मध्य प्रदेश: उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सरकारी डॉक्टरों की निगरानी के दिए निर्देश, भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मंगलवार, 1 सितंबर को भोपाल स्थित मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। राज्य में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमज़ोरियों को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच यह कदम उठाया गया है।
बैठक में क्या हुए निर्देश
उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने विभागीय व्यवस्थाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने और आम नागरिकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया।
बैठक में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के भी निर्देश दिए गए। विभाग में अन्य रिक्त पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की गई और मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया में गति लाने का आदेश दिया गया।
पृष्ठभूमि: क्यों उठाना पड़ा यह कदम
राज्य के कई इलाकों से लगातार यह शिकायतें आती रही हैं कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक समय पर नहीं पहुँचते, जिससे मरीज़ों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाल ही में बालाघाट में बीमारी फैलने और बच्चों की मौत की घटना सामने आई। इसी तरह के मामले सतना में भी उजागर हुए, जिन्होंने सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे की कमज़ोरियों को एक बार फिर रेखांकित किया।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के व्यापक प्रयास कर रही है। चिकित्सकों पर निगरानी की यह पहल उसी क्रम का हिस्सा बताई जा रही है।
बैठक में कौन रहे उपस्थित
समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सुखवीर सिंह तथा आयुक्त धनराजू एस उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।
आगे क्या होगा
निगरानी व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने और भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देशों के बाद अब यह देखना होगा कि ज़मीनी स्तर पर इनका क्रियान्वयन कितनी तेज़ी से होता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और अनुपस्थिति की समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना सरकार के लिए बड़ी परीक्षा होगी।