PM मोदी ने एक्स पर साझा किया महाभारत का श्लोक: 'सेवा में निष्ठा ही सर्वश्रेष्ठ पुण्यकर्म'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें निःस्वार्थ सेवा और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन का सर्वोच्च पुण्य कर्म बताया गया है। यह श्लोक महाभारत के शांतिपर्व से लिया गया है और समाज में सेवाभाव की अनिवार्यता पर प्रकाश डालता है।
साझा किया गया सुभाषित
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा — 'नित्यं परिचरेच्चैव तद्वै सुकृतमुत्तमम्। कीर्तिं पुण्यं यशो लोकान् प्राप्स्यसे राजसत्तम।।' इस श्लोक का भावार्थ है कि व्यक्ति को प्रतिदिन समर्पित भाव से सेवा एवं कर्तव्य का पालन करना चाहिए, क्योंकि यही सर्वश्रेष्ठ सत्कर्म है। ऐसा करने वाले को संसार में कीर्ति, पुण्य, यश और उच्च प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
श्लोक का संदर्भ और महत्व
महाभारत के शांतिपर्व से उद्धृत यह श्लोक निःस्वार्थ सेवा, कर्तव्यपरायणता और सदाचार के महत्व को रेखांकित करता है। इसमें विशेष रूप से राजाओं और नेताओं को संबोधित करते हुए कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के लोक-कल्याण और सेवाकार्यों में निरंतर लगा रहता है, तो उसे समाज में अपार आदर और अमर कीर्ति प्राप्त होती है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से प्राचीन भारतीय ग्रंथों से सुभाषित साझा करते रहे हैं।
पिछले दिन का सुभाषित
इससे एक दिन पूर्व, मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी ने एक अन्य संस्कृत श्लोक साझा किया था — 'ज्ञानवांश्च तथा वाग्मी कर्मस्वपि च निष्ठितः। एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥' यह श्लोक महाराजा भोज रचित वास्तुशास्त्र ग्रंथ 'समराङ्गणसूत्रधार' के 44वें अध्याय का 16वाँ श्लोक है।
उस श्लोक का आशय था कि कोई व्यक्ति चाहे कितना भी ज्ञानी, वक्ता और कर्मनिष्ठ हो — यदि उसमें सदाचार और शील का अभाव है, तो वह समाज में वास्तव में आदरणीय नहीं माना जा सकता। यह संदेश चरित्र की प्राथमिकता को योग्यता से ऊपर रखता है।
व्यापक परिप्रेक्ष्य
यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और सेवाभाव की बहस देश में प्रासंगिक बनी हुई है। प्रधानमंत्री द्वारा प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का यह क्रम निरंतर जारी है। इन सुभाषितों के माध्यम से वे सेवा, ज्ञान और सदाचार — तीनों को जोड़कर एक समग्र जीवनदर्शन प्रस्तुत कर रहे हैं।