरी तरह किनारा किया। उनके अनुसार, 'मैं सौ प्रतिशत कहता हूँ कि ये जामिया के छात्रों के नारे नहीं हैं और न ही ओखला के मुसलमानों के नारे हैं।'

बांग्लादेश प्रदर्शनों से प्रेरणा लेने का आरोप

रशीदी ने कथित तौर पर दावा किया कि ये नारे उन लोगों के हैं जो बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमलों से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग उस सोच को भारत में लाना चाहते हैं, वही इन नारों के पीछे हैं। उनके अनुसार, इन तत्वों का मकसद देश में हिंदू-मुसलमान के बीच गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना और सांप्रदायिक फसाद फैलाना है।

रशीदी ने अभिजीत दिपके और सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के नेताओं के साथ-साथ नेहा बोरा का नाम लेते हुए कहा कि जो लोग बंगाल के प्रदर्शनों से प्रेरणा लेने की बात करते हैं, उनकी कड़ाई से जाँच होनी चाहिए। यह उनका व्यक्तिगत दावा है; इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

विदेशी फंडिंग के आरोप

रशीदी ने अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन का हवाला देते हुए दावा किया कि कुछ लोग अमेरिका से देशों को तोड़ने के लिए फंडिंग करते हैं और कथित तौर पर दिपके को भी वहीं से वित्तीय सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि जो लोग 'हवाई जहाज से आते हैं, देश में बदनामी फैलाकर वापस चले जाते हैं' और जिनकी पार्टी का कोई पंजीकरण नहीं है, उनके बारे में सवाल उठने चाहिए। ये गंभीर आरोप हैं जिनकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

राहुल गांधी और SIR मुद्दे पर रुख

रशीदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि SIR (Special Intensive Revision) के मुद्दे को राहुल गांधी लगातार उठा रहे हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें यह अधिकार है। हालाँकि, उन्होंने उन लोगों पर सवाल उठाए जिनका 'पब्लिक में वजूद नहीं है' और जो बिना किसी जनाधार के देश की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

आगे क्या होगा

जामिया में छात्र प्रदर्शन अभी भी जारी है और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। रशीदी के बयान ने इस विवाद को एक नया आयाम दिया है — जहाँ एक प्रमुख मुस्लिम धार्मिक नेता ने खुद छात्रों की जायज माँगों और कथित बाहरी साजिश के बीच स्पष्ट रेखा खींची है। यह देखना होगा कि जाँच एजेंसियाँ दीवारों पर लिखे नारों के पीछे के तत्वों की पहचान कर पाती हैं या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

अभिजीत दिपके और नेहा बोरा जैसे व्यक्तियों पर लगाए गए विदेशी फंडिंग के आरोप गंभीर हैं और इनकी पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं हुए हैं — इन्हें दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। असली सवाल यह है कि जामिया की दीवारों पर लिखे नारों की जाँच एजेंसियाँ वास्तव में पड़ताल करती हैं या नहीं — क्योंकि बिना जाँच के आरोप और बिना जवाबदेही के बयान, दोनों ही सांप्रदायिक आख्यान को और गहरा करते हैं।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साजिद रशीदी ने जामिया विवाद पर क्या कहा?
AIIA अध्यक्ष साजिद रशीदी ने कहा कि जामिया छात्रों की स्टूडेंट यूनियन बहाली और हॉस्टल सुविधाओं की माँगें जायज हैं, लेकिन 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री शरजील इमाम' के नारे जामिया के छात्रों या ओखला के मुसलमानों के नहीं हैं। उन्होंने इन नारों को बाहरी साजिश बताया।
'फ्री कश्मीर' नारों के पीछे कौन है — रशीदी का दावा क्या है?
रशीदी के अनुसार, ये नारे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमलों से प्रेरित उन तत्वों के हैं जो भारत में हिंदू-मुसलमान के बीच गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं। यह उनका व्यक्तिगत दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
जामिया में छात्र किन माँगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं?
छात्र मुख्य रूप से स्टूडेंट यूनियन की बहाली, छात्रों पर हुई कार्रवाई वापस लेने और हॉस्टलों में बिजली, पानी व खेल सुविधाएँ बहाल करने की माँग कर रहे हैं। रशीदी ने इन माँगों को जायज बताया।
रशीदी ने किन लोगों की जाँच की माँग की?
रशीदी ने अभिजीत दिपके, सीजेपी के नेताओं और नेहा बोरा का नाम लेकर उनकी कड़ाई से जाँच की माँग की। उन्होंने दावा किया कि इन पर विदेश से फंडिंग होती है, हालाँकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
AIIA क्या है और साजिद रशीदी कौन हैं?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) भारत के प्रमुख मुस्लिम धार्मिक संगठनों में से एक है। मौलाना साजिद रशीदी इसके अध्यक्ष हैं और राष्ट्रीय मुद्दों पर अक्सर सार्वजनिक बयान देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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