दीपावली पर 700% हवाई किराया बढ़ोतरी: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया, बोला — 'हवाई यात्रा न करें'
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 नवंबर 2026 को दीपावली 2026 के दौरान घरेलू हवाई किराये में 700 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी को लेकर दायर अंतरिम आवेदन पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किराये अत्यधिक हैं, तो यात्री हवाई यात्रा से परहेज़ करें।
मामले का घटनाक्रम
यह अंतरिम आवेदन जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपारेश कुमार सिंह की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया। आवेदक के वकील ने पीठ को बताया कि त्योहारी सीजन में हवाई किराया 700 प्रतिशत तक बढ़ गया है और तत्काल सूचीबद्धता की माँग की।
वकील की दलील थी कि हवाई यात्रा अब एक आवश्यक सेवा बन चुकी है और इस पैमाने पर मूल्य वृद्धि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। हालाँकि, पीठ ने तत्काल लिस्टिंग की माँग अस्वीकार करते हुए कहा, "हवाई यात्रा न करें। अगला मामला।"
मूल जनहित याचिका की पृष्ठभूमि
यह आवेदन एक लंबित जनहित याचिका (PIL) में दायर किया गया है, जो नागरिक उड्डयन क्षेत्र में कथित तौर पर अपारदर्शी, शोषणकारी और एल्गोरिदम आधारित मूल्य निर्धारण प्रथाओं को चुनौती देती है। इस PIL में अप्रत्याशित किराया उतार चढ़ाव, अंतिम समय में भारी बढ़ोतरी और एयरलाइनों द्वारा वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क को भी निशाने पर लिया गया है।
गौरतलब है कि पूर्व की सुनवाई में इसी पीठ ने एयरलाइन मूल्य निर्धारण को लेकर चिंता जताई थी। पीठ ने कहा था, "एक ही दिन, एक ही गंतव्य के लिए एक एयरलाइन इकोनॉमी क्लास में ₹8,000 लेती है, जबकि दूसरी ₹18,000 लेती है। कुछ युक्तिकरण तो होना ही चाहिए।"
सरकार की प्रतिक्रिया और नए नियम
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को आश्वासन दिया था कि हवाई किराये और अतिरिक्त शुल्क को विनियमित करने वाले नियम दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित कर दिए जाएँगे। इस पर न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि 16 नवंबर की अगली सुनवाई तक अधिसूचित नियम प्रस्तुत किए जाएँ।
16 अक्टूबर 2026 को केंद्र ने न्यायालय को बताया था कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत हवाई किराये और अतिरिक्त शुल्क विनियमन के नियमों को अंतिम रूप देकर प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। इसके बाद केंद्र ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो लगभग नौ दशकों से चले आ रहे विमान नियम, 1937 की जगह लेंगे।
नए नियामक ढाँचे में क्या बदलेगा
नया नियामक ढाँचा 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। इसके तहत एयरलाइनों को टिकट का कुल मूल्य, बेस किराया, कर, शुल्क, रद्दीकरण प्रभार और रिफंड नीतियों का पूरा ब्यौरा यात्रियों को देना अनिवार्य होगा — यह किराया पारदर्शिता की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एयरलाइन टैरिफ नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की निगरानी में रहेगा।
आगे क्या होगा
मामला 16 नवंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जहाँ केंद्र सरकार को अधिसूचित नियमों की प्रति न्यायालय के समक्ष रखनी होगी। यह ऐसे समय में आया है जब त्योहारी सीजन में हवाई किराये को लेकर यात्रियों में असंतोष चरम पर है और सर्वोच्च न्यायालय इस क्षेत्र में नियामकीय पारदर्शिता की लगातार पड़ताल कर रहा है।