सीआरपीएफ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 47 साल में पहली बार 12 महीने शून्य हताहत, NDA नेताओं ने सराहा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने 47 वर्षों के इतिहास में पहली बार एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है — बल के करीब 3.25 लाख जवानों ने लगातार 12 महीने तक बिना किसी हताहत के अपनी ड्यूटी निभाई। 4 नवंबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेताओं ने बल की रणनीति, आधुनिक तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था में आए सुधारों को इसका श्रेय दिया है।
ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मील के पत्थर को सीआरपीएफ के इतिहास में एक असाधारण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, बल के गठन के 47 वर्षों में यह पहला अवसर है जब पूरे बारह माह तक एक भी जवान को नहीं खोया गया। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के जवान वर्षभर विभिन्न अभियानों और सुरक्षा गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, इसलिए शून्य हताहत का यह रिकॉर्ड बल की कार्यक्षमता और परिचालन दक्षता का प्रमाण है।
गौरतलब है कि सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जो नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत सहित कई संवेदनशील इलाकों में तैनात रहता है। ऐसे में यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
JDU प्रवक्ता की प्रतिक्रिया
JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि देश की आज़ादी के बाद से सीआरपीएफ ने विभिन्न मोर्चों पर असाधारण कार्य करते हुए अनेक महत्वपूर्ण सफलताएँ हासिल की हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में देश की सुरक्षा के लिए कई जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। रंजन ने कहा कि इस वर्ष तकनीक के इस्तेमाल, रणनीति में बदलाव और देश की परिस्थितियों में आए सकारात्मक परिवर्तनों के कारण सीआरपीएफ में किसी जवान की शहादत नहीं हुई।
उन्होंने आगे कहा कि सीआरपीएफ का शौर्य और पराक्रम हमेशा से देश के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया है।
सांसद और मंत्री ने मोदी-शाह को दिया श्रेय
JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने इस उपलब्धि का श्रेय सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 महीनों में सीआरपीएफ के किसी भी जवान का घायल या शहीद न होना सुरक्षा व्यवस्था में आए बुनियादी बदलावों को दर्शाता है।
बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 47 वर्षों में पहली बार सीआरपीएफ में किसी जवान की जान नहीं गई है। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के प्रयासों से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है तथा अपराध पर नियंत्रण बनाए रखने में सहायता मिली है।
आगे की राह
यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब सुरक्षाबलों के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन पर सरकार का विशेष ध्यान केंद्रित है। आलोचकों का कहना है कि शून्य हताहत का आँकड़ा तभी टिकाऊ साबित होगा जब परिचालन क्षेत्रों में तैनाती और खतरे के स्तर की पूरी जानकारी सार्वजनिक हो। फिर भी, सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिकॉर्ड बल के मनोबल और प्रशिक्षण स्तर में सुधार का सकारात्मक संकेत है। अब सवाल यह है कि क्या आने वाले महीनों में भी यह सिलसिला बरकरार रह सकता है।