16 अक्टूबर 2026
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हवाई किराया नियमन: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, दो सप्ताह में जारी होंगे नए नियम

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हवाई किराया नियमन: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, दो सप्ताह में जारी होंगे नए नियम

सारांश

हवाई किराए पर सरकार की लंबे समय से चली आ रही चुप्पी अब टूटती दिख रही है। केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में स्वीकार किया कि नियम तैयार हैं और दो सप्ताह में अधिसूचित होंगे — यह उस PIL की जीत है जिसने एल्गोरिदम-आधारित सर्ज प्राइसिंग को कटघरे में खड़ा किया था।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में कहा कि हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों को विनियमित करने के नियम तैयार हो चुके हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया कि नियम दो सप्ताह के भीतर अधिसूचित किए जाएँगे।
नियम भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए जा रहे हैं और उन्हें प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है।
मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस.
लक्ष्मीनारायण की PIL से जुड़ा है, जिसमें सर्ज प्राइसिंग और बैगेज सीमा 25 किग्रा से 15 किग्रा किए जाने को चुनौती दी गई है।
पीठ ने अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की है; सरकार को जारी नियमों की प्रति अदालत में पेश करनी होगी।

केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि एयरलाइनों द्वारा वसूले जाने वाले हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों को विनियमित करने के नियम न केवल तैयार हो चुके हैं, बल्कि उन्हें प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि ये नियम दो सप्ताह के भीतर अधिसूचित कर दिए जाएँगे।

अदालती कार्यवाही और अगली सुनवाई

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, आर. महादेवन और अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल की दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख पर जारी किए गए नियमों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली इसी पीठ ने एक पूर्व सुनवाई में मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि निजी एयरलाइनों के किराए में कुछ 'तर्कसंगतता' होनी चाहिए और सरकार से यात्रियों को राहत देने का आग्रह किया था।

मामले की पृष्ठभूमि: जनहित याचिका

यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। इसमें नागरिक उड्डयन क्षेत्र में कथित 'अपारदर्शी, शोषणकारी और एल्गोरिदम-आधारित' मूल्य निर्धारण प्रथाओं को चुनौती दी गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि आपातकालीन स्थितियों, त्योहारों और व्यस्त यात्रा सीजन के दौरान टिकट की कीमतों में अचानक भारी वृद्धि से उन यात्रियों को गंभीर परेशानी होती है जिन्हें चिकित्सा, शिक्षा या रोजगार जैसी अनिवार्य जरूरतों के लिए हवाई यात्रा करनी पड़ती है। पीठ ने इसी संदर्भ में कहा था, 'एक ही दिन, एक ही गंतव्य के लिए एक एयरलाइन इकॉनमी क्लास में ₹8,000 लेती है, जबकि दूसरी ₹18,000 — इसमें कुछ तर्कसंगत बदलाव होने चाहिए।'

बैगेज नियम और अतिरिक्त शुल्क पर विवाद

याचिका में मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा को 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम करने पर भी आपत्ति जताई गई है। दावा किया गया है कि यात्रियों से अब उन सेवाओं के लिए अलग से शुल्क वसूला जा रहा है जो पहले टिकट की कीमत में ही शामिल होती थीं। याचिकाकर्ता ने एक स्वतंत्र विमानन शुल्क नियामक स्थापित करने की माँग की है जो किराया ढाँचे की निगरानी करे, नियमों के पालन की जाँच करे और यात्रियों की शिकायतों का निवारण करे।

भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियमन

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को पहले ही बताया था कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत एयरलाइन किराए और अतिरिक्त शुल्कों से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं। सरकार ने पुष्टि की कि PIL में उठाए गए मुद्दों — जिनमें हवाई किराया, सर्ज प्राइसिंग और बैगेज शुल्क शामिल हैं — पर 'उच्च स्तर पर' विचार किया जा रहा है।

आम यात्रियों पर असर और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में हवाई यात्रा की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और त्योहारी सीजन में किराए में भारी उछाल एक पुरानी शिकायत बन चुकी है। यदि नए नियम समय पर अधिसूचित होते हैं और उनमें पारदर्शी मूल्य निर्धारण की बाध्यता रहती है, तो करोड़ों भारतीय यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। 16 नवंबर की सुनवाई में सरकार को अदालत के समक्ष जारी नियमों की प्रति प्रस्तुत करनी होगी — यही इस मामले का अगला निर्णायक मोड़ होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में रखना ज़रूरी है — सरकार ने पहले भी इसी अदालत को नियमन की दिशा में कदम उठाने का भरोसा दिलाया था, और मामला लंबित रहा। असली सवाल यह नहीं कि नियम कब अधिसूचित होंगे, बल्कि यह है कि क्या वे वास्तव में सर्ज प्राइसिंग पर अंकुश लगाएँगे या महज़ 'पारदर्शिता' की औपचारिकता बनकर रह जाएँगे। भारत में एयरलाइन किराए वैश्विक औसत से कई गुना अधिक उतार-चढ़ाव करते हैं, और एल्गोरिदम-आधारित मूल्य निर्धारण पर कोई ठोस जवाबदेही तंत्र अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। यदि स्वतंत्र नियामक की माँग को नकारकर महज़ दिशानिर्देश जारी किए गए, तो इस ऐतिहासिक PIL का असर सीमित ही रहेगा।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हवाई किराए पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में बताया कि एयरलाइनों के किराए और अतिरिक्त शुल्कों को विनियमित करने के नियम तैयार हो चुके हैं और उन्हें प्रशासनिक मंजूरी भी मिल गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि ये नियम दो सप्ताह के भीतर जारी कर दिए जाएँगे।
यह PIL किसने दायर की और इसमें क्या माँग है?
यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण ने दायर की है। इसमें एयरलाइनों की कथित 'अपारदर्शी, शोषणकारी और एल्गोरिदम-आधारित' सर्ज प्राइसिंग को चुनौती दी गई है और एक स्वतंत्र विमानन शुल्क नियामक की स्थापना की माँग की गई है।
मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा कितनी घटाई गई है?
याचिका के अनुसार, एयरलाइनों ने मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर 15 किलोग्राम कर दी है। इसके अलावा, कई ऐसी सेवाओं के लिए अब अलग से शुल्क वसूला जा रहा है जो पहले टिकट की कीमत में शामिल थीं।
नए हवाई किराया नियम किस कानून के तहत बनाए जा रहे हैं?
ये नियम 'भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024' के तहत तैयार किए जा रहे हैं। सरकार ने अदालत को बताया कि इसी कानूनी ढाँचे के अंतर्गत हवाई किराए, सर्ज प्राइसिंग और बैगेज शुल्क जैसे मुद्दों पर नियमन के प्रावधान किए जा रहे हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की है। उस तारीख पर केंद्र सरकार को जारी किए गए नियमों की प्रति अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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