नक्सलवाद के खिलाफ CRPF की जीरो-कैजुअल्टी रणनीति, BJP नेताओं ने मोदी सरकार की नीति को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026। नक्सलवाद विरोधी अभियानों में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार की रणनीति की प्रशंसा की है। नेताओं ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में नक्सली अभियानों के दौरान CRPF का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ — जिसे वे आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण और सुनियोजित रणनीतिक अभियानों का परिणाम बता रहे हैं।
नेताओं ने क्या कहा
केंद्रीय राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार ने इसे देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सुरक्षाकर्मियों को बेहतर सुविधाएँ और आधुनिक उपकरण — जिनमें बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल हैं — उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत रही है। मजूमदार ने कहा, 'जो जवान देश की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं, वे सर्वोत्तम सुरक्षा और देखभाल के हकदार हैं।'
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री उमेश राय ने इसे 'बदलते भारत की तस्वीर' बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की व्यवस्था की जाएगी, और पिछले एक वर्ष में इसी रणनीति के परिणाम दिखाई दे रहे हैं। राय ने कहा कि आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी ताकि देश में अशांति फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
अग्निमित्रा पॉल का व्यापक सुरक्षा परिप्रेक्ष्य
पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने नक्सलवाद विरोधी सफलता को व्यापक सुरक्षा नीति के बदलाव से जोड़ा। उन्होंने 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार पर आरोप लगाया कि उस समय आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी जवाब देने का राजनीतिक साहस नहीं दिखाया गया। पॉल ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद देश की सुरक्षा नीति में बुनियादी बदलाव आया है।
BJP प्रवक्ता का बयान
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने इसे केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि CRPF ने बड़े पैमाने पर कई अभियान चलाए, फिर भी एक भी जवान की जान नहीं गई। उनके अनुसार यह सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता और बेहतर रणनीति का प्रमाण है। इस्लाम ने CRPF के जवानों और अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
व्यापक संदर्भ: नक्सलवाद की स्थिति
गौरतलब है कि वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से घटी है, हालाँकि छत्तीसगढ़, झारखंड और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार नक्सलवाद को 2026 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। नेताओं का यह बयान उसी लक्ष्य की दिशा में हो रही प्रगति को रेखांकित करने का प्रयास है।
आगे भी सरकार की ओर से सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज़ करने की योजना बताई जा रही है।