राजस्थान: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जननी एक्सप्रेस सेवा की समीक्षा की, हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के परिवहन को मजबूत करने के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 4 अक्टूबर 2025 को जयपुर स्थित शासन सचिवालय में '104 जननी एक्सप्रेस' एम्बुलेंस सेवा के संचालन एवं प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं — विशेष रूप से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं — को समय पर अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।
बैठक में क्या हुए निर्देश
मुख्य सचिव श्रीनिवास ने स्पष्ट किया कि आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को त्वरित परिवहन सुविधा देने के लिए मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और जननी एक्सप्रेस के बीच बेहतर समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने प्रत्येक एम्बुलेंस के उपयोग की नियमित समीक्षा करने और फील्ड रिपोर्टों के आधार पर सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए।
स्थानीय स्तर पर संचालन व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि उपलब्ध एम्बुलेंस का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।
कॉल सेंटर और डेटा प्रबंधन पर फोकस
मुख्य सचिव ने जननी एक्सप्रेस कॉल सेंटर के दैनिक कामकाज की विस्तृत समीक्षा के भी निर्देश दिए। इसमें सहायता के लिए कॉल आने से लेकर एम्बुलेंस रवाना होने तक की पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन शामिल होगा। उन्होंने अधिकारियों को कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक के स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा हो सके।
श्रीनिवास ने कहा कि इस व्यवस्था से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान और महिलाओं को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
सेवा की मौजूदा स्थिति और आँकड़े
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक जोगाराम ने बताया कि राजस्थान में जननी एक्सप्रेस सेवा के अंतर्गत फिलहाल 600 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जनवरी 2021 से 10 दिसंबर 2025 तक कुल 18,86,048 लाभार्थियों ने इस सेवा का लाभ उठाया है। वर्तमान में इस सेवा का संचालन राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है।
बैठक में यह भी बताया गया कि जुलाई 2026 तक सभी 600 एम्बुलेंस के पूर्ण रूप से संचालित होने की उम्मीद है।
भविष्य के संचालन विकल्पों पर विचार
बैठक में जननी एक्सप्रेस के आगामी संचालन को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। इसमें ओपन टेंडर प्रक्रिया अथवा किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के माध्यम से सेवा के प्रबंधन के विकल्पों पर चर्चा की गई। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य अवसंरचना को व्यापक रूप से सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़, वित्त विभाग के प्रतिनिधि, जन स्वास्थ्य निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतिरिक्त मिशन निदेशक, वित्त निदेशक, परियोजना निदेशक, स्टोर अधिकारी, राज्य नोडल अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आगामी महीनों में जुलाई 2026 की समयसीमा और ओपन टेंडर पर अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि राजस्थान की यह महत्वाकांक्षी मातृ परिवहन सेवा किस दिशा में आगे बढ़ती है।