27 जुलाई 2026
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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'शीलवान् पूजितो लोके' — सदाचार ही सच्ची प्रतिष्ठा का आधार

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PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक: 'शीलवान् पूजितो लोके' — सदाचार ही सच्ची प्रतिष्ठा का आधार

सारांश

प्रधानमंत्री मोदी ने 27 जुलाई को एक्स पर 'शीलवान् पूजितो लोके' श्लोक साझा कर संदेश दिया कि सदाचार ही सच्ची प्रतिष्ठा और नेतृत्व का आधार है। यह उनकी नियमित सुभाषित शृंखला का हिस्सा है, जिसमें 23 और 24 जुलाई को भी प्राचीन भारतीय दर्शन के श्लोक साझा किए गए थे।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई 2026 को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'शीलवान् पूजितो लोके' साझा किया।
श्लोक का संदेश: सदाचारी व्यक्ति समाज में प्रतिष्ठित होता है और हर उत्तरदायित्व के योग्य माना जाता है।
24 जुलाई को मोदी ने 'कर्मणा मनसा वाचा' श्लोक साझा किया था — कल्याणकारी कर्म और चिंतन का आह्वान।
23 जुलाई को आत्मा और ब्रह्माण्ड की एकता पर आधारित श्लोक साझा किया गया था।
प्रधानमंत्री की यह सुभाषित शृंखला भारतीय दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से प्रसारित करने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें सदाचारी जीवन को सामाजिक प्रतिष्ठा और नेतृत्व की आधारशिला बताया गया है। इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि उत्तम चरित्र ही व्यक्ति को हर उत्तरदायित्व के योग्य बनाता है।

साझा किया गया श्लोक और उसका अर्थ

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर यह संस्कृत श्लोक पोस्ट किया —

शीलवान् पूजितो लोके, शीलवान् साधुसम्मतः।
शीलवान् सर्वकर्मार्हः, शीलवान् प्रियदर्शनः॥

इस श्लोक का हिंदी भावार्थ है: 'सदाचारी मनुष्य समाज में प्रतिष्ठा और सज्जनों का आदर प्राप्त करता है।' उत्तम चरित्र से युक्त व्यक्ति अपनी सत्यनिष्ठा, विनम्रता और मर्यादित आचरण के कारण प्रत्येक उत्तरदायित्व के योग्य माना जाता है; उसका व्यक्तित्व सभी के लिए आकर्षक और अनुकरणीय होता है। वास्तव में, सफलता, प्रभावी नेतृत्व और अटूट विश्वास का वास्तविक आधार उत्तम चरित्र ही है।

पिछले दिनों के सुभाषित — एक निरंतर शृंखला

प्रधानमंत्री मोदी ने 24 जुलाई को भी एक्स पर सुभाषित साझा किया था। उस दिन उन्होंने यह श्लोक पोस्ट किया था —

कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।
तदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत्॥

इसका भावार्थ है: 'मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वचनों के द्वारा जिस किसी विषय का निरंतर अभ्यास करता है, वही अंततः उसके व्यक्तित्व को ढालकर उसे उसी दिशा में खींच ले जाता है — इसलिए मनुष्य को सदैव कल्याणकारी विषयों को ही अपने चिंतन और संवाद में स्थान देना चाहिए।'

23 जुलाई का सुभाषित: आत्मा और ब्रह्माण्ड की एकता

इससे एक दिन पूर्व, 23 जुलाई को, प्रधानमंत्री ने एक्स पर यह श्लोक साझा किया था —

यश्चायमस्मिन्नाकाशे तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषः सर्वानुभूः।
यश्चायमस्मिन्नात्मनि तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषः सर्वानुभूः॥

इसका भावार्थ है: 'विस्तृत आकाश या अंतरिक्ष में जो शक्तिमयी शाश्वत सत्ता है, वही हमारी आत्मा में भी विद्यमान है — जो पिंड या कण-कण में है, वही ब्रह्माण्ड में है।' यह श्लोक भारतीय दर्शन की उस अवधारणा को रेखांकित करता है जिसे 'अहं ब्रह्मास्मि' के रूप में जाना जाता है।

प्रधानमंत्री की सुभाषित-शृंखला का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से एक्स पर संस्कृत सुभाषित और प्राचीन भारतीय ग्रंथों के श्लोक साझा करते रहे हैं। यह शृंखला भारतीय सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने के उनके प्रयास का हिस्सा मानी जाती है। इन श्लोकों के माध्यम से वे नैतिकता, कर्म और आत्मचिंतन जैसे विषयों पर समाज को प्रेरित करते हैं। आने वाले दिनों में भी इस शृंखला के जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सोशल मीडिया के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान को समकालीन राजनीतिक संवाद से जोड़ती है। उल्लेखनीय यह है कि 'शील' और 'कल्याण' जैसे मूल्यों पर बल देना ऐसे समय में आता है जब सार्वजनिक जीवन में नैतिकता को लेकर व्यापक बहस जारी है। यह देखना रोचक होगा कि क्या ये श्लोक केवल प्रेरणा के रूप में रहते हैं या सरकारी नीति-निर्माण में इनका कोई व्यावहारिक प्रतिबिंब भी दिखता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी ने 27 जुलाई को एक्स पर कौन-सा श्लोक साझा किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 27 जुलाई 2026 को एक्स पर संस्कृत श्लोक 'शीलवान् पूजितो लोके, शीलवान् साधुसम्मतः। शीलवान् सर्वकर्मार्हः, शीलवान् प्रियदर्शनः॥' साझा किया। इसका अर्थ है कि सदाचारी व्यक्ति समाज में प्रतिष्ठित होता है और हर उत्तरदायित्व के योग्य माना जाता है।
'शीलवान् पूजितो लोके' श्लोक का हिंदी अर्थ क्या है?
इस श्लोक का अर्थ है कि सदाचारी मनुष्य समाज में प्रतिष्ठा और सज्जनों का आदर प्राप्त करता है। उत्तम चरित्र वाला व्यक्ति सत्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण हर उत्तरदायित्व के योग्य होता है और उसका व्यक्तित्व सभी के लिए अनुकरणीय बनता है।
PM मोदी ने 24 जुलाई को कौन-सा सुभाषित साझा किया था?
24 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने 'कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते' श्लोक साझा किया था। इसका संदेश था कि मनुष्य जिस विषय का निरंतर अभ्यास करता है, वही उसके व्यक्तित्व को ढालता है — इसलिए सदैव कल्याणकारी विषयों पर ध्यान देना चाहिए।
23 जुलाई को मोदी ने एक्स पर क्या साझा किया था?
23 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मा और ब्रह्माण्ड की एकता पर आधारित श्लोक 'यश्चायमस्मिन्नाकाशे तेजोमयोऽमृतमयः पुरुषः सर्वानुभूः' साझा किया था। इसका अर्थ है कि जो शक्ति अंतरिक्ष में है, वही हमारी आत्मा में भी विद्यमान है।
प्रधानमंत्री मोदी की सुभाषित शृंखला का उद्देश्य क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी नियमित रूप से एक्स पर संस्कृत सुभाषित साझा करते हैं, जिसका उद्देश्य प्राचीन भारतीय दार्शनिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना है। ये श्लोक नैतिकता, कर्म और आत्मचिंतन जैसे विषयों पर समाज को प्रेरित करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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