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सीआरपीएफ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 47 साल में पहली बार 12 महीने शून्य हताहत, NDA नेताओं ने सराहा

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सीआरपीएफ का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 47 साल में पहली बार 12 महीने शून्य हताहत, NDA नेताओं ने सराहा

सारांश

सीआरपीएफ के 47 साल के इतिहास में पहली बार पूरे 12 महीने कोई जवान नहीं खोया — 3.25 लाख की फोर्स के लिए यह असाधारण है। BJP और JDU नेताओं ने इसे आधुनिक तकनीक और बेहतर रणनीति की जीत बताया, जबकि श्रेय सीधे मोदी-शाह को भी दिया गया।

मुख्य बातें

सीआरपीएफ ने अपने 47 वर्षों के इतिहास में पहली बार 12 महीने तक शून्य हताहत का रिकॉर्ड कायम किया।
बल में करीब 3.25 लाख जवान तैनात हैं जो वर्षभर विभिन्न अभियानों में सक्रिय रहते हैं।
बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे बल की कार्यक्षमता का प्रमाण बताया।
JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने उपलब्धि का श्रेय PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को दिया।
नेताओं ने तकनीकी उन्नयन, रणनीति में बदलाव और सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार को इसका कारण बताया।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने अपने 47 वर्षों के इतिहास में पहली बार एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है — बल के करीब 3.25 लाख जवानों ने लगातार 12 महीने तक बिना किसी हताहत के अपनी ड्यूटी निभाई। 4 नवंबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेताओं ने बल की रणनीति, आधुनिक तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था में आए सुधारों को इसका श्रेय दिया है।

ऐतिहासिक उपलब्धि का महत्व

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मील के पत्थर को सीआरपीएफ के इतिहास में एक असाधारण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, बल के गठन के 47 वर्षों में यह पहला अवसर है जब पूरे बारह माह तक एक भी जवान को नहीं खोया गया। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के जवान वर्षभर विभिन्न अभियानों और सुरक्षा गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, इसलिए शून्य हताहत का यह रिकॉर्ड बल की कार्यक्षमता और परिचालन दक्षता का प्रमाण है।

गौरतलब है कि सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जो नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत सहित कई संवेदनशील इलाकों में तैनात रहता है। ऐसे में यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

JDU प्रवक्ता की प्रतिक्रिया

JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि देश की आज़ादी के बाद से सीआरपीएफ ने विभिन्न मोर्चों पर असाधारण कार्य करते हुए अनेक महत्वपूर्ण सफलताएँ हासिल की हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में देश की सुरक्षा के लिए कई जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। रंजन ने कहा कि इस वर्ष तकनीक के इस्तेमाल, रणनीति में बदलाव और देश की परिस्थितियों में आए सकारात्मक परिवर्तनों के कारण सीआरपीएफ में किसी जवान की शहादत नहीं हुई।

उन्होंने आगे कहा कि सीआरपीएफ का शौर्य और पराक्रम हमेशा से देश के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया है।

सांसद और मंत्री ने मोदी-शाह को दिया श्रेय

JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने इस उपलब्धि का श्रेय सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 महीनों में सीआरपीएफ के किसी भी जवान का घायल या शहीद न होना सुरक्षा व्यवस्था में आए बुनियादी बदलावों को दर्शाता है।

बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 47 वर्षों में पहली बार सीआरपीएफ में किसी जवान की जान नहीं गई है। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के प्रयासों से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हुई है तथा अपराध पर नियंत्रण बनाए रखने में सहायता मिली है।

आगे की राह

यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब सुरक्षाबलों के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन पर सरकार का विशेष ध्यान केंद्रित है। आलोचकों का कहना है कि शून्य हताहत का आँकड़ा तभी टिकाऊ साबित होगा जब परिचालन क्षेत्रों में तैनाती और खतरे के स्तर की पूरी जानकारी सार्वजनिक हो। फिर भी, सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिकॉर्ड बल के मनोबल और प्रशिक्षण स्तर में सुधार का सकारात्मक संकेत है। अब सवाल यह है कि क्या आने वाले महीनों में भी यह सिलसिला बरकरार रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका सही मूल्यांकन तभी संभव है जब तैनाती क्षेत्रों, खतरे के स्तर और अभियानों की पूरी जानकारी सार्वजनिक हो। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बल की परिचालन तीव्रता पहले जैसी रही या तैनाती पैटर्न में बदलाव आया है। NDA नेताओं का श्रेय-दावा स्वाभाविक राजनीतिक प्रतिक्रिया है, पर असली सवाल यह है कि क्या यह प्रवृत्ति संस्थागत सुधारों का परिणाम है या किसी विशेष वर्ष की अनुकूल परिस्थितियों का — इसका उत्तर सुरक्षा नीति की दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए अनिवार्य है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआरपीएफ का शून्य हताहत रिकॉर्ड क्या है?
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने अपने 47 वर्षों के इतिहास में पहली बार लगातार 12 महीने तक एक भी जवान को नहीं खोया। बल में करीब 3.25 लाख जवान तैनात हैं जो वर्षभर विभिन्न अभियानों में सक्रिय रहते हैं।
इस उपलब्धि का श्रेय किसे दिया जा रहा है?
NDA नेताओं ने इसका श्रेय आधुनिक तकनीक, बेहतर परिचालन रणनीति और सुरक्षा परिस्थितियों में सुधार को दिया है। JDU सांसद रामप्रीत मंडल ने सीधे PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों को उत्तरदायी बताया।
सीआरपीएफ कहाँ-कहाँ तैनात रहती है?
सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है जो नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत सहित कई संवेदनशील इलाकों में तैनात रहती है। बल वर्षभर विभिन्न सुरक्षा अभियानों में भी सक्रिय रहता है।
बिहार के BJP-JDU नेताओं ने क्या कहा?
बिहार BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इसे 47 वर्षों का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। JDU राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने तकनीक और रणनीति में बदलाव को कारण बताया, और बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने इसे बेहद स्वागतयोग्य उपलब्धि कहा।
क्या यह रिकॉर्ड आगे भी बना रह सकता है?
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह रिकॉर्ड बल के मनोबल और प्रशिक्षण में सुधार का सकारात्मक संकेत है। हालाँकि, इसकी दीर्घकालिक निरंतरता परिचालन क्षेत्रों में तैनाती के स्तर और खतरे की प्रकृति पर निर्भर करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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