PM मोदी ने महाभारत का संस्कृत श्लोक साझा किया: 'संकटों से जूझकर ही मिलती है सफलता'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें जीवन में जोखिम उठाने और चुनौतियों का डटकर सामना करने को सफलता की अनिवार्य शर्त बताया गया है। यह श्लोक महाभारत के शांतिपर्व के 138वें अध्याय के 34वें श्लोक से लिया गया है।
कौन-सा श्लोक साझा किया गया
मोदी द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक इस प्रकार है: 'न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति। संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥' इस श्लोक का भावार्थ है कि जो मनुष्य जोखिम उठाने का साहस नहीं रखता, वह कभी श्रेष्ठ फल नहीं पा सकता; किंतु जो साहस, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ संकट का सामना करते हुए जीवित बच निकलता है, वही वास्तविक सफलता का आनंद लेता है।
श्लोक का गहरा अर्थ
शांतिपर्व के इस श्लोक में 'संशय' शब्द का प्रयोग संदेह के अर्थ में नहीं, बल्कि जोखिम या अनिश्चितता के अर्थ में किया गया है। इसका मूल संदेश यह है कि बड़ी उपलब्धि या लक्ष्य प्राप्ति के लिए जीवन में अनिश्चितता को स्वीकार करना अनिवार्य है — बिना जोखिम लिए श्रेष्ठ परिणाम संभव नहीं।
गौरतलब है कि यह श्लोक केवल साहस का ही नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और सावधानी के साथ जोखिम उठाने का भी आह्वान करता है — ताकि व्यक्ति संकट को पार कर उसके सुखद परिणाम का आनंद ले सके।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री की ओर से साझा इस सुभाषित के माध्यम से देशवासियों को प्रेरित किया गया है कि वे चुनौतियों से विमुख होने के बजाय उनका डटकर सामना करें। यह ऐसे समय में आया है जब नरेंद्र मोदी अपने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अक्सर प्रेरणादायक और दार्शनिक विचार साझा करते रहे हैं।
महाभारत की प्रासंगिकता
महाभारत का शांतिपर्व राजनीति, नैतिकता और जीवन-दर्शन पर भारतीय परंपरा का सबसे विस्तृत ग्रंथ माना जाता है। इस पर्व में युधिष्ठिर को भीष्म पितामह द्वारा दिए गए उपदेश शामिल हैं। इसी परंपरा में यह श्लोक जीवन में साहसपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। इस प्रकार के सुभाषित आधुनिक नेतृत्व और व्यक्तिगत विकास के संदर्भ में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।