मध्य प्रदेश में 5 साल में 201 HIV पॉज़िटिव शिशुओं का जन्म, 743 गर्भवती संक्रमित: कमलनाथ का बड़ा हमला
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने राज्य में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के HIV संक्रमित पाए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके बयान के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में मध्य प्रदेश में 200 से अधिक HIV पॉज़िटिव बच्चों का जन्म हुआ है, और वर्ष 2025-26 में 743 गर्भवती महिलाएँ HIV पॉज़िटिव पाई गईं।
मुख्य आँकड़े और दावे
कमलनाथ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बीते पाँच वर्षों में राज्य में 201 ऐसे नवजात शिशुओं ने जन्म लिया है जो HIV से संक्रमित पाए गए, और उनकी माताएँ भी इस संक्रमण से प्रभावित हैं। एक रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि इसी अवधि में राज्य में HIV पॉज़िटिव गर्भवती महिलाओं की संख्या में 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कमलनाथ का सरकार पर वार
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद गर्भवती महिलाओं की न तो सही ढंग से जाँच की जा रही है और न ही सभी को उचित तरीके से दवा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा, ‘एचआईवी संक्रमण के मामले में इस तरह की गंभीर लापरवाही किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं की जा सकती।’ कमलनाथ ने माँग की कि भाजपा सरकार इस गंभीर बीमारी पर विशेष कदम उठाए।
स्वास्थ्य सेवाएँ बनीं सियासी मुद्दा
राज्य में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाएँ बड़ा सियासी मुद्दा बनी हुई हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह गड़बड़ा चुकी हैं, जिसके कारण आम आदमी को ज़रूरत के मुताबिक चिकित्सा सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं। पार्टी का कहना है कि अस्पतालों में चिकित्सकों के पद रिक्त हैं और मरीज़ों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएँ भी मौजूद नहीं हैं।
सरकार का दावा बनाम विपक्ष का आरोप
दूसरी ओर, राज्य सरकार दावा कर रही है कि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहतर हो रही है। सरकार के अनुसार, हर ज़िले में चिकित्सा महाविद्यालय शुरू किए जा रहे हैं और दूरस्थ इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाई गई है। हालाँकि, ज़मीनी आँकड़े और विपक्ष के आरोप इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
क्यों मायने रखता है
HIV का माँ से बच्चे में संचरण (mother-to-child transmission) चिकित्सकीय दृष्टि से रोके जाने योग्य माना जाता है, बशर्ते समय पर जाँच और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी उपलब्ध कराई जाए। ऐसे में संक्रमित नवजातों की संख्या में वृद्धि राज्य की प्रसवपूर्व देखभाल (ANC) व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आगामी हफ्तों में इस मुद्दे पर राजनीतिक तकरार और तेज़ होने की संभावना है।