23 अक्टूबर 2026
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PM मोदी ने शेयर किया श्रीमद्भागवत का श्लोक: 'भय और पराधीनता से मुक्ति ही सच्ची स्वतंत्रता'

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PM मोदी ने शेयर किया श्रीमद्भागवत का श्लोक: 'भय और पराधीनता से मुक्ति ही सच्ची स्वतंत्रता'

सारांश

PM मोदी ने 23 अक्टूबर को श्रीमद्भागवत के उद्धव गीता का श्लोक साझा किया — जिसका सन्देश है कि वास्तविक स्वतंत्रता भय और पराधीनता से मुक्ति में है, और यह मुक्ति केवल आत्मज्ञान या ईश्वर-समर्पण से सम्भव है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 23 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर श्रीमद्भागवत महापुराण का संस्कृत श्लोक साझा किया।
यह श्लोक उद्धव गीता के 11वें स्कंध, 10वें अध्याय का 33वाँ श्लोक है।
श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण उद्धव को जीव की आध्यात्मिक परतंत्रता और उससे उत्पन्न भय-मोह का बोध कराते हैं।
संदेश का सार: वास्तविक स्वतंत्रता शरीर-मन-अहंकार के बंधन से मुक्ति और आत्मज्ञान में निहित है।
मोदी समय-समय पर सनातन परम्परा के दार्शनिक उद्धरण सोशल मीडिया पर साझा करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर श्रीमद्भागवत महापुराण का एक संस्कृत श्लोक साझा किया, जिसमें भय, पराधीनता और आत्मज्ञान के माध्यम से वास्तविक स्वतंत्रता का संदेश निहित है। यह श्लोक उद्धव गीता के 11वें स्कंध के 10वें अध्याय का 33वाँ श्लोक है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण उद्धव को जीव की परतंत्रता और उससे उत्पन्न दुख-मोह के बारे में बोध देते हैं।

कौन-सा श्लोक साझा किया

मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक है — 'यावदस्यास्वतन्त्रत्वं तावदीश्वरतो भयम्। य एतत्समुपासीरंस्ते मुह्यन्ति शुचार्पिताः॥' इसका भावार्थ है कि जब तक मनुष्य स्वयं को स्वतंत्र नहीं समझता, वह किसी न किसी प्रभुत्वशाली शक्ति के भय में जीता रहता है। जो इस विचार को स्वीकार कर लेते हैं, वे भय, दुख और भ्रम से घिरे रहते हैं।

श्लोक का आध्यात्मिक संदर्भ

यह श्लोक उद्धव गीता का अंग है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रिय भक्त उद्धव को जीव की आध्यात्मिक परतंत्रता का स्वरूप समझाते हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब तक मनुष्य स्वयं को शरीर, मन और अहंकार के स्तर पर देखता है, वह प्रकृति के तीन गुणों — सत्व, रज और तम — के अधीन बना रहता है।

इस आध्यात्मिक परतंत्रता में व्यक्ति बाहरी परिस्थितियों और अपने कर्मों का दास बन जाता है। जो स्वयं को कर्ता मानता है और संसार के द्वंद्वों — सुख-दुख, लाभ-हानि — में उलझा रहता है, वह निरंतर 'काल' के भय से ग्रस्त रहता है।

मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री ने इस श्लोक को साझा करते हुए संदेश दिया कि वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ केवल बाहरी बंधनों से मुक्ति नहीं है, बल्कि भय और पराधीनता से मुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने की क्षमता में है। श्रीकृष्ण के अनुसार, जो लोग इस अनित्य संसार और शारीरिक पहचान को ही अपना सर्वस्व मान लेते हैं, वे कभी इस चक्र से बाहर नहीं निकल पाते।

श्लोक का मूल संदेश

भागवत के इस प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं कि जीव जब तक अपने वास्तविक स्वरूप — आत्मा — को भूलकर माया के अधीन रहता है, वह दुखी ही रहेगा। वास्तविक स्वतंत्रता और निर्भयता केवल आत्मज्ञान या ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से ही सम्भव है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर सोशल मीडिया पर ऐसे दार्शनिक और आध्यात्मिक उद्धरण साझा करते रहे हैं, जो सनातन परम्परा की गहराई को आम जनता तक पहुँचाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे व्यापक संदर्भ में देखें तो यह सनातन दर्शन को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की एक सुसंगत रणनीति का हिस्सा है। मोदी ने अपने कार्यकाल में बारंबार उपनिषद, गीता और पुराण के उद्धरणों को सार्वजनिक मंच पर रखा है — यह सॉफ्ट-पावर कूटनीति और सांस्कृतिक राजनीति का सम्मिलन है। उद्धव गीता का यह विशेष श्लोक — जो काल-भय और माया-बंधन पर केंद्रित है — ऐसे समय में साझा किया गया जब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है। मुख्यधारा की कवरेज इस चुनाव के प्रतीकात्मक पाठ को प्रायः अनदेखा कर देती है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने कौन-सा श्लोक सोशल मीडिया पर साझा किया?
मोदी ने 'यावदस्यास्वतन्त्रत्वं तावदीश्वरतो भयम्। य एतत्समुपासीरंस्ते मुह्यन्ति शुचार्पिताः॥' श्लोक साझा किया। यह श्रीमद्भागवत महापुराण के 11वें स्कंध, 10वें अध्याय का 33वाँ श्लोक है और उद्धव गीता का हिस्सा है।
इस श्लोक का हिंदी में क्या अर्थ है?
इस श्लोक का भावार्थ है कि जब तक मनुष्य स्वयं को स्वतंत्र नहीं समझता, वह किसी प्रभुत्वशाली शक्ति के भय में जीता रहता है। इस विचार को स्वीकार करने वाले लोग भय, दुख और भ्रम से घिरे रहते हैं। वास्तविक स्वतंत्रता और निर्भयता केवल आत्मज्ञान या ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से संभव है।
उद्धव गीता क्या है और यह श्लोक उसमें कहाँ आता है?
उद्धव गीता श्रीमद्भागवत महापुराण के 11वें स्कंध में वर्णित वह प्रसंग है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रिय भक्त उद्धव को आत्मज्ञान और मोक्ष का उपदेश देते हैं। यह श्लोक उसी प्रसंग का हिस्सा है जहाँ श्रीकृष्ण जीव की आध्यात्मिक परतंत्रता और माया-बंधन को समझाते हैं।
मोदी ने इस श्लोक को साझा करने से क्या संदेश दिया?
प्रधानमंत्री मोदी ने इस श्लोक के माध्यम से संदेश दिया कि वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ केवल बाहरी बंधनों से नहीं, बल्कि भय और पराधीनता से मुक्त होकर आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने में है। शरीर, मन और अहंकार की पहचान से ऊपर उठकर ही व्यक्ति सच्ची निर्भयता पा सकता है।
क्या मोदी पहले भी इस तरह के आध्यात्मिक उद्धरण साझा करते रहे हैं?
हाँ, प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर सोशल मीडिया पर उपनिषद, भगवद्गीता और पुराणों के श्लोक व सुभाषित साझा करते रहे हैं। यह उनके सार्वजनिक संवाद में सनातन दर्शन को आम जनता तक पहुँचाने की एक सुसंगत परम्परा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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