मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल का रजिस्ट्रेशन पोर्टल एक माह से बंद, हज़ारों अभ्यर्थी परेशान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल पिछले करीब एक महीने से बंद पड़ा है, जिससे राज्य के हज़ारों नर्सिंग अभ्यर्थियों को नौकरी, उच्च शिक्षा और अस्पताल नियुक्ति जैसी व्यावसायिक ज़रूरतों के लिए पंजीयन नहीं मिल पा रहा। काउंसिल की संचालक डॉ. बीनू कुशवाह के अनुसार पोर्टल 15 नवंबर 2026 तक पुनः चालू हो जाएगा। भोपाल से सामने आई यह स्थिति ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की निगरानी और तकनीकी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
मामले की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश की नर्सिंग काउंसिल काफी समय से विवादों के घेरे में रही है। कागज़ पर चलने वाले कॉलेजों के मामले उजागर होने और दलालों की सक्रियता के बाद काउंसिल की कार्यप्रणाली पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। मध्य प्रदेश एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने आरोप लगाया कि पोर्टल के ज़रिये एक गधे के नाम पर रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी होने का मामला सामने आने के बाद काउंसिल ने पोर्टल बंद कर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पहले से सवालों के दायरे में है।
अभ्यर्थियों पर असर
परमार के अनुसार मध्य प्रदेश में हज़ारों नर्सिंग अभ्यर्थियों को पंजीयन की तत्काल आवश्यकता है — चाहे वह सरकारी अस्पतालों में नियुक्ति हो, उच्च शिक्षा में प्रवेश हो, या निजी स्वास्थ्य संस्थानों में नौकरी। एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी न तो काउंसिल की ओर से कोई स्पष्ट समयसीमा दी गई थी और न ही आवेदकों को कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। कई अभ्यर्थियों के दस्तावेज़ और आवेदन लंबित पड़े हैं, और नौकरी के अवसर गंवाने का डर भी बना हुआ है।
विपक्ष की माँग और सवाल
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि जब पोर्टल से फर्जी या संदिग्ध रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी होने की बात सामने आई, तब निष्पक्ष जाँच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करना और पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था मज़बूत करना ज़रूरी था। उनके अनुसार पोर्टल बंद कर देना और महीनों उसे शुरू न कर पाना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे वास्तविक और योग्य अभ्यर्थियों को अनावश्यक नुकसान उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि यह राज्य में नर्सिंग व्यवस्था से जुड़ी कथित अनियमितताओं की लंबी सूची में एक और मामला है।
काउंसिल की सफाई
काउंसिल संचालक डॉ. बीनू कुशवाह ने कहा कि पंजीयन में गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद काउंसिल पूरी सतर्कता बरत रही है। उनके अनुसार जिन अभ्यर्थियों के रजिस्ट्रेशन पहले हो चुके हैं, उनका दोबारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है ताकि फर्जी पंजीयन पकड़े जा सकें। कुशवाह ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पर काउंसिल इसलिए ज़ोर दे रही है क्योंकि दलाल किस्म के लोग अभ्यर्थियों को ठगते रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि पोर्टल 15 नवंबर 2026 तक पुनः चालू हो जाएगा।
आगे क्या होगा
काउंसिल द्वारा तय की गई 15 नवंबर की समयसीमा अब अभ्यर्थियों और संगठनों की नज़र में है। यदि यह तारीख भी चूकती है, तो मामला और राजनीतिक रंग ले सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के साथ-साथ एक स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट भी ज़रूरी होगा, ताकि भविष्य में ऐसी खामियाँ दोबारा न उभरें।