मध्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 173 से घटकर 135 हुई, 38 अंकों की गिरावट राष्ट्रीय औसत से दोगुनी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य योजनाओं के ठोस परिणाम सामने आए हैं — भारत सरकार के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश का मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) 2018–20 के 173 से घटकर 2022–24 में 135 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आ गया है। यह 38 अंकों यानी लगभग 22 प्रतिशत की गिरावट है, जो राष्ट्रीय औसत सुधार से दोगुनी से भी अधिक है।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में मध्य प्रदेश का प्रदर्शन
एसआरएस आंकड़ों के अनुसार देशभर में एमएमआर 2018–20 के 97 से घटकर 2022–24 में 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म पर आया है। मध्य प्रदेश ने इस राष्ट्रीय औसत सुधार की तुलना में कहीं अधिक तेज़ गति से प्रगति दर्ज की है। गौरतलब है कि प्रदेश पहले उन राज्यों में गिना जाता था जहाँ मातृ मृत्यु दर चिंताजनक स्तर पर थी, इसलिए यह बदलाव नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस उपलब्धि को बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, 'हर माँ और हर नवजात का सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करना हमारी सरकार का संकल्प है।' यादव ने एसआरएस सर्वे में दर्ज प्रगति को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य अमले को बधाई दी और सतत प्रयास जारी रखने का आह्वान किया।
उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि यह ऐतिहासिक गिरावट स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की मेहनत और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का सम्मिलित परिणाम है।
स्वास्थ्य अधोसंरचना में किए गए सुधार
प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के विस्तार से यह सकारात्मक बदलाव संभव हुआ है। प्रसव केंद्रों, प्रसूति गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्सटेट्रिक एचडीयू), फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) और सीईमॉनसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
ब्लड स्टोरेज यूनिट्स की स्थापना और रेफरल परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने से गर्भवती महिलाओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल रहा है। तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं ने भी मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आगे की राह
राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना को और मज़बूत करने की दिशा में प्रयासरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी स्तर तक सेवाओं की पहुँच बनाए रखना और नवजात शिशु मृत्यु दर पर भी समान ध्यान देना अगली प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि मध्य प्रदेश राष्ट्रीय लक्ष्यों के और करीब पहुँच सके।