जामनगर में 108 एम्बुलेंस टीम ने भारी बारिश में पैदल पहुंचकर कराया घर पर सुरक्षित प्रसव
सारांश
मुख्य बातें
जामनगर (गुजरात) में 7 जुलाई को भारी बारिश के बीच 108 एम्बुलेंस सेवा के दो कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर कीचड़ भरे रास्तों से पैदल चलते हुए एक गर्भवती महिला तक पहुंचकर उसका घर पर ही सुरक्षित प्रसव कराया। जामजोधपुर तहसील के कोटड़ा बावीसी गांव के वाडी क्षेत्र में जलभराव के कारण एम्बुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी, फिर भी मेडिकल टीम ने मां और नवजात दोनों की जान बचाने में सफलता पाई।
कैसे मिली सूचना और कैसे पहुंची टीम
महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होते ही परिजनों ने 108 नंबर पर कॉल किया। सूचना मिलते ही इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) हसमुख सगाथिया और एम्बुलेंस पायलट कमलेश कंतारिया तुरंत रवाना हुए। लेकिन लगातार बारिश के कारण गांव की ओर जाने वाला कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ में बदल चुका था और खेतों के रास्ते भी एम्बुलेंस के लिए अगम्य थे।
ऐसे में दोनों कर्मचारियों ने वाहन छोड़कर पैदल ही महिला के घर तक पहुंचने का निर्णय लिया। मौके पर पहुंचने के बाद जांच में स्पष्ट हो गया कि महिला को अस्पताल ले जाना संभव नहीं था और प्रसव में किसी भी तरह की देरी मां और शिशु दोनों के लिए घातक साबित हो सकती थी।
मौके पर ही कराया सुरक्षित प्रसव
EMT हसमुख सगाथिया ने आवश्यक चिकित्सकीय सावधानियों और उपकरणों के साथ घर पर ही प्रसव कराया। प्रसव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और मां एवं नवजात दोनों सुरक्षित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच एक बड़ी चुनौती बनी रहती है।
500 मीटर कीचड़ में खाट पर ले जाया गया
प्रसव के बाद स्थानीय ग्रामीणों की मदद से मां और नवजात को खाट पर लिटाकर करीब 500 मीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से पैदल एम्बुलेंस तक पहुंचाया गया। इसके बाद दोनों को बेहतर उपचार और निगरानी के लिए जामजोधपुर उप-जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी स्थिति सामान्य बताई गई।
प्रोग्राम मैनेजर ने बताई सेवा की विशेषता
108 एम्बुलेंस सेवा के जामनगर प्रोग्राम मैनेजर मनवीर डागर ने बताया, 'गुजरात सरकार की 108 एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह निशुल्क है और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्यभर में संचालित की जा रही है।'
डागर ने आगे कहा, 'जब हमारी टीम मौके पर पहुंची तो भारी बारिश के कारण रास्ता पूरी तरह कीचड़ से भर गया था और एम्बुलेंस घर तक नहीं जा सकती थी। हमारे दोनों कर्मचारी पैदल महिला के घर पहुंचे और यह स्पष्ट होने पर कि अस्पताल पहुंचने का समय नहीं है, उन्होंने मौके पर ही सुरक्षित प्रसव कराया।' उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात के हर जिले और गांव तक यह सेवा उपलब्ध है और कोई भी नागरिक 108 डायल कर निशुल्क सहायता प्राप्त कर सकता है।
क्षेत्र में हो रही सराहना
भारी बारिश की विषम परिस्थितियों में 108 एम्बुलेंस कर्मियों की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों ने इसे आपदा जैसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। गौरतलब है कि मानसून के दौरान गुजरात के ग्रामीण इलाकों में इस तरह की आपात स्थितियां अक्सर सामने आती हैं, और यह घटना आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी तैयारी पर नए सिरे से ध्यान दिलाती है।