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उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर घटी: SRS 2024 में NMR 25, IMR 35 दर्ज, योगी सरकार के स्वास्थ्य सुधारों का असर

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उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर घटी: SRS 2024 में NMR 25, IMR 35 दर्ज, योगी सरकार के स्वास्थ्य सुधारों का असर

सारांश

उत्तर प्रदेश में SRS 2024 रिपोर्ट के अनुसार नवजात से पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर के तीनों प्रमुख संकेतकों में गिरावट आई है। CPAP मशीन, कंगारू मदर केयर, MNCU और नर्सिंग प्रशिक्षण को श्रेय दिया जा रहा है। लेकिन जन्म के पहले 48 घंटों की देखभाल अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मुख्य बातें

SRS 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में नवजात मृत्यु दर (NMR) 26 से घटकर 25 प्रति हज़ार हुई।
शिशु मृत्यु दर (IMR) 37 से 35 और पाँच वर्ष तक की मृत्यु दर (U5MR) 42 से 41 प्रति हज़ार रह गई।
UP उन चुनिंदा राज्यों में शामिल जहाँ तीनों बाल मृत्यु दर संकेतकों में एक साथ कमी आई।
CPAP मशीन , कंगारू मदर केयर , मिल्क बैंक , निःशुल्क दवाएँ और MNCU को सुधार का श्रेय दिया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के पहले 48 घंटों की देखभाल की गुणवत्ता अगली बड़ी चुनौती है।

उत्तर प्रदेश में नवजात से पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 2023 की तुलना में 2024 में नवजात मृत्यु दर (NMR), शिशु मृत्यु दर (IMR) और पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर — तीनों आयु वर्गों में सुधार आया है। यह आँकड़े प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर आधारित हैं।

मुख्य आँकड़े: क्या कहती है SRS रिपोर्ट

SRS रिपोर्ट के अनुसार, नवजात मृत्यु दर (NMR) 2023 के 26 से घटकर 2024 में 25 प्रति हज़ार हो गई। इसी अवधि में शिशु मृत्यु दर (IMR) 37 से घटकर 35 और पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) 42 से घटकर 41 प्रति हज़ार रह गई।

उत्तर प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जहाँ बाल मृत्यु दर के सभी तीन प्रमुख संकेतकों में एक साथ कमी देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह जमीनी स्तर पर किए गए सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU), लखनऊ के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार, प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के उन्नयन से NMR और IMR में कमी आई है। उन्होंने बताया कि बीते तीन-चार वर्षों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पतालों तक के डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को लगातार प्रशिक्षित किया गया है।

डॉ. त्रिपाठी ने यह भी रेखांकित किया कि CPAP मशीन (नवजात को साँस लेने में कठिनाई होने पर), कंगारू मदर केयर, मिल्क बैंक, निःशुल्क दवाएँ और नियमित टीकाकरण — ये सभी उपाय शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में सहायक सिद्ध हुए हैं। इसके अतिरिक्त अस्पतालों में शुरू की गई मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) — जिसमें प्रसव के बाद माँ और नवजात को एक ही वार्ड में रखा जाता है — से भी महत्वपूर्ण लाभ हो रहा है।

नर्सिंग प्रशिक्षण और अग्रिम पंक्ति की भूमिका

वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल, लखनऊ की स्टाफ नर्स डेजी रानी ने बताया कि नर्सों को नवजात शिशु की देखभाल पर नियमित साप्ताहिक वर्चुअल लर्निंग सेशन और समय-समय पर आमने-सामने रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जा रही है। उनके अनुसार इन प्रशिक्षणों से नवजात के खतरे के लक्षण पहचानने, समय पर रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने और जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मज़बूत करने में काफी सहायता मिली है।

स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण पर ज़ोर

उसी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान ने बताया कि पहले अनेक नवजातों की मृत्यु संक्रमण और अस्वच्छता के कारण होती थी। अब अस्पतालों में स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाता है कि शिशु के पास आने से पूर्व डॉक्टर और नर्स के हाथ साफ हों, प्रसव क्षेत्र स्वच्छ हो, नवजात को लपेटने वाला कपड़ा, नाल काटने का उपकरण और नाल पर लगाई जाने वाली क्लिप — सभी संक्रमण-मुक्त हों।

आगे की चुनौती: पहले 48 घंटे सबसे अहम

हालाँकि आँकड़े उत्साहजनक हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात मृत्यु दर में कमी की रफ्तार अभी भी अपेक्षाकृत धीमी है और जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में खास बदलाव नहीं आया है। यह संकेत करता है कि अगला चरण प्रसव, डिलीवरी और जीवन के पहले 48 घंटों के दौरान दी जाने वाली देखभाल की गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित होना होगा। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर भी नवजात मृत्यु दर में कमी, शिशु और बाल मृत्यु दर की तुलना में अधिक कठिन साबित होती है क्योंकि यह सीधे प्रसव की गुणवत्ता से जुड़ी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका संदर्भ समझना ज़रूरी है — NMR में एक अंक की गिरावट प्रगति है, पर यह उस गति से कम है जो IMR और U5MR में देखी गई। यह विभाजन बताता है कि अस्पताल-स्तरीय सुधार तो हो रहे हैं, लेकिन प्रसव के दौरान और जन्म के तुरंत बाद की देखभाल — जो मुख्यतः कुशल जन्म परिचारकों और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं पर निर्भर है — अभी भी पिछड़ी हुई है। बड़ा सवाल यह है कि क्या MNCU और CPAP जैसी सुविधाएँ केवल जिला अस्पतालों तक सीमित हैं या ग्रामीण CHC और PHC स्तर तक पहुँच चुकी हैं, जहाँ अधिकांश उच्च-जोखिम प्रसव होते हैं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में बाल मृत्यु दर 2024 में कितनी रही?
SRS 2024 रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में नवजात मृत्यु दर (NMR) 25, शिशु मृत्यु दर (IMR) 35 और पाँच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) 41 प्रति हज़ार जीवित जन्म रही। ये सभी आँकड़े 2023 की तुलना में कम हैं।
उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर कम होने के क्या कारण हैं?
KGMU की डॉ. शालिनी त्रिपाठी के अनुसार, CPAP मशीन, कंगारू मदर केयर, मिल्क बैंक, निःशुल्क दवाएँ, नियमित टीकाकरण और मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) जैसे उपायों ने मृत्यु दर कम करने में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मियों के नियमित प्रशिक्षण और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण को भी श्रेय दिया गया है।
नवजात मृत्यु दर कम करने में अभी क्या चुनौतियाँ हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के तुरंत बाद और जीवन के पहले 48 घंटों में होने वाली मृत्यु दर में अपेक्षित सुधार नहीं आया है। इसका अर्थ है कि प्रसव के दौरान और जन्म के तत्काल बाद की देखभाल की गुणवत्ता सुधारना अगली प्राथमिकता होनी चाहिए।
मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट (MNCU) क्या है और यह कैसे मदद करती है?
MNCU एक विशेष अस्पताल इकाई है जिसमें प्रसव के बाद माँ और नवजात को एक ही वार्ड में एक साथ रखा जाता है। इससे स्तनपान, माँ-बच्चे का भावनात्मक जुड़ाव और नवजात की निगरानी बेहतर होती है, जो मृत्यु दर कम करने में सहायक है।
SRS रिपोर्ट क्या है और इसके आँकड़े कैसे जुटाए जाते हैं?
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) भारत सरकार की एक सांख्यिकीय प्रणाली है जो जन्म और मृत्यु दर के राष्ट्रीय एवं राज्य-स्तरीय अनुमान प्रदान करती है। यह आँकड़े प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर आधारित नमूना सर्वेक्षण के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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