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राजस्थान: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जननी एक्सप्रेस सेवा की समीक्षा की, हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के परिवहन को मजबूत करने के निर्देश

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राजस्थान: मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जननी एक्सप्रेस सेवा की समीक्षा की, हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के परिवहन को मजबूत करने के निर्देश

सारांश

राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जननी एक्सप्रेस की समीक्षा बैठक में हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के लिए परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। राज्य में 600 एम्बुलेंस से अब तक 18.86 लाख महिलाएँ लाभान्वित हो चुकी हैं और जुलाई 2026 तक पूर्ण संचालन का लक्ष्य है।

मुख्य बातें

श्रीनिवास ने जयपुर में '104 जननी एक्सप्रेस' सेवा की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुँचाने के लिए परिवहन व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
राजस्थान में जननी एक्सप्रेस के तहत 600 एम्बुलेंस उपलब्ध; जनवरी 2021 से 10 दिसंबर 2025 तक 18,86,048 लाभार्थी सेवा का उपयोग कर चुके हैं।
कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ने और प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक स्तर पर समीक्षा के निर्देश।
सेवा का संचालन वर्तमान में राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी कर रही है; जुलाई 2026 तक सभी 600 एम्बुलेंस पूर्णतः संचालित होने का लक्ष्य।
भविष्य के प्रबंधन के लिए ओपन टेंडर या सार्वजनिक उपक्रम के विकल्पों पर विचार जारी।

राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने 4 अक्टूबर 2025 को जयपुर स्थित शासन सचिवालय में '104 जननी एक्सप्रेस' एम्बुलेंस सेवा के संचालन एवं प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गर्भवती महिलाओं — विशेष रूप से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं — को समय पर अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।

बैठक में क्या हुए निर्देश

मुख्य सचिव श्रीनिवास ने स्पष्ट किया कि आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को त्वरित परिवहन सुविधा देने के लिए मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और जननी एक्सप्रेस के बीच बेहतर समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने प्रत्येक एम्बुलेंस के उपयोग की नियमित समीक्षा करने और फील्ड रिपोर्टों के आधार पर सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए।

स्थानीय स्तर पर संचालन व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि उपलब्ध एम्बुलेंस का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

कॉल सेंटर और डेटा प्रबंधन पर फोकस

मुख्य सचिव ने जननी एक्सप्रेस कॉल सेंटर के दैनिक कामकाज की विस्तृत समीक्षा के भी निर्देश दिए। इसमें सहायता के लिए कॉल आने से लेकर एम्बुलेंस रवाना होने तक की पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन शामिल होगा। उन्होंने अधिकारियों को कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक के स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा हो सके।

श्रीनिवास ने कहा कि इस व्यवस्था से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान और महिलाओं को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

सेवा की मौजूदा स्थिति और आँकड़े

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक जोगाराम ने बताया कि राजस्थान में जननी एक्सप्रेस सेवा के अंतर्गत फिलहाल 600 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जनवरी 2021 से 10 दिसंबर 2025 तक कुल 18,86,048 लाभार्थियों ने इस सेवा का लाभ उठाया है। वर्तमान में इस सेवा का संचालन राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के माध्यम से किया जा रहा है।

बैठक में यह भी बताया गया कि जुलाई 2026 तक सभी 600 एम्बुलेंस के पूर्ण रूप से संचालित होने की उम्मीद है।

भविष्य के संचालन विकल्पों पर विचार

बैठक में जननी एक्सप्रेस के आगामी संचालन को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। इसमें ओपन टेंडर प्रक्रिया अथवा किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के माध्यम से सेवा के प्रबंधन के विकल्पों पर चर्चा की गई। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य अवसंरचना को व्यापक रूप से सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़, वित्त विभाग के प्रतिनिधि, जन स्वास्थ्य निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतिरिक्त मिशन निदेशक, वित्त निदेशक, परियोजना निदेशक, स्टोर अधिकारी, राज्य नोडल अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आगामी महीनों में जुलाई 2026 की समयसीमा और ओपन टेंडर पर अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि राजस्थान की यह महत्वाकांक्षी मातृ परिवहन सेवा किस दिशा में आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितनी महिलाएँ हाई-रिस्क श्रेणी की थीं और उन्हें समय पर परिवहन मिला। कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ने का निर्देश सही दिशा में है, लेकिन यह तंत्र तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक फील्ड-स्तर पर डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित न हो। ओपन टेंडर बनाम सार्वजनिक उपक्रम की बहस यह भी दर्शाती है कि मौजूदा संचालन मॉडल की सीमाएँ स्वीकार की जा रही हैं — जो एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में '104 जननी एक्सप्रेस' सेवा क्या है?
जननी एक्सप्रेस राजस्थान सरकार की एक एम्बुलेंस सेवा है जो गर्भवती महिलाओं — विशेष रूप से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं — को समय पर अस्पताल पहुँचाने के लिए संचालित होती है। वर्तमान में इस सेवा के अंतर्गत 600 एम्बुलेंस उपलब्ध हैं और यह राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी द्वारा चलाई जा रही है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जननी एक्सप्रेस समीक्षा में क्या निर्देश दिए?
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं के परिवहन को मजबूत करने, प्रत्येक एम्बुलेंस के उपयोग की नियमित समीक्षा करने और कॉल सेंटर के कामकाज का मूल्यांकन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ने पर भी जोर दिया।
जनवरी 2021 से अब तक जननी एक्सप्रेस से कितनी महिलाएँ लाभान्वित हुई हैं?
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक जोगाराम के अनुसार, जनवरी 2021 से 10 दिसंबर 2025 तक कुल 18,86,048 लाभार्थियों ने जननी एक्सप्रेस सेवा का उपयोग किया है।
जुलाई 2026 तक जननी एक्सप्रेस के लिए क्या लक्ष्य रखा गया है?
जुलाई 2026 तक सभी 600 एम्बुलेंस के पूर्ण रूप से संचालित होने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, भविष्य में सेवा के प्रबंधन के लिए ओपन टेंडर प्रक्रिया या किसी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
जननी एक्सप्रेस कॉल सेंटर की समीक्षा क्यों जरूरी है?
कॉल सेंटर की समीक्षा इसलिए जरूरी है ताकि कॉल आने से लेकर एम्बुलेंस रवाना होने तक की पूरी प्रक्रिया में देरी या खामियों की पहचान हो सके। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि कॉल रिकॉर्ड को मासिक रिपोर्ट से जोड़ा जाए, जिससे प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य निदेशक स्तर पर नियमित निगरानी संभव हो।
राष्ट्र प्रेस
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