मध्य प्रदेश: उच्च जोखिम वाली 2 लाख गर्भवतियों में सिर्फ 30% की समय पर अस्पताल में भर्ती, सरकार सतर्क
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में अनमोल स्वास्थ्य निगरानी पोर्टल पर पंजीकृत 62 लाख गर्भवती महिलाओं में से लगभग 2 लाख महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की श्रेणी में रखा गया है। चिंताजनक पहलू यह है कि इनमें से केवल 30 प्रतिशत को ही समय रहते स्वास्थ्य संस्थानों में भर्ती कराया जा रहा है — शेष 70 प्रतिशत महिलाएँ अभी भी समय पर संस्थागत देखभाल से वंचित हैं। यह तथ्य 28 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा बैठक में सामने आया।
बैठक में क्या उठा मुद्दा
उपमुख्यमंत्री एवं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की पड़ताल की गई। शुक्ला ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान, निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों और ज़मीनी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रूप से परिभाषित होनी चाहिए और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित निगरानी होनी चाहिए।
पोर्टल और निगरानी तंत्र
सरकारी बयान के अनुसार, अनमोल पोर्टल पर पंजीकृत लगभग 2 लाख उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की निगरानी सुमन एकीकृत कमांड सेंटर के ज़रिये भी की जाती है। शुक्ला ने गर्भवती महिलाओं के समय पर पंजीकरण, निर्धारित प्रसवपूर्व जाँचें पूरी कराने और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्क्रीनिंग पर विशेष ज़ोर दिया। संस्थागत प्रसव और नियमित चिकित्सा जाँच को लेकर जागरूकता बढ़ाने का भी आह्वान किया गया।
राज्य में मातृ स्वास्थ्य की स्थिति
2022-24 के नमूना पंजीकरण प्रणाली के आँकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 135 दर्ज की गई है। हालाँकि, चालू वित्त वर्ष में सितंबर 2026 तक गर्भवती महिलाओं का प्रथम-त्रैमासिक पंजीकरण 90.6 प्रतिशत और संस्थागत प्रसव 93.4 प्रतिशत रहा, जो उत्साहजनक संकेत हैं। गौरतलब है कि राज्य में गर्भवती महिलाओं की देखभाल के लिए 35 प्रसूति गहन देखभाल इकाइयाँ, 109 प्राथमिक रेफरल इकाइयाँ और 229 प्रसव प्रतीक्षा गृह स्थापित हैं।
टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी की भूमिका
शुक्ला ने अधिकारियों को ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा के माध्यम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेषज्ञ परामर्श की पहुँच बेहतर बनाने का निर्देश दिया। आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच ई-संजीवनी के ज़रिये राज्य में 59,914 सामान्य टेली-परामर्श और 10,890 विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराए गए। उन्होंने सेवा उपलब्धता की कमियों को दूर करने और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया।
नवजात और बाल स्वास्थ्य पर भी फोकस
उपमुख्यमंत्री ने नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए उपचार सुविधाओं को सुदृढ़ करने और कुपोषण, एनीमिया, दस्त तथा निमोनिया से निपटने के कार्यक्रमों में सुधार का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश अपनी मातृ मृत्यु दर को राष्ट्रीय औसत के करीब लाने की कोशिश में है। आगामी महीनों में राज्य सरकार की समीक्षा बैठकें तय करेंगी कि ये निर्देश ज़मीन पर कितने प्रभावशाली साबित होते हैं।